Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home पुस्तक / फिल्म समीक्षा

बेगुनाह कैदी : भारत में नार्को टेस्ट की असलियत

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 29, 2021
in पुस्तक / फिल्म समीक्षा
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

बेगुनाह कैदी : भारत में नार्को टेस्ट की असलियत

‘नार्को टेस्ट’ को भारत में अपराध की गुत्थी सुलझाने के लिए रामबाण माना जाता है. डॉ. एस. मालनी ‘नार्को टेस्ट’ की एक्सपर्ट मानी जाती थी. विभिन्न राज्यों की ATS उन्हें ‘डॉ नार्को’ बुलाती थी और उनकी मदद लेती थी.

You might also like

‘कास्ट एंड रिवोलुशन’ : जाति उन्मूलन का एक क्रान्तिकारी नज़रिया

‘नो अदर लैंड’, तब जाएं तो जाएं कहां ?

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

मशहूर पत्रकार ‘जोसी जोसेफ’ (Josy Joseph) ने अपनी हालिया प्रकाशित महत्वपूर्ण किताब ‘The Silent Coup’ में इसका बड़ा रोचक लेकिन भयावह वर्णन किया है. आइए, इसी किताब में दिए एक अंश में देखते हैं कि मुंबई बम ब्लास्ट के आरोपी वाहिद का नार्को टेस्ट उन्होंने कैसे किया.

यह घटना 2006 की है. वाहिद को एक इंजेक्शन देने के कुछ समय बाद जब वाहिद अचेतावस्था में आ गया तो डॉ. मालनी ने संबंधित एटीएस अधिकारी की उपस्थिति में उससे पूछा- ‘बम धमाका किसने किया ?’

वाहिद – ‘मैं नहीं जानता.’

डॉ. मालिनी – ‘सिमी का प्रेसिडेंट कौन है ?’

वाहिद – ‘प्रतिभा पाटिल’ (वाहिद को लगा कि भारत के प्रेसिडेंट के बारे में पूछा गया है)

मालिनी ने दुबारा ऊंची आवाज में पूछा – ‘सिमी का प्रेसिडेंट कौन है ?’

वाहिद ने कोई उत्तर नहीं दिया.

‘कहो, डॉ. शाहिद बदर फलाही’

वाहिद ने मालिनी के कहे हुए को दोहराया, जैसे एक कड़क शिक्षक के निर्देशों का आज्ञाकारी छात्र पालन करता है.

मालिनी ने अब बम ब्लास्ट के बारे में पूछना शुरू किया.

‘तुम्हारे यहां कितने लोग आए और रहे ?’

वाहिद – ‘कोई नहीं.’

मालिनी ने कहा कि वह यह कहे कि उसके यहां 4 लोग आए और उसके साथ रहे.

वाहिद कुछ नहीं बोला।

मालिनी ने पूछा कि 3 के बाद क्या आता है ?

वाहिद ने जवाब दिया – 4

मालिनी ने पूछा कि क्या पाकिस्तानी तुम्हारे घर पर रहे ?

वाहिद ने कहा – नहीं.

अगले सवाल के रूप में मालिनी ने पूछा कि भारत के पड़ोसी देशों का नाम बताओ.

वाहिद – ‘नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान…’

पूरे समय एटीएस का एक वरिष्ठ अफसर वहां बैठा रहा और डॉ. मालिनी को निर्देश देता रहा कि क्या पूछना है.

बाद में कोर्ट में ट्रायल के दौरान वाहिद के वकील ने शिकायत की कि वाहिद को फंसाने के लिए नार्को टेस्ट की रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ (editing) की गयी है.

भारत के पड़ोसी देशों से ‘पाकिस्तान’ नाम काट कर बातचीत के दूसरे हिस्से में जोड़ दिया गया.

और जब वाहिद ने ‘तीन के बाद क्या आता है?’ के जवाब में ‘चार’ कहा था तो उसे यहां से काट कर पाकिस्तान वाले हिस्से से जोड़ दिया गया. और इस तरह वाहिद का स्टेटमेंट हो गया कि ‘पाकिस्तान से 4 लोग आकर उसके घर पर रहे थे.’

NHRC की स्पष्ट गाइडलाइंस है कि नार्को टेस्ट बिना अभियुक्त की सहमति के नहीं किया जाएगा. वाहिद से कोई सहमति नहीं ली गयी थी. लेकिन क्लाइमेक्स अभी बाकी है.

25 फरवरी 2009 को कर्नाटक सरकार ने डॉ. नार्को यानी डॉ. मालिनी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया. डॉ. नार्को ने फर्जी डिग्री से यह पद हासिल किया था. अभियुक्तों से सच निकलवाने का दावा करने वाली नार्को एक्सपर्ट की खुद की डिग्री फर्जी थी.

बर्खास्त किये जाने से पहले डॉ. मालिनी करीब 1000 नार्को टेस्ट, 3000 लाई डिटेक्टर टेस्ट और 1500 ब्रेन मैपिंग टेस्ट कर चुकी थी. और इन टेस्टों के आधार पर न जाने कितनों को सज़ा भी हो चुकी थी.

सितंबर 2015 में 9 साल जेल की यातना भुगतने के बाद वाहिद (अब्दुल वाहिद शेख) को सभी आरोपों से कोर्ट ने बरी कर दिया.

पेशे से शिक्षक अब्दुल वाहिद शेख ने जेल से बाहर आने के बाद चर्चित किताब ‘बेगुनाह कैदी’ लिखी. इसके अलावा वे विश्वव्यापी The Innocence Network से जुड़कर जेलों में बंद बेगुनाह कैदियों को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ रहे हैं.

यह तो सिर्फ एक कहानी है. ऐसी अनगिनत कहानियां यहां रोज घटित होती है. और हम इन्हीं कहानियों की कब्र पर खड़े होकर ‘विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र’ का जश्न मनाते हैं.

  • मनीष आज़ाद

Read Also –

 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

बेरोजगारी, शिक्षा, चिकित्सा, मीडिया और कारपोरेट राजनीति का तिलिस्म

Next Post

भेड़-नियम का अनुपालन इंसान में कट्टरता पैदा करती है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘कास्ट एंड रिवोलुशन’ : जाति उन्मूलन का एक क्रान्तिकारी नज़रिया

by ROHIT SHARMA
June 9, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘नो अदर लैंड’, तब जाएं तो जाएं कहां ?

by ROHIT SHARMA
April 16, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

by ROHIT SHARMA
April 2, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

दि फर्स्ट ग्रेडर : एक मर्मस्पर्शी फिल्म

by ROHIT SHARMA
March 23, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘No Other Land’: A moment of hope and solidarity

by ROHIT SHARMA
March 4, 2025
Next Post

भेड़-नियम का अनुपालन इंसान में कट्टरता पैदा करती है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

नेहरु का पत्नी प्रेम : ‘मैं उसे हद से ज्यादा चाहता था.’

June 16, 2023

स्टेन स्वामी की लाश में कानून का मवाद

July 8, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.