रुपया डॉलर के मुकाबले सतासी छू रहा है !
रुपया डॉलर के मुकाबले सतासी छू रहा है ! एक समय किसी महान दार्शनिक ने कहा था, कि जैसे जैसे...
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Read moreDetailsमहाकुम्भ : जो संस्कृति तेजी से बदलते हुये समय में हमें बचा न सके, उसे बचाने की कोई आवश्यकता नहीं...
Read moreDetailsआप हिन्दू होकर नास्तिक हो सकते हैं वेद ईश्वर गीता का विरोध कर सकते हैं और नास्तिक होकर भी समाज...
Read moreDetailsएक आम आदमी धर्म भी बचाए और देश की प्रोडक्टिविटी भी बढ़ाए, बदले में उसे क्या मिलेगा ? हेमंत कुमार...
Read moreDetailsऔरतें अक्सर झूठ बोलती हैं, झूठ बोलकर वे सखियों से मिल आती हैं, बेटी की मार्कशीट खोजने का दिखावा करती...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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