Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

का. राजकिशोर सिंह को इंकलाबी सलाम !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 30, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
का. राजकिशोर सिंह को इंकलाबी सलाम !
का. राजकिशोर सिंह (03 अक्टूबर, 1939-22 दिसम्बर, 2021)

लंबा कद, गंभीर हंसमुख चेहरा, नया पथ खोजती बड़ी-बड़ी आंखें, का. राजकिशोर सिंह, जो आर. के. सिंह के नाम से ज्यादा पहचाने जाते थे, का 82 वर्ष की उम्र में देहावसान हो गया. का. राजकिशोर सिंह की पहचान थी – धैर्यपूर्वक सुनना, बुद्धिमानी से उत्तर देना, गंभीरतापूर्वक विचार करना और निष्पक्षतापूर्वक निर्णय देना.

राजकिशोर सिंह ने दिल्ली में 1983 को आयोजित ऑल इंडिया लीग फॉर रिवोल्यूशनरी कल्चर (एआईएलआरसी) के साथ अपनी क्रांतिकारी राजनीति की शुरुआत की थी. बाद में वे एआईपीआरएफ के केंद्रीय कमेटी के सदस्य बने, फिर जब 2005 में एआईपीआरएफ और एआईपीआरएफ को मिलाकर आरडीएफ बना तो उसके महासचिव बने.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

दिल्ली में जब आरडीएफ का केन्द्रीय कार्यालय खुला तो इन्हें उसका कार्यभार संभालने की जिम्मेवारी सौंपी गई. उन्होंने करीब चार दशक तक पूरे देश का भ्रमण कर ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ एक नवजनवादी व्यवस्था की स्थापना के लिए अपना बहुमूल्य योगदान दिया.

अपने भाषण और लेखन में सामंजस्य रखते हुए इन्होंने आंदोलन को तेज करने के लिए आदिवासियों, दलितों अल्पसंख्यकों, महिलाओं, छात्र-नौजवानों, बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों के संगठन बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. ‘जन ज्वार’ और आरडीएफ का मुखपत्र ‘प्रतिरोध’ जैसी जनपक्षधर पत्रिकाओं का सफलतापूर्वक संपादन भी किया. कई बुकलेट, पुस्तिकाएं आदि उनके नाम से प्रकाशित हुए, जिससे नये समाज के निर्माण हेतु लड़ रहे आंदोलन को काफी बल मिला.

साम्राज्यवादी नीतियों के इशारे पर चल रही मौजूदा व्यवस्था के द्वारा विकास के नाम पर जब जल, जंगल, जमीन का बेहिसाब अधिग्रहण किया जाने लगा तब इसके खिलाफ पूरे देश में विस्थापितों, खासकर आदिवासियों का आंदोलन तेज होने लगा. उस समय इन्होंने कई प्रदेशों का लगातार दौरा कर सरकार की दमनकारी नीतियों का जमकर विरोध किया.

दमन के दौर में कई आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी हुई, कई को शहादतें देनी पड़ी. इस क्रम में का. राजकिशोर सिंह ने सफल नेतृत्व कर आने वाली पीढ़ियों को आंदोलन में सक्रिय रहने में अनेकों काम किये. राजनीतिक बंदियों की रिहाई के लिए किये गये कई उल्लेखनीय कामों में इनकी सहभागिता रही.

क्रांतिकारी भूमिका में आने के पूर्व का. राजकिशार 23 वर्षों तक अपने पंचायत के मुखिया रहे. 1974 के बिहार आंदोलन (जेपी आंदोलन) में सक्रिय रूप से शामिल हुए और गिरफ्तार करके मोतिहारी जेल भेजे गए. जेल में कुव्यवस्था के खिलाफ इन्होंने आंदोलन किया फलतः भागलपुर जेल में भेजा गया. कैदियों पर अत्याचार के मामले में कुख्यात भागलपुर सेंट्रल जेल में भी इन्होंने बंदियों के लिए कार्यरत एक कमिटि में सक्रिय भूमिका अदा कर विभिन्न मांगों के समर्थन में जेल प्रशासन को झुकने पर मजबूर किया.

जेल में ही क्रांतिकारी धारा के साथियों से राजनीतिक बहस के बाद इनका रुझान क्रांतिकारी धारा की ओर हुआ. जेल से बाहर आने के बाद वामपंथी आन्दोलन में हिस्सा लेने लगे. इसी बीच प्रसिद्ध क्रांतिकारी कपिल मुनि के संपर्क में आए और फिर इस धारा के अभिन्न अंग बन गए और जन आन्दोलनों में खुलकर भागीदारी निभाने लगे.

भारत की दो कम्युनिस्ट क्रांतिकारी दलों की एकता के राजनैतिक महत्व को जनता के बीच सामने लाने के लिए जब पटना के गांधी मैदान में एक रैली व आमसभा का आयोजन किया गया था तो बिहार पुलिस ने क्रार्यक्रम को बाधित करके आयोजकों व कार्यकर्ताओं के साथ का. राजकिशोर के रफ्तार कर लिया था. जमानत पर जेल से बाहर आकर दुगुने उत्साह से वे अपने मिशन में लग गये.

उम्र के 75वें पड़ाव पर आते-आते कई बीमारियों ने इन्हें घेर लिया तो अपने बखरी, पताही, पूर्वी चंपारण लौट गए, जहां पारिवारिक सदस्यों की देखभाल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली. 1974 आन्दोलन के बाद कुछ लोगों ने पुलिस की गोली से शहीद साथियों की याद में स्मारक स्थल के निर्माण के लिए कुछ जमीन दान किया था.

घर लौटने के बाद का. राज किशोर सिंह ने दान के एक हिस्से की जमीन सरकारी अस्पताल को सौंपकर उसपर ‘जनता अस्पताल’ नामकरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाया तथा शेष जमीन पर ‘जयप्रकाश आश्रम सांस्कृतिक विकास न्यास’ नामक ट्रस्ट बनाकर वाचनालय बनाने में अपना सहयोग प्रदान किया.

1974 के आन्दोलन में शरीक लोगों को जब बिहार सरकार ने पेंशन व अन्य सुविधा देने की घोषणा किया तो का. राजकिशोर ने इसे घूस मानते हुए लेने से इंकार कर दिया. देश की जनता पर बढ़ते शोषण-दमन के दौर में का. राजकिशोर सिंह का गुजर जाना जनवादी क्रांतिकारी आंदोलन को एक गंभीर क्षति है.

कॉमरेड राजकिशोर को इंकलाबी सलाम !

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

दुसरे इंसानों को खराब नीचा और गलत बता कर आप अच्छे ऊंचे और सही नहीं माने जायेंगे

Next Post

नववर्ष सबके लिए मंगलमय हो. बसुधैव कुटुम्बकम !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

नववर्ष सबके लिए मंगलमय हो. बसुधैव कुटुम्बकम !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

फेसबुक और मोदी सरकार का गठजोड़

August 28, 2020

दिल्ली चुनाव का संदेश : लोक-सापेक्ष तंत्र ही धर्म-सापेक्ष तंत्र को परास्त कर सकता है

February 29, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.