जुर्म
जब मैंने मोटर साइकिल पर रखकर बम फोड़ा जिसमे दर्जनों इंसान मारे गए लेकिन मैं डरा नहीं क्योंकि इस आतंकी...
Read moreDetailsजब मैंने मोटर साइकिल पर रखकर बम फोड़ा जिसमे दर्जनों इंसान मारे गए लेकिन मैं डरा नहीं क्योंकि इस आतंकी...
Read moreDetailsअगर वो मेरी बेटी होती तो उसकी टूटी हुई रीढ़ की हड्डियों पर कोई कविता नहीं लिखता अगर वो मेरी...
Read moreDetailsयादों में शंकर गुहा नियोगी - कनक तिवारी कनक तिवारी 28 सितंबर, 1991 को आखिरकार शंकर गुहा नियोगी की हत्या...
Read moreDetails'जिन्ना की तपलीक दूर कर दो भाई !' भला मुहम्मद अली जिन्ना को, इण्डिया को इंडिया कहे जाने से क्या...
Read moreDetailsएक युद्ध जारी है आप बिना मेहनत किये अमीर बन जाते हैं मेहनतकश मजदूर किसान कड़ी मेहनत के बाद भी...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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