वैलेंटाइन्स-डे पर विनोद शंकर की तीन कविताएं
विनोद शंकर प्यार में मेरी कामना बस यही रही की तुम सिमट न जाना मुझ तक और मैं तुम तक...
Read moreDetailsविनोद शंकर प्यार में मेरी कामना बस यही रही की तुम सिमट न जाना मुझ तक और मैं तुम तक...
Read moreDetailsदरिंदा बुलडोजर, बेशर्म सरकार, बेजुबान लोग आभा शुक्ला भाजपा सरकार को ब्राह्मणों और सवर्णों की सरकार समझने वाले सिरफिरे ब्राह्मण...
Read moreDetailsमैं कवि हूं ! कविता रचता हूं ! कविता पढ़ता हूं ! यह रोजगार है मेरा यह पेशा है मेरा...
Read moreDetailsअडानी-मोदी क्रोनी कैपिटलिज़्म : यह कैसा राष्ट्रवाद है तुम्हारा ? श्याम सिंह रावत हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में अडाणी ग्रुप...
Read moreDetailsएक देवदासी की सत्य कथा : देवदासी धर्म, संस्कृति और ईश्वर के नाम पर वेश्यावृत्ति का सबसे घृणास्पद प्रथा है...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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