कभी आपने सोचा कि अंग्रेज बुरे क्यों थे ?
लाख बुरे थे अंग्रेज मगर.., अब इसके आगे कोई भी मजेदार जुमला बनाया जा सकता है. पर कभी आपने सोचा...
Read moreDetailsलाख बुरे थे अंग्रेज मगर.., अब इसके आगे कोई भी मजेदार जुमला बनाया जा सकता है. पर कभी आपने सोचा...
Read moreDetailsहेमन्त कुमार झा,एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना आधुनिक इतिहास के पन्ने पलट कर देख लीजिए, कोई भी पुनरुत्थानवादी शक्ति ऐसी...
Read moreDetailsलु शून चीन के दूसरे भागों की भांति ल्यूचेन में शराब की दुकानों नहीं हैं. उन सब पर सड़क की...
Read moreDetailsशब्द और अर्थ के बीच लुकाछिपी का खेल अब बहुत हो चुका किंतु-परंतु में हमने काफी वक्त जाया कर दिया...
Read moreDetailsपुष्पराज सरकार के साथ सहकार करिए और पूछिए कि सवाल क्या है ? एक मुख्यमंत्री के लजीज बनिए और कहिए...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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