Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

का. राजकिशोर सिंह को इंकलाबी सलाम !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 30, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
का. राजकिशोर सिंह को इंकलाबी सलाम !
का. राजकिशोर सिंह (03 अक्टूबर, 1939-22 दिसम्बर, 2021)

लंबा कद, गंभीर हंसमुख चेहरा, नया पथ खोजती बड़ी-बड़ी आंखें, का. राजकिशोर सिंह, जो आर. के. सिंह के नाम से ज्यादा पहचाने जाते थे, का 82 वर्ष की उम्र में देहावसान हो गया. का. राजकिशोर सिंह की पहचान थी – धैर्यपूर्वक सुनना, बुद्धिमानी से उत्तर देना, गंभीरतापूर्वक विचार करना और निष्पक्षतापूर्वक निर्णय देना.

राजकिशोर सिंह ने दिल्ली में 1983 को आयोजित ऑल इंडिया लीग फॉर रिवोल्यूशनरी कल्चर (एआईएलआरसी) के साथ अपनी क्रांतिकारी राजनीति की शुरुआत की थी. बाद में वे एआईपीआरएफ के केंद्रीय कमेटी के सदस्य बने, फिर जब 2005 में एआईपीआरएफ और एआईपीआरएफ को मिलाकर आरडीएफ बना तो उसके महासचिव बने.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

दिल्ली में जब आरडीएफ का केन्द्रीय कार्यालय खुला तो इन्हें उसका कार्यभार संभालने की जिम्मेवारी सौंपी गई. उन्होंने करीब चार दशक तक पूरे देश का भ्रमण कर ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ एक नवजनवादी व्यवस्था की स्थापना के लिए अपना बहुमूल्य योगदान दिया.

अपने भाषण और लेखन में सामंजस्य रखते हुए इन्होंने आंदोलन को तेज करने के लिए आदिवासियों, दलितों अल्पसंख्यकों, महिलाओं, छात्र-नौजवानों, बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों के संगठन बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. ‘जन ज्वार’ और आरडीएफ का मुखपत्र ‘प्रतिरोध’ जैसी जनपक्षधर पत्रिकाओं का सफलतापूर्वक संपादन भी किया. कई बुकलेट, पुस्तिकाएं आदि उनके नाम से प्रकाशित हुए, जिससे नये समाज के निर्माण हेतु लड़ रहे आंदोलन को काफी बल मिला.

साम्राज्यवादी नीतियों के इशारे पर चल रही मौजूदा व्यवस्था के द्वारा विकास के नाम पर जब जल, जंगल, जमीन का बेहिसाब अधिग्रहण किया जाने लगा तब इसके खिलाफ पूरे देश में विस्थापितों, खासकर आदिवासियों का आंदोलन तेज होने लगा. उस समय इन्होंने कई प्रदेशों का लगातार दौरा कर सरकार की दमनकारी नीतियों का जमकर विरोध किया.

दमन के दौर में कई आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी हुई, कई को शहादतें देनी पड़ी. इस क्रम में का. राजकिशोर सिंह ने सफल नेतृत्व कर आने वाली पीढ़ियों को आंदोलन में सक्रिय रहने में अनेकों काम किये. राजनीतिक बंदियों की रिहाई के लिए किये गये कई उल्लेखनीय कामों में इनकी सहभागिता रही.

क्रांतिकारी भूमिका में आने के पूर्व का. राजकिशार 23 वर्षों तक अपने पंचायत के मुखिया रहे. 1974 के बिहार आंदोलन (जेपी आंदोलन) में सक्रिय रूप से शामिल हुए और गिरफ्तार करके मोतिहारी जेल भेजे गए. जेल में कुव्यवस्था के खिलाफ इन्होंने आंदोलन किया फलतः भागलपुर जेल में भेजा गया. कैदियों पर अत्याचार के मामले में कुख्यात भागलपुर सेंट्रल जेल में भी इन्होंने बंदियों के लिए कार्यरत एक कमिटि में सक्रिय भूमिका अदा कर विभिन्न मांगों के समर्थन में जेल प्रशासन को झुकने पर मजबूर किया.

जेल में ही क्रांतिकारी धारा के साथियों से राजनीतिक बहस के बाद इनका रुझान क्रांतिकारी धारा की ओर हुआ. जेल से बाहर आने के बाद वामपंथी आन्दोलन में हिस्सा लेने लगे. इसी बीच प्रसिद्ध क्रांतिकारी कपिल मुनि के संपर्क में आए और फिर इस धारा के अभिन्न अंग बन गए और जन आन्दोलनों में खुलकर भागीदारी निभाने लगे.

भारत की दो कम्युनिस्ट क्रांतिकारी दलों की एकता के राजनैतिक महत्व को जनता के बीच सामने लाने के लिए जब पटना के गांधी मैदान में एक रैली व आमसभा का आयोजन किया गया था तो बिहार पुलिस ने क्रार्यक्रम को बाधित करके आयोजकों व कार्यकर्ताओं के साथ का. राजकिशोर के रफ्तार कर लिया था. जमानत पर जेल से बाहर आकर दुगुने उत्साह से वे अपने मिशन में लग गये.

उम्र के 75वें पड़ाव पर आते-आते कई बीमारियों ने इन्हें घेर लिया तो अपने बखरी, पताही, पूर्वी चंपारण लौट गए, जहां पारिवारिक सदस्यों की देखभाल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली. 1974 आन्दोलन के बाद कुछ लोगों ने पुलिस की गोली से शहीद साथियों की याद में स्मारक स्थल के निर्माण के लिए कुछ जमीन दान किया था.

घर लौटने के बाद का. राज किशोर सिंह ने दान के एक हिस्से की जमीन सरकारी अस्पताल को सौंपकर उसपर ‘जनता अस्पताल’ नामकरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाया तथा शेष जमीन पर ‘जयप्रकाश आश्रम सांस्कृतिक विकास न्यास’ नामक ट्रस्ट बनाकर वाचनालय बनाने में अपना सहयोग प्रदान किया.

1974 के आन्दोलन में शरीक लोगों को जब बिहार सरकार ने पेंशन व अन्य सुविधा देने की घोषणा किया तो का. राजकिशोर ने इसे घूस मानते हुए लेने से इंकार कर दिया. देश की जनता पर बढ़ते शोषण-दमन के दौर में का. राजकिशोर सिंह का गुजर जाना जनवादी क्रांतिकारी आंदोलन को एक गंभीर क्षति है.

कॉमरेड राजकिशोर को इंकलाबी सलाम !

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

दुसरे इंसानों को खराब नीचा और गलत बता कर आप अच्छे ऊंचे और सही नहीं माने जायेंगे

Next Post

नववर्ष सबके लिए मंगलमय हो. बसुधैव कुटुम्बकम !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

नववर्ष सबके लिए मंगलमय हो. बसुधैव कुटुम्बकम !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मज़दूर वर्ग के महान शिक्षक कार्ल मार्क्स की स्मृति में

March 16, 2020

बुलडोजर पर झूमने वालों से कह दो कि बुलडोजर सिर्फ ध्वंस करता है

April 20, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.