चड्डी - 1 प्रभु : हे वत्स चड्डी छोड़ पैंट क्यों धारण की ? चडड्डीधारी : हे प्रभो ! उन...
Read moreDetailsबैताल कथा - 'जो तीसरी बार मूर्ख बने वह गधा ही हो सकता है' बेताल बोला - 'हे राजन !...
Read moreDetailsमैंने फैसला किया कि अब जब फेसबुक पर युद्ध का एलान हो ही चुका है तो चलकर पाकिस्तान का नामो...
Read moreDetailsचोर भूरे ने कूड़े से भरी रेहड़ी खत्ते में पलट कर वहीं छोड़ दी. कूड़ेदान कचरे से लबालब भर गया...
Read moreDetailsलु शून चीन के दूसरे भागों की भांति ल्यूचेन में शराब की दुकानों नहीं हैं. उन सब पर सड़क की...
Read moreDetailsआजकल मैं बहुत हीन भावना में जी रहा हूं. सामान्य तौर पर मैं सामान्य मनुष्य के जैसा जीवन ही जीना...
Read moreDetailsराजा का मूड उखड़ा हुआ था. उसने मंत्री को तलब किया. मंत्री: क्या हुआ महाराज ? राजा: कुछ मजा नहीं...
Read moreDetailsयक्ष-युधिष्ठिर संवाद : मार्क्स का नाम सुनते ही लोग बिदक क्यों जाते हैं ? यक्ष - लोग मार्क्स का नाम...
Read moreDetailsटेलीफ़ोन की घंटी बजी. मनमोहन पास ही बैठा था. उसने रिसीवर उठाया और कहा, 'हेलो... फ़ोर फ़ोर फ़ोर फाईव सेवन...'...
Read moreDetailsप्रधानमंत्री और विदेशमंत्री कहते हैं कि दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बहुत बढ़ी है. किसने एकाएक भारत की प्रतिष्ठा बढ़ा...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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