शेर का अभिनन्दन समारोह
आदमी के खून में डुबोकर अपने पैने नाखून से शेर ने लिखी है कविता आदमी की पीठ पर कविता में...
Read moreDetailsआदमी के खून में डुबोकर अपने पैने नाखून से शेर ने लिखी है कविता आदमी की पीठ पर कविता में...
Read moreDetailsकिसी पाश्चात्य दार्शनिक ने कहा था - जो जैसा होता है वैसे ही ईश्वर की कल्पना/निर्माण करता है मुर्ग़ा ईश्वर...
Read moreDetailsजो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे, मारे जाएंगे कठघरे में खड़े कर दिये जाएंगे जो विरोध में बोलेंगे जो...
Read moreDetailsक्रांतिकारी कवि वरवर राव की नजरबंदी त्रासदपूर्ण अन्याय रही ! इंदरा राठौड़ सत्ता की कान में आसानी से कोई जूं...
Read moreDetailsलोहे के पुल लोहे के पुल लोहे की ज़ंजीरें भी थीं वक़्त के साथ टूट गए बहते हुए पानी में...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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