स्वप्न जिंदगी उसके लिए कड़ी धूप थी छाह की तलाश उसे हरदम रहती जो उसे स्वप्न में ही मिलती उस दिन स्वप्न में जब वह खड़ा था एक नीम छाह तले कोई जोर से चीखा तुमने मेरे लगाए पेड़ को अपवित्र कर दिया तुम मेरे पेड़ की छाह पर खड़े हो घबराकर उसकी नींद टूट गयी उसने पाया कि वह एक धुप्प अंधेरी कोठरी में है बाहर से आती एक भारी आवाज ने उसे चौंकाया- 'इसे यहीं पड़ा रहने दो, इसने हमारे स्वप्न को दूषित किया है' वह हैरान था क्या वह अभी भी स्वप्न में है????
  • मनीष आज़ाद