…ये दोगलाई कैसे एक्सेप्ट करूं ?
...ये दोगलाई कैसे एक्सेप्ट करूं ? इंदिरा गांधी एक दिन सुबह उठी. उन्हें सपने में सावरकर आये थे. उनका मन...
Read moreDetails...ये दोगलाई कैसे एक्सेप्ट करूं ? इंदिरा गांधी एक दिन सुबह उठी. उन्हें सपने में सावरकर आये थे. उनका मन...
Read moreDetails'साहब ये बैल है, वकील नहीं !' एक वकील साहब को यह देखकर हैरत हुई कि बैल बैलगाड़ी खींच रहा...
Read moreDetailsवे भेड़िये हैं भोले भाले भालू नहीं हैं कि मेरे शांत, स्पंदनहीन, सर्द शरीर को देख कर आगे बढ़...
Read moreDetailsएक आदमी एक मुर्गा खरीद कर लाया. एक दिन वह मुर्गे को मारना चाहता था, इसलिए उसने मुर्गे को मारने...
Read moreDetailsसारांश : देशभर में जल, जंगल, जमीन का आंदोलन चल रहा है. यह आंदोलन पर्यावरण और सामाजिक न्याय की लड़ाई...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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