मौत
कच्ची गोलिय़ां नहीं खेले हैं वे वे सयाने हैं वे जानते हैं किस तरह तुम्हारी खाल में घुसकर तुह्मारे जैसा...
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Read moreDetailsमई दिवस पर विशेष : आधुनिक सभ्यता का कोहिनूर हैं मजदूर जगदीश्वर चतुर्वेदी आश्चर्य की बात है कि देश के...
Read moreDetails'मैं आज भी मजदूर का जीवन जीता हूं !' विष्णु नागर मजदूर दिवस के दिन मजदूरों से इस सरकार को...
Read moreDetailsनौकरशाह के. के. पाठक के फरमान से हलकान शिक्षकों का पांच महीने से वेतन बंद हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर,...
Read moreDetailsजब कहानी ने पलटकर कहानीकार से सवाल किया प्रियदर्शन लेखक और मनोविज्ञान विशेषज्ञ विनय कुमार जी ने जानना चाहा कि...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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