Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

‘किसी की ट्रेजडी किसी की कॉमेडी बन जाती है’ – चार्ली चैपलिन

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 27, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
'किसी की ट्रेजडी किसी की कॉमेडी बन जाती है' - चार्ली चैपलिन
‘किसी की ट्रेजडी किसी की कॉमेडी बन जाती है’ – चार्ली चैपलिन

एक बार आठ-दस साल का चार्ली चैप्लिन लंदन की दुपहरी में घर के बाहर खड़ा था. बस यूं ही गली की हलचल देख टाइमपास कर रहा था. तभी उसने देखा कि एक आदमी छोटे से मेमने को पकड़े हुए गली से गुज़र रहा है. गली के सिरे पर एक कसाईखाना था.

अचानक ही मेमना उस आदमी की पकड़ से छूट गया और जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगा. इधर मेमना छूटा और उधर आदमी ने उसे पकड़ने को दौड़ लगाई. मेमना था कि हाथ ही ना आए.. कभी इधर फुदकता तो कभी उधर. गली-मुहल्ले के बच्चे ये नज़ारा देख पेट पकड़कर हंसने लगे.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

चार्ली ने भी जब छुटकू से मेमने को उस लंबे-चौड़े आदमी को हलकान करते देखा तो खूब हंसा. पांच-दस मिनट तक ये खेल चलता रहा. आखिरकार मेमना उस आदमी के हाथ लग ही गया. थकान और गुस्से से चूर उस आदमी ने मेमने को बहुत ही क्रूरता से जकड़ा और कंधों पर रखकर चल दिया.

हंसी का दौर जैसे ही थमा, अचानक एक ख्याल ने चार्ली को हिलाकर रख दिया. उसे समझ आया कि अभी जो मेमना दौड़ लगा रहा था वो अपनी मौत से बचने की कोशिश कर रहा था. कुछ ही देर बाद मेमना जिबह कर दिया जाएगा. उसकी मुलायम गर्दन को किसी तलवार या बड़े चाकू से काट दिया जाएगा. उसका संघर्ष कितना दयनीय लेकिन ठीक उसी वक्त कितना हास्यपूर्ण था.

नन्हा चार्ली कल्पना करने मात्र से विचलित हो उठा. वो भागकर घर में घुसा और मां की गोद में मुंह छिपाकर रोने लगा. चार्ली को इस हालत में देखकर मां घबरा गई. उसने प्यार से चार्ली के सिर पर हाथ फेरा. उसके रोने की वजह पूछी लेकिन वो बस रोता गया. अपनी आत्मकथा में चार्ली चैप्लिन ने इस घटना का ज़िक्र किया है और बताया है कि कैसे कई बार ज़िंदगी की ट्रेजेडी और कॉमेडी आपस में मिक्स होती हैं. किसी की ट्रेजडी किसी की कॉमेडी बन जाती है, जैसे कोई गिर पड़ा और आप उसे देखकर हंस पड़े। ऐसे ही कोई ट्रेजडी कुछ दिन बाद कॉमेडी हो जाती है, जैसे आप गिरे लेकिन बाद में याद करके हंसे।

चार्ली चैप्लिन ने अपनी फिल्मों में भी यही किया. मैंने इस सूत्र को समझने के बाद उनकी फिल्में देखी तो उस दृष्टि और गहराई का कायल हो गया. चार्ली एक फिल्म में श्रमिक बनते हैं. वो एक फैक्ट्री में खड़े हैं, जहां उनके सामने एक मेज पर चलनेवाली पट्टी है. उस पट्टी पर एक के बाद एक कुछ सामान चार्ली के पास पहुंचता है और उन्हें उस सामान का पेंच ठीक करना होता है. ऐसा करने के लिए उन्हें दो ही सेकेंड मिलते थे. चलायमान पट्टी पर अगर उन्होंने दो सेकेंड से ज़्यादा लगाया तो अगला सामान इतनी देर में उनके पास पहुंच जाता था.

बेचारे चार्ली इतनी तेज़ी से काम नहीं कर पाते और फिर इसी चक्कर में वो पट्टी के साथ चलते-चलते मशीन के बड़े से मुंह में जा फंसते हैं. देखनेवालों को ये बड़ा मनोरंजक लगेगा लेकिन चार्ली चैप्लिन अपनी फिल्म के ज़रिए पूंजीपतियों का वो जानलेवा दबाव दिखा रहे थे जो श्रमिकों पर लगातार बना हुआ था. श्रमिकों को तयशुदा घंटों में ज़्यादा से ज़्यादा उत्पादन करना होता था और ऐसा उनकी जान की परवाह किए बगैर चलता रहता था.

इसी तरह चार्ली चैप्लिन एक सर्कस में काम करनेवाले चरित्र को निभाते हैं. वो वहां पर शायद जोकर की नौकरी करते हैं लेकिन उन्हें जो लड़की पसंद है वो एक जानलेवा करतब करनेवाले पर फिदा है. चार्ली चैप्लिन उसे रिझा लेना चाहते हैं. एक दिन अचानक करतब करनेवाला सर्कस के शो पर नहीं पहुंचता. चार्ली को लगता है कि लड़की को प्रभावित करने का यही मौका है. वो बिना सोचे उस करतब करनेवाले की जगह जा पहुंचते हैं. दर्शकों को उनकी ये स्थिति बहुत हंसाती है मगर यदि आप अपनी ज़िंदगी पर नज़र डालें तो वहां भी ऐसा कुछ मिलेगा, पर आप उस पर हंसते नहीं बल्कि अपने बेचारगी पर दुःखी होते हैं.

तो ऐसा ही कुछ कमाल था उस अभिनेता का जो मुझे पसंद है. वो सिर्फ अभिनेता नहीं था बल्कि कहानी कहने की कला में निपुण संपूर्ण शो मैन था. असल ज़िंदगी में भी चार्ली चैप्लिन ने अपनी संवेदनशीलता की वजह से बहुत कुछ भुगता. एक वक्त तो ऐसा आया कि अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि दोनों ही छोड़कर जाना पड़ा. 16 अप्रैल को उनका जन्मदिन था.

  • नितिन ठाकुर

Read Also –

क्रिसमस की रात और चार्ली चैपलिन की बात
सिपाहियों ! आओ, लोकतंत्र के नाम पर हम सब एकजुट हो जायें – चार्ली चैपलिन
शक्ति को हास्यास्पद बनाना ज़रूरी होता है
‘Stalin Waiting For … The Truth’ 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

…इसके बावजूद इन चुनावों में बहुत कुछ दांव पर है

Next Post

समुद्र में तबाही ला रही हैं बैटरी वाली गाड़ियां

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

समुद्र में तबाही ला रही हैं बैटरी वाली गाड़ियां

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भारत का गौरवशाली इतिहास !?

November 21, 2018

कांग्रेस को हटा कर भाजपा को सत्ता क्यों सौंपी थी ?

December 22, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.