Tuesday, June 9, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

मनीष गुप्ता हत्याकांड : हिन्दुत्व की राह में हिन्दुत्व के ‘शहीद योद्धा’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 2, 2021
in ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
मनीष गुप्ता हत्याकांड : हिन्दुत्व की राह में हिन्दुत्व के 'शहीद योद्धा'
मीनाक्षी गुप्ता और कल्पना तिवारी

मैं बहुत खुश हूं CM योगी ने घर के बड़े अभिभावक की तरह व्यवहार किया. उन्होंने सरकारी नौकरी, आर्थिक मदद और SIT जांच की मेरी मांगें मानी है. – मीनाक्षी गुप्ता, मृतक मनीष की पत्नी.

सीएम योगी से मिलने के बाद राज्य सरकार पर उनका भरोसा बढ़ा है. उनके ऊपर परिवार की जो जिम्मेदारियां आ पड़ी हैं, वो शायद पूरा कर सकें. इस मदद के लिए सीएम योगी का आभार – कल्पना तिवारी, मृतक विवेक तिवारी की पत्नी

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

मीनाक्षी गुप्ता और कल्पना तिवारी हिन्दुत्व का वह शानदार नमूना है जिसने देश में हिन्दुत्व को स्थापित करने के लिए अपने-अपने पतियों को ‘शहीद’ मानकर हिन्दुत्ववादी ताकतों से उसका मूल्य हासिल कर चुकी है.

लखनऊ में 28 सितंबर 2018 की रात एपल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी अपनी सहकर्मी सना को छोड़ने अपनी एक्सयूवी से जा रहे थे. तभी रात के करीब डेढ़ बजे बाइक सवार दो पुलिसकर्मियों प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उन्हें रुकने का इशारा किया था. जब ने नहीं रुके तो सिपाही प्रशांत चौधरी ने विवेक निशाना बनाकर गोली चला दी थी. जिसमें विवेक की मौत हो गई थी. जबकि सना इस हमले में बाल-बाल बच गई थीं.

उसी तरह मनीष गुप्ता की भी पुलिस ने पीट पीट कर हत्या कर दी. विगत दिनों सोमवार को गुरुग्राम से दो दोस्तों के साथ गोरखपुर घूमने आए कानपुर के रियल इस्टेट कारोबारी मनीष गुप्ता (36) की सोमवार देर रात पुलिस की पिटाई से मौत हो गई. आरोप है कि जांच का विरोध करने पर पुलिस कर्मियों ने उनकी बेरहमी से पिटाई की थी साथ ही उनके दोस्तों को भी पीटा था.

ये दो अलग अलग मामले लग सकते हैं लेकिन दोनों ही कई मामलों में एक समान है. दोनों की ही पत्नियों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया और लोगों के शानदार विरोध के आवाज को हिन्दुत्व की सरकार के साथ मिलकर सौदा कर लिया. केवल इतना ही नहीं, एक बार फिर से हिन्दुत्ववादी ताकतों के साथ मिलकर हिन्दुत्ववादी सरकार के खिलाफ उठ रहे विरोध के खिलाफ बयान जारी कर सरकार के साथ मिल गई. पत्रकार श्याम मीरा सिंह लिखते हैं –

मनीष गुप्ता और उनकी पत्नी जैसों को लगता है कि योगी राज में तभी समस्या है जब पीड़ित सवर्ण हो. अगर उस सिस्टम का शिकार कोई दलित, OBC, मुस्लिम है, तो ये तो शासन पद्धति का रूटीन काम है, उस पर कैसी चिंता ?

न जाने कितने मुसलमान इस दौरान मारे गए, ऐसे लोग तब भी योगी समर्थक बने रहे. खुद पीड़ित हुए तो न्याय की दुहाइयां दीं, लेकिन जैसे ही कुछ रियायत मिली तुरंत प्रचार में लग गईं और साबित करने भी लग गईं कि रामराज है. उन्हें एक पल के लिए याद नहीं आया कि उनसे पहले योगी शासन ने कितने मासूमों को कुचला है, कितनों के घर बर्बाद किए हैं.

मनीष गुप्ता की पत्नी का दर्द समझ सकता हूं. मगर योगी शासन का शिकार केवल वे नहीं हैं इसलिए केवल उन्हें मुआवज़ा मिल जाने से ही योगी ‘न्यायपूर्ण’ नहीं हो जाते. जिन लोगों को योगी शासन हर रोज़ कुचलता है, अगर वे लेखक, पत्रकार, दबे कुचले लोग ही अवाज़ न उठाते तो उन्हें कोई पूछने वाला नहीं था. पुलिस ने तो कह ही दिया था कि गिरकर मौत हुई है. अगर योगी शासन की और अधिक चलती तो ये साबित कर देता कि मनीष गुप्ता ने जानबूझकर ज़मीन पर गिरकर मौत चूमी है.

मनीष गुप्ता की हत्या कोई एक घटना नहीं थी बल्कि यूपी में पुलिसिया सिस्टम का रेगुलर इवेंट था. सवाल मुआवज़ा नहीं था बल्कि इस सिस्टम के शीर्ष पर बैठे आदमी के इंसान होने पर था. अगर वह इंसान है तो सबसे लिए न्याय करता, अगर वह इंसान नहीं है तो एक आदमी को मुआवज़ा मिल जाने से उसके सिस्टम को क्लीनचिट नहीं मिल जाती.

ऐसे सिस्टम के शीर्ष पर बैठे आदमी को क्लीनचिट देकर आप भी उसके अत्याचारों में हिस्सेदार हो जाती हैं, मुआवज़ा सवाल नहीं है, सवाल ‘सम्पूर्ण न्याय’ का है, जो दलितों, मुसलमानों, आदिवासियों, कमज़ोरों, पीड़ितों, वंचितों के लिए भी बराबर होता लेकिन आप तो अपना न्याय लेकर निकल जा रहे हैं.

इन दोनों की पत्नियों ने अपना न्याय लेकर फिर से हिन्दुत्व के प्रचार के लिए निकल पड़ी. ये वही हिन्दुत्व है जो शुद्रों, अछूतों, आदिवासियों, मुसलमानों की इसी तरह की पुलिसिया हत्या करता है और इन जैसे लोग तालियां बजाते हुए ऐसे क्रूर हत्या का समर्थन करते हुए समर्थन में जुलूस निकालते हैं. विदित हो कि विवेक तिवारी और मनीष गुप्ता दोनों ही हिन्दुत्व और उसकी हिंसा के प्रबल समर्थक थे, जिसे भी उसी हिंसा ने निगल लिया.

20 लाख रुपया का मुआवजा देने और 2 करोड़ का मुआवजा सरकार से देने की मांग करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री के अखिलेश यादव के खिलाफ मीनाक्षी गुप्ता के विद्रोही तेवर और मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ठ उर्फ योगी आदित्यनाथ के द्वारा 10 लाख और एक नौकरी देने के बाद उसी मीनाक्षी गुप्ता का माधुर्य देख कर यह साफ लगता है कि वह यह मान रही है कि उसके पति मनीष गुप्ता ने हिन्दुत्व की राह में ‘शहादत’ दी है. ठीक इसी तरह कल्पना तिवारी ने भी अपने पति विवेक तिवारी की हत्या के बाद मान ली थी.

पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हेमंत कुमार झा कहते हैं –

अभी एक परिचर्चा में सुन रहा था कि गोरखपुर में पुलिस बर्बरता का शिकार हो कर अकाल मौत मरा व्यवसायी योगी जी का बड़ा फैन और भाजपा का कट्टर समर्थक था. मन में सवाल उठा कि वह व्यवसायी जब ज़िन्दा रहा होगा तो योगी जी के प्रशासन की ‘ठोक दो’ वाले बर्बर और गैर-कानूनी रवैये पर अपने मित्रों-संबंधियों के बीच कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त करता होगा. फिर, मन में जिज्ञासा उपजी कि वह अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच किस तरह के व्हाट्सएप मैसेजों का आदान-प्रदान करता होगा.

जाहिर है, मेरे मन में उठे सवाल और उपजी जिज्ञासाएं यूं ही शून्य में खो कर रह जाएंगी क्योंकि कोई एसआईटी इस तरह का अनुसंधान नहीं करने वाली. जरूरत भी नहीं. ‘वह क्यों मरा’, ‘उसे किसने मारा’ टाइप के सवाल भी अंततः अनुत्तरित ही रह जाने की आशंकाएं हैं क्योंकि होटल के उसके कमरे में आधी रात को अचानक से घुसने वाली पुलिस टीम के मुखिया के ऊंचे राजनीतिक संपर्कों की भी कथाएं कही जा रही हैं.

सबसे बड़ी बात कि जब राजनीतिक नेतृत्व ‘ठोक दो’ कहते हुए पुलिस वालों को कानून तोड़ने और हैवान बन जाने को प्रेरित करता है तो वह इसके लिये भी तैयार रहता है कि कभी-कभार दारोगा जी की शान में गुस्ताखी करने वाले आम और निर्दोष नागरिक भी ठोके जा ही सकते हैं. पुलिस का जज बन जाना कितना खतरनाक साबित हो सकता है इसके उदाहरण के लिये योगी राज से पहले भी कई घटनाएं सामने आती रही हैं.

लेकिन, ‘तुम एक मारोगे तो हम दस मारेंगे’ की तरह के सस्ते बयान योगी आदित्यनाथ के पहले किस राज्य के किस मुख्यमंत्री ने दिया होगा ? दिया भी होगा या नहीं, यह शोध का विषय है. ‘हम दस मारेंगे…’ किसी एक के बदले आप जिन दस को मारेंगे, उन दसों की पहचान कौन करेगा ? यहीं से कानून के राज की जगह अराजकता लेने लगती है. ऐसी अराजकता, जिसे सांस्थानिक संरक्षण मिलने का खतरा उत्पन्न हो जाता है.

योगी प्रशासन के इस रुख से उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में वास्तविक सुधार कितना हुआ है, यह वहां के लोग बेहतर बता सकते हैं, लेकिन इस रुख से उत्पन्न अराजकता के शिकार हुए लोगों के परिजनों की गुहार की गूंज अक्सर उठती रहती है. मरने वाला दोषी था या निर्दोष, अगर दोषी था भी तो उसका दोष क्या था, कैसा था, यह सब तय करने के लिये अदालतें हैं, कानून की प्रक्रियाएं हैं.

नेताओं की ‘ठोक देंगे’ जैसे फूहड़ और सस्ते बयानों पर निसार होने वालों की कोई कमी नहीं. नेताओं की राजनीति को चमकाने के लिये झूठे आंकड़ों और भ्रामक प्रचारों से भरे व्हाट्सएप मैसेजेज को विद्युत गति से शेयर करने वालों के लिये तो इतने लोगों और इतने तरह के लोगों की भरमार है कि एक नए शब्द ने ही जन्म ले लिया – ‘व्हाट्सएप युनिवर्सिटी.’

इस ‘व्हाट्सएप युनिवर्सिटी’ ने लोगों की चेतनाओं को जितना प्रदूषित किया है, इतिहास में उसकी मिसाल नहीं मिलती. संचार क्रांति के इस तरह सुनियोजित दुरुपयोग को अगर संगठित शक्तियां प्रोत्साहित करने पर तुल जाएं तो हालात कितने बदतर हो सकते हैं, यह आज देखा जा सकता है, जब आम लोगों के लिये सही-गलत की पहचान धूमिल होने लगी है.

वो एक कवि ने कहा है न, ‘लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में, यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है.’ ‘ठोक देंगे’ पर निसार बंदे भी कब बेकसूर ठोक दिए जा सकते हैं, यह कोई नहीं कह सकता क्योंकि, आवारा आग मकानों में रहने वालों की पहचान नहीं करती.

हिन्दुत्व को स्थापित करने में ‘शहादत’ देते इन लोगों और उसके परिजनों को इस बात न तो कभी ग्लानि ही हो सकती है कि वह जिसे ‘शहादत’ देना समझ रही है, दरअसल वह मानवता के एक ऐसे नृशंस ताकतों का साझीदार बन रहे हैं जो करोड़ों दलितों पिछड़ों (शुद्रों), आदिवासियों, मुसलमानों को गुलाम बनाने की कोशिश में लाखों लोगों को मौत की नींद सुला रहे हैं.

Read Also –

कल्पना तिवारी एक सच्ची भक्तन है
दूसरों के मौत पर हंसने वाली वो भक्तन थी
युद्ध में निष्पक्ष कोई नहीं होता

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

युद्ध में निष्पक्ष कोई नहीं होता

Next Post

गांधी और शास्त्री : आज दो महान पुण्य आत्माओं का जन्मदिवस है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

गांधी और शास्त्री : आज दो महान पुण्य आत्माओं का जन्मदिवस है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

ब्राह्मणवाद

July 2, 2023

जननायक महिषासुर बनाम देवी दुर्गा

July 27, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.