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माओवादी के महान नेता माडवी हिडमा ने भगवान बिरसा मुंडा, गुंडाधूर और भगत सिंह के क्रांतिकारी परम्परा को नई ऊंचाई तक ले गये ! – सीपीआई माओवादी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 22, 2025
in गेस्ट ब्लॉग
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माओवादी के महान नेता माडवी हिडमा ने भगवान बिरसा मुंडा, गुंडाधूर और भगत सिंह के क्रांतिकारी परम्परा को नई ऊंचाई तक ले गये ! - सीपीआई माओवादी
माओवादी के महान नेता माडवी हिडमा ने भगवान बिरसा मुंडा, गुंडाधूर और भगत सिंह के क्रांतिकारी परम्परा को नई ऊंचाई तक ले गये ! – सीपीआई माओवादी

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय ने 20 नवम्बर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए आदिवासियों समस्या त भारत के तमाम मेहनतकश जनता के महान नेता माडवी हिडमा की नृशंस हत्या पर सनसनीखेज खुलासा किया है. गौरतलब हो कि सीपीआई माओवादी के केन्द्रीय समिति सदस्य माडवी हिडमा ने भगवान बिरसा मुंडा, गुंडाधूर की ‘जल-जंगल-जमीन’ की लड़ाई की क्रांतिकारी परम्परा को नई ऊंचाई तक ले गये.

प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए सीपीआई माओवादी के प्रवक्ता अभय ने कहा कि केंद्रीय समिति के सदस्य और दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के सचिव कामरेड माडवी हिडमा ने कामरेड राजे और कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर 15 नवंबर को विजयवाड़ा में निहत्थे लोगों को पकड़ लिया, उनकी निर्मम हत्या कर दी और मुठभेड़ की झूठी कहानी गढ़ी.

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एओबी राज्य समिति के सदस्य कॉमरेड शंकर को कुछ अन्य लोगों ने पकड़ लिया और उनकी हत्या कर दी तथा उन्हें रामपचौड़वरम क्षेत्र में एन.सी. ले ​​जाया गया. उन्होंने एक कहानी गढ़ी कि जवाबी हमला हुआ था. हम इस क्रूर हत्या के विरोध में 23 नवंबर को राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस के रूप में मनाने का आह्वान करते हैं.

‘अभय’ ने आगे कहा कि प्रिय लोग ! आज देश में आरएसएस-भाजपा मनुवादियों का ज़बरदस्त फासीवादी दमन जारी है. वे लगातार लोगों को हत्याओं से आतंकित करने की कोशिश कर रहे हैं. फासीवादी सरकार कॉर्पोरेट्स के फ़ायदे के लिए ये हत्याएं कर रही हैं.

दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सचिव और केंद्रीय कमेटी के सदस्य कामरेड हिडमा और उनके सहयोगी कामरेड राजे कुछ अन्य लोगों के साथ विजयवाड़ा में इलाज के लिए गए थे. इलाज के दौरान ही कुछ लोगों ने उन्हें धोखा दिया और पुलिस को स्पष्ट सूचना मिल गई.

15 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर आंध्र प्रदेश एसआईबी ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी. मारेडुमिली के जंगलों में मुठभेड़ होने, हथियार मिलने और छह लोगों के मारे जाने आदि की घोषणाएं सरासर झूठ हैं.

सीपीआई (माओवादी) कॉमरेड हिडमा को विनम्रतापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करती है, जिन्होंने अपने बहुमूल्य जीवन का बलिदान दिया, आंदोलन की भावना और अपनी विचारधारा की ताकत का प्रदर्शन किया.

सीपीआई (माओवादी) कॉमरेड शंकर (एओकेआई राज्य समिति सदस्य) और कॉमरेड राजे (क्षेत्रीय समिति सदस्य) को विनम्रतापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करती है, जो अंत तक आंदोलन में बने रहे और दुश्मन के सामने झुके बिना अपने प्राणों की आहुति दे दी.

भाकपा (माओवादी) अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने बहुमूल्य प्राणों की आहुति देने वाले और आंदोलन की भावना को अक्षुण्ण रखने वाले कॉमरेड चैतू (पीपीसीएम), कॉमरेड कपलू (पीपीसीएम), कॉमरेड मल्लाल (पीपीसीएम) और कॉमरेड देवे (पीएम) को नमन करती है और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है. केंद्रीय समिति उनके द्वारा आगे बढ़ाई गई क्रांतिकारी परंपराओं और आंदोलन की भावना को स्थापित करते हुए आंदोलन को जारी रखने का संकल्प लेती है.

हिडमा का पार्टी जीवन

कामरेड हिडमा का जन्म 1974 में छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले के पुव्वरती गांव में एक गरीब आदिवासी परिवार में हुआ था. बचपन में उन्होंने पांचवीं तक की पढ़ाई अपने गांव में ही की. जैसे-जैसे उनके इलाके में आंदोलन बढ़ता गया, वे पार्टी से जुड़ते गए. दिसंबर 1997 में उन्हें पूर्णकालिक कार्यकर्ता नियुक्त किया गया और 1998 के अंत तक बासागुड़ा दल में काम किया.

1999 में उन्होंने गढ़चिरौली में काम किया. फिर एक साल तक दंडकारण्य आयुध निर्माण विभाग में काम किया. 2001 में वे एरिया कमेटी सदस्य बने और दक्षिण बस्तर आ गए. 2002 में उन्होंने उसूर में एलडीएस कमांडर और कुछ समय के लिए कुंटा में एलडीएस कमांडर के रूप में काम किया. 2005 में वे डिविजनल कमेटी सदस्य बने. बाद में उन्होंने कंपनी-2 में पीएल कमांडर के रूप में काम किया.

उन्होंने 2006 से 2009 तक कंपनी-3 के कमांडर और सचिव के रूप में कार्य किया. 2009 में बटालियन के गठन के बाद से वे बटालियन कमांडर के रूप में कार्यरत रहे. 2011 में उन्हें बीएन समिति का सचिव चुना गया. उसी वर्ष, उन्हें डीके विशेष क्षेत्रीय समिति का सदस्य चुना गया. 2020 में, वे सचिवालय के सदस्य बने. अगस्त 2024 में, उन्हें एस.जेड.सी. का सचिव और केंद्रीय समिति का सदस्य पदोन्नत किया गया.

जनता के बीच हिडमा

कॉमरेड हिडमा ने शुरू से ही जनता के बीच काम करके और जनता से सीखकर अपना विकास किया. आंदोलन के विकास के दौरान, उन्होंने आंदोलन की ज़रूरतों के लिए कई चीज़ें सीखीं. उन्होंने आंदोलन की ज़रूरतों के लिए विशेष रूप से मार्क्सवाद का अध्ययन किया और राजनीतिक व सैद्धांतिक रूप से विकास किया.

आंदोलन के दौरान, उन्होंने विभिन्न अवसरों पर कई परिपत्र और पुस्तिकाएं लिखीं और कार्यकर्ताओं को विकसित करने का काम किया. उन्होंने सैन्य क्षेत्र में विशेष अध्ययन किया और व्यवहार में बेहतर परिणाम प्राप्त किए. उन्होंने कई सैन्य अभियानों की बेहतर योजनाएं लिखीं और उन्हें सफल बनाया. इस प्रक्रिया में, उन्होंने दुश्मन सेना से सैकड़ों हथियार छीन लिए और उन्होंने पीएलजीए को हथियारबंद किया.

कॉमरेड हिडमा के नेतृत्व में बटालियन ने दुश्मन की सत्ता को ध्वस्त कर दिया और दक्षिणी उप-क्षेत्र में जन-शासन के अंग (जन-सरकारें) स्थापित किए, और हाल ही में जन-शासन लागू हुआ. उन्होंने जनता और कार्यकर्ताओं का विश्वास जीता.

दुश्मनों के बीच हिडमा

सत्तारूढ़ मीडिया और गोदी बुद्धिजीवियों ने लंबे समय से हिडमा को खलनायक के रूप में चित्रित किया है. उसकी हत्या के बाद, आज भाजपाई फासीवादियों के प्रयासों से उस ज़हरीले और झूठे प्रचार को और भी हवा मिल रही है. इतने सारे दुष्प्रचार करने वालों के दिलों में हिडमा का स्थान अमिट है.

भगत सिंह, कोमुराम भीम, गुंडादुर, गेंद सिंह, अल्लूरी सीताराम राजू के इतिहास की तरह, हिडमा का इतिहास भी भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन पर एक अमिट छाप छोड़ता है. वह सिर्फ़ आदिवासी समुदाय का नेता नहीं है, वह इतिहास में उत्पीड़ित लोगों के नेता के रूप में जाना जाएगा. आने वाली पीढ़ियां इस इतिहास को पढ़ेंगी और प्रेरणा लेंगी.

हिडमा की मशाल

आरएसएस-भाजपा के कार्यकर्ता विकास के नाम पर देश की संपत्ति और प्राकृतिक संसाधनों को कॉर्पोरेट्स के हवाले कर रहे हैं. इसके खिलाफ देश में कई संघर्ष चल रहे हैं. आरएसएस-भाजपा के कार्यकर्ता उन सभी संघर्षों को बुरी तरह बाधित, दरकिनार और दबा रहे हैं. वे सांप्रदायिकता और युद्धोन्माद भड़का रहे हैं. एक के बाद एक नारे लगा रहे हैं. वे हर दिन एक योजना की घोषणा करके जनता को धोखा दे रहे हैं.

उन्होंने सभी संवैधानिक संस्थाओं को अपने अधीन कर लिया है. चुनाव आयोग मोदी का ‘गोदी’ आयोग बन गया है. उन्होंने अधिकारियों को अपने अधीन कर लिया है और बिहार चुनाव में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करके जीत हासिल की है. वे देश में विपक्षी दलों को पूरी तरह से खत्म करने और यहां तक कि बुर्जुआ संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को नष्ट करने की योजना को लागू कर रहे हैं.

हम मजदूरों, किसानों, युवाओं, छात्रों और सामाजिक समूहों से आह्वान करते हैं कि वे सीपीआई (माओवादी) के नेता कॉमरेड हिडमा जैसे साहसी योद्धाओं के इतिहास से प्रेरित होकर फासीवादी आरएसएस-भाजपा मनुवादियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखें और संघर्ष में भाग लेकर अंततः इस शोषणकारी व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकें.

उपरोक्त बयान देने के बाद सीपीआई माओवादी के प्रवक्ता अभय  ‘क्रांतिकारी अभिवादन के साथ’ अपने बयान को समाप्त करते हैं. हिडमा के अंतिम संस्कार में तमाम सरकारी बाधाओं को चिरते हुए लाखों लोगों की विशाल जनसमूह ने अपने अश्रुपूरित नेत्रों से माडवी हिडमा और उनकी पत्नी राजे को अंतिम विदाई दी.

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