कवि कारा में, और हम बाहर, लानत है ! कविता मूत में लपेट दी गई है, और लाल झंडा झाड़न...
Read moreDetailsयुद्ध लुटेरे हैं ....तो युद्ध है ! पागलपन नहीं है युद्ध क्या पागलपन में जुटाई जाती हैं सेनाएंं जमा किए...
Read moreDetailsउसे छोड़ दो वो कुछ नहीं कर सकता तुम्हारा वो लड़ नहीं सकता होगा अपने झुर्रियों से भरे हुए कांपते...
Read moreDetailsआज ही मरना था साले को रविवार है कितना कुछ सोचा था अब मुए को ढो कर ले चलो मसान...
Read moreDetailsतुम पर दया नहीं आती क्रोध उपजता है एकलव्य तुम पहचान नहीं पाये कि जिसे तुम गुरु मानकर पूजते रहे...
Read moreDetailsतुम ईद मनाओ, जगन्नाथ के रथ को हांको बड़े मोलवियों और पुजारियों की बधाई ले लो मैं तुम्हारे बिखेरे रक्त-धब्बों...
Read moreDetailsकालांतर में जब दुनिया के सारे बम बरस चुके होंगे सारे युद्धक विमान नष्ट हो कर धूल चाट रहे होंगे...
Read moreDetailsकल सुबह सूनी सड़क पर, एक गाड़ी में डाली गई थीं कुछ ज़िंदा लाशें, कहते हैं उन्हें भेजना था, 380...
Read moreDetailsवो जो भटकते रहे उम्र भर, बना दिए गए अपने ही देश में शरणार्थी. जिनकी गर्दन पर रखी है तलवार...
Read moreDetailsलॉकअप से शव को कन्धे पर उठाए मैं चल रहा हूंं अपनी मौत की घटना सुनाऊंं पूछता है शव 'मेरी...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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