अकविता
उम्मीदें जंग खाई कच्चे लोहे के बनी कीलों जैसी थीं समुद्र की नमकीन हवाओं से खोखले हुए दीवारों पर टंगी...
Read moreDetailsउम्मीदें जंग खाई कच्चे लोहे के बनी कीलों जैसी थीं समुद्र की नमकीन हवाओं से खोखले हुए दीवारों पर टंगी...
Read moreDetailsदुबले पतले सीधे-साधे हमेशा करते क्रान्ति की बातें ये बच्चे मुझे लगते हैं सबसे प्यारे इन बच्चों को साथ चलते...
Read moreDetailsहेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना पिछले महीने कोई रिपोर्ट आई थी जिसमें बताया गया था कि भारत...
Read moreDetailsमनीष आजाद इस साल जब लोग नये साल का जश्न आदतन मना रहे होंगे तो समाज का एक हिस्सा 1...
Read moreDetails2030 तक भारत में बंधुआ मजदूरी को समाप्त करने के लक्ष्य की जमीनी हकीकत जुलाई 2016 में केंद्र सरकार ने...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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