‘कौन जात हो भाई ?’ दलित स्वाभिमान को मिट्टी में मिलाती एक कविता
विनोद शंकर 'बच्चा लाल उन्मेष' की बहुचर्चित कविता 'कौन जात हो भाई ?' आप सब ने पढ़ा ही होगा. आइये...
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Read moreDetailsअमेरिकी साम्राज्यवाद का इतिहास पराजयों से भरा हुआ है. कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध, अफगान युद्ध में अमेरिकी साम्राज्यवाद ने सदैव...
Read moreDetailsतुम्हारे जश्न ने निगल ली है मेरी आज की दिहाड़ी मज़दूर हूं साहब जब जब भी तुम्हारी ख़ुशी देख कर...
Read moreDetailsप्रियदर्शन क्या आज़ादी को शराब की तरह होना चाहिए जो जितनी पुरानी होती जाए, उतनी ही नशीली होती जाए ?...
Read moreDetailsदो दिन पहले 12 अगस्त को किसान संघर्ष समिति की 308वीं किसान पंचायत संपन्न हुई, जिसमें देशभर के किसान संगठनों...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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