तुम हमें अर्बन नक्सल कहते हो ?
तुम हमें अर्बन नक्सल क्यों कहते हो ? क्या तुम यह सोचते हो कि हमें अर्बन नक्सल कह देने भर...
Read moreDetailsतुम हमें अर्बन नक्सल क्यों कहते हो ? क्या तुम यह सोचते हो कि हमें अर्बन नक्सल कह देने भर...
Read moreDetailsदेश की जनता के सामने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दो विकल्प हैं. पहला-संसदीय विकल्प के जरिये सरकार में...
Read moreDetailsदिल्ली में दिसम्बर की ठिठुरन वाली एक सुबह. ओस की बूंदे चादर बनकर पत्तों का आलिंगन कर रही थी. ठंडी...
Read moreDetailsकिंचित परिवर्तन सुधार, संशोधन, दिलासा कुछ नही होते हैं किंचित सुधारवाद थोड़ी सी मलहम होता है खूब लतियाओ फिर खुद...
Read moreDetailsहैप्पी मैरिज एनिवर्सरी राजीव की सोनिया... आभा शुक्ला कुछ भी हो जाये, पर तुम इस देश के लोगों को, यहां...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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