आजादी
मन मस्त हवा के पंखों से मत पूछ आजाद उड़ानें कैसी हैं कैसी हैं चंचल पतवारें, सागर में गोते खाते...
Read moreDetailsमन मस्त हवा के पंखों से मत पूछ आजाद उड़ानें कैसी हैं कैसी हैं चंचल पतवारें, सागर में गोते खाते...
Read moreDetailsयुद्ध से समतल हुए शहर में जहां पर ज़मीन तीन महीने के गर्भ से दिखी वहीं पर एक सामूहिक कब्र...
Read moreDetailsमैं चाहता तो आवाज़ बदल कर बातें कर भी सकता था तुम से चेहरा बदल कर मिल भी सकता था...
Read moreDetailsमोदी ने मतदाताओं को स्तरहीनता की ओर धकेला है, इतिहास मोदी को माफ नहीं करेगा हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर,...
Read moreDetailsअंधी सड़कें नहीं देख पाती शार्क के खुले जबड़े आदमी मच्छी के कांटे सा फंसा हुआ है उसके नुकीले दांतों...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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