एक दिन…
एक दिन हमसे पूछा जाएगा हम क्या कर रहे थे ? एक दिन हमसे पूछा जाएगा हमारी नींद कितनी गहरी...
Read moreDetailsएक दिन हमसे पूछा जाएगा हम क्या कर रहे थे ? एक दिन हमसे पूछा जाएगा हमारी नींद कितनी गहरी...
Read moreDetailsकोई मौसम ऐसा भी आता है कितना भी सहेजें शब्दों में घुन लग जाता है ऊपर से सही सलामत दिखते...
Read moreDetailsसमान नागरिक संहिता : भई गति सांप छछूंदर केरी ! कनक तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ किसी देश का...
Read moreDetailsतुम मर जाओ जेपी... क्या आप जानते हैं कि जेपी के कंधों पर सवार होकर आने वाली जनता सरकार, जेपी...
Read moreDetailsब्रतानिया हुकूमत का चरण वंदना करने वाले आज हमें राष्ट्रवाद का उपदेश दे रहे हैं संजय कुमार सिंह इस 8...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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