‘शांति संभव है, अगर भारत 1962 के युद्ध की सच्चाई स्वीकार कर ले तो…’ : ब्रिगेडियर बीएल पूनिया (सेवानिवृत्त)
सारांश : ब्रिगेडियर बीएल पूनिया, सेवानिवृत्त, ने अपने एक लेख में 1962 के भारत-चीन युद्ध की सच्चाई को स्वीकार करने...
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Read moreDetailsगोडसे ने गांधी जी को क्यों मारा ? सरदार वल्लभ भाई पटेल स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री क्यों नहीं बन...
Read moreDetailsअन्न पाणी त्याग थोड़ा-थोड़ा मरने से हुक्मरान की संवेदनाएं लौट आएंगी मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है मैं हवा में बातें...
Read moreDetails...ये दोगलाई कैसे एक्सेप्ट करूं ? इंदिरा गांधी एक दिन सुबह उठी. उन्हें सपने में सावरकर आये थे. उनका मन...
Read moreDetails'साहब ये बैल है, वकील नहीं !' एक वकील साहब को यह देखकर हैरत हुई कि बैल बैलगाड़ी खींच रहा...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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