एक दिन, देश के अराजनीतिक बुद्धिजीवियों से, हमारी भोली-भाली जनता..! करेगी कुछ सवाल..! पूछेगी वह उनसे, क्या किया था उन्होंने..?...
Read moreDetailsएक अंतरराष्ट्रीय साज़िश के तहत उस बच्चे ने कहा था अपनी मांं से मरने से पहले एक रोटी दे दो...
Read moreDetailsएफिल टावर शहर के किसी कोने से देखा जा सकता है मैं उसकी बगल में हूं मैं किसी एंगल से...
Read moreDetailsअगर तुम कश्मीरी औरत हो तो राष्ट्रभक्ति के लिए हो सकता है तुम्हारा बलात्कार, बलात्कारियों के समर्थन में फहराये जा...
Read moreDetailsडाॅ. (प्रो.) प्रमिला प्रकृति से प्रेम करो ना प्रकृति से प्रेम करो ना मैं कुछ न करूं तुम्हीं कुछ करो...
Read moreDetailsद बैटल शिप अपनी अंतिम यात्रा पर शिप ब्रेकिंग यार्ड युद्ध जहाज अपने कुंवारी कैनन सूंघते हैं युद्ध खेल के...
Read moreDetailsसब कुछ बिकता है यहां, ये हिंदोस्तां है जनाब ईमान बिकता है, ताज बिकता है, सांसद बिकता है. तुम्हारी इस...
Read moreDetailsजर्मनी में जब फासिस्ट मजबूत हो रहे थे और यहां तक कि मजदूर भी बड़ी तादाद में उनके साथ जा...
Read moreDetailsयदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो ?...
Read moreDetailsशहर के बाइपास के मुहाने तक बहुत सन्नाटा फैला है दबे पांंव दाखिल होना यहांं एकतरफ़ा युद्ध विराम की घोषणा...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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