दूर हूं, असंपृक्त नहीं…
दूर हूं असंपृक्त नहीं जंगल से आती मादल की थापों हूंकार भरे गीतों की दूरागत ध्वनि फौजी बूटों की धमक...
Read moreDetailsदूर हूं असंपृक्त नहीं जंगल से आती मादल की थापों हूंकार भरे गीतों की दूरागत ध्वनि फौजी बूटों की धमक...
Read moreDetailsCPI (माओवादी) के पीबी सदस्य 'कटकम सुदर्शन' की सत्ता द्वारा ईलाज बाधित करने के कारण हुई शहादत 5 जून से...
Read moreDetailsमेरा कानपुर कभी सांप्रदायिक नहीं था... आभा शुक्ला आज 3 जून को कानपुर दंगे की पहली बरसी है...! प्रशासन ने...
Read moreDetailsलेनिन 'आलोचना की स्वतंत्रता' निस्संदेह मौजूदा समय का सबसे फैशनेबल नारा है. यह सभी देशों और समाजवादियों और जनवादियों के...
Read moreDetailsस्मार्टसिटी फरीदाबाद : विश्व गुरु के अमृतकाल में भी शौचालय की मांग अपराध है ? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने हर...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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