
लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए एसोसिएशन ‘डेमोक्रेटिक राइट्स डिफेंस सोसायटी’, जिसका पता 18, मदन बराल लेन, कोलकाता – 700012 है और वेबसाइट: www.apdrwb.in और फोन नं. 9433101611 है, का मानना है कि मानवाधिकार की सुरक्षा ही स्वतंत्रता का मूल्य है, ने आज (20 नवम्बर) को दोपहर 3 बजे से कॉलेज स्ट्रीट कॉफ़ी हाउस के सामने एक नागरिक विरोध सभा बुलाई गई है.
प्रेस वक्तव्य जारी करते हुए इन्होंने बताया कि सीपीआई माओवादी के आदिवासी नेता हिडमा सहित सभी माओवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं की न्यायेतर हत्याओं की न्यायिक जांच की मांग करते हुए आज एक नागरिक विरोध बैठक का आह्वान किया है.
इन्होंने बताया है कि18 नवंबर 2025 को, आंध्र प्रदेश पुलिस ने घोषणा की कि सीपीआई (माओवादी) पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलजीए) के प्रमुख ‘माडवी हिडमा’ और उनकी पत्नी राजक्का सहित 6 लोग आंध्र प्रदेश के मारेदुमिल्ली जंगल में एक मुठभेड़ में मारे गए.
लेकिन आंध्र प्रदेश के जाने-माने नागरिक अधिकार संगठन, एपीसीएलसी सहित मीडिया के विभिन्न स्रोतों ने जानकारी दी है कि कुछ दिन पहले, एक व्यक्ति (मुखबिर) की पहचान के कारण, उन्हें आंध्र प्रदेश के एक आश्रय से निहत्थे ले जाया गया और निर्ममतापूर्वक प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई.
यह भी ज्ञात है कि कई और माओवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें छिपा कर रखा गया है. उनकी भी हत्या किए जाने की आशंका है.
हालांकि यह नरसंहार कोई नई बात नहीं है. पिछले एक साल से ऑपरेशन कगार के नाम पर माओवादी पार्टी के नेताओं और आदिवासियों को फर्जी झड़पों में मारा जा रहा है. विभिन्न नामों वाली सरकारी ताकतें, भारतीय न्याय व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए, पूरी तरह से गैरकानूनी तरीके से, मुठभेड़ के नाम पर देश के बच्चों की निर्मम हत्या कर रही हैं.
मार्च 2026 तक माओवादियों का सफाया करने की भारतीय गृह मंत्री अमित शाह की सख्त चेतावनी के तहत, राज्य के अर्धसैनिक बलों और आंध्र प्रदेश पुलिस ने हिडमा समेत 6 निहत्थे लोगों की निर्मम हत्या कर दी है.
यह बेहद आश्चर्यजनक है कि देश के गृह मंत्री इतनी समय सीमा तय करके कैसे हत्याओं का सिलसिला जारी रख सकते हैं. कुछ दिन पहले, माओवादी पार्टी के महासचिव की भी हत्या कर दी गई थी. कई अन्य राजनीतिक कार्यकर्ता और आम प्रदर्शनकारी आदिवासी भी मारे गए हैं.
इन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा है कि वे इस राजकीय हत्या की कड़ी निंदा करते हैं और हिडमा समेत सभी माओवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं की मुठभेड़ के नाम पर की गई निर्मम राजकीय हत्या के आरोपों की न्यायिक जांच की मांग करते हैं. साथ ही, ऑपरेशन कगार समेत सभी राजनीतिक हत्या अभियानों को रोकने की मांग करते हैं.
एपीडीआर, महासचिव रंजीत शूर ने आगे कहा है कि ‘मैं सभी लोकतांत्रिक और देशभक्त लोगों से आह्वान करता हूं कि वे आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अन्य माओवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर तत्काल मुकदमा चलाने तथा इस फर्जी मुठभेड़ में शामिल सभी राज्य अधिकारियों और बलों को कड़ी सजा देने की मांग करते हुए अपनी आवाज उठाएं.’
इन सभी मांगों को आवाज़ देने के लिए आज, गुरुवार, 20 नवंबर को दोपहर 3 बजे से कॉलेज स्ट्रीट कॉफ़ी हाउस के सामने एक नागरिक विरोध सभा बुलाई गई है. सभी विरोध संगठनों और व्यक्तियों से आग्रह है कि वे इस सभा में शामिल होकर विरोध को मज़बूत करें.
ज्ञात हो कि 19 नवम्बर की सुबह भी सीपीआई माओवादी सात नेता औऋ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पकड़कर गोली मारी है. वहीं, सीपीआई माओवादी के पांचवें महासचिव थिप्परी तिरुपति (देवजी) समेत पचासों माओवादियों को आंध्र प्रदेश की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.
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