हत्यारे के ख़ून से सने हाथों में आप मसले हुए गुलाब की लाली भी देख सकते हैं ज़मीन पर पड़े...
Read moreDetailsवह छः महीने की बच्ची थी उसका सबसे बड़ा दोष था आदिवासी घरों में पैदा होना वह भूख लगने पर...
Read moreDetailsशब्द भेदी सन्नाटा समय के घुंघराले बालों में जूंएं बीनते हुए कभी कांपीं नहीं उंगलियां मेरी वीभत्स का उपचार क्षणिक...
Read moreDetailsमानसून नज़दीक है छत में रिसाव दीवार में दरार है लाचारी अकेली इस साल की नहीं हर साल की है...
Read moreDetailsविद्रोह यहां पूजे जाते हैं लिंग और.. योनियों में ठूंस दी जाती है मोमबत्तियां... प्लास्टिक की बोतले कंकड़ पत्थर लोहे...
Read moreDetailsचीख इधर कई दिनों से रात में तारे गिनते रहते हैं नींद नहीं आती पता नहीं जब भी सोने का...
Read moreDetails1 चे कमान्डेन्ट - निकोलस गीयेन (1902-1989), क्यूबा के राष्ट्रकवि यद्यपि बुझा दिया है तुमने अपना आलोक तब भी म्लान...
Read moreDetailsमनुष्यता मनुष्य के लिए भूख जितनी जरूरी है उतना ही जरूरी है अवसर की समानता उतनी ही ज़रूरी है प्रत्येक...
Read moreDetailsग्लानि बोध उसने कहा था मैं तुम्हें एक चेहरा दूंगा और मैं उसकी उंगलियां पकड़े चला आया इस मेले में...
Read moreDetailsसेंगोल राम कोई इतिहास पुरुष नहीं प्रतिकात्मक रूप में भारतीय सामंती वर्णवादी मर्दवादी सत्ता का घमंड है राम निर्बल का...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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