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सेना को ही प्रधानमंत्री बना दो !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 1, 2017
in ब्लॉग
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सेना देश के सम्मान और विश्वास का सर्वोच्च शिखर होता है. पर हाल के दिनों में सेना के द्वारा जिस प्रकार देश के अन्दरूनी राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप की निरंतर खबरेंं आ रही है, वह देश के लोकतंत्र के हित में कतई नहीं है. बस्तर के जंगलों से लेकर काश्मीर के मामलातों तक सेना निरंतर बकायदा प्रेस कांफ्रेस आयोजित कर जिस प्रकार सरेआम जटिलतम राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बयानबाजी कर रही है, वह निःसंदेह देश को सैन्य शासन के अधीन ले जाने की खौफनाक कार्रवाई की आहट लगने लगी है.

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अपनी राजनीतिक गरिमा खो चुकी केन्द्र की मोदी सरकार ने सेना का जिस प्रकार दुरूपयोग करना प्रारम्भ किया है वह देश भर में सेना की साख को, उसकी गरिमा को गिराने का ही काम किया है. सेना में वर्ग-विभाजन भी साफ तौर पर नजर आने लगा है. सेना के अन्दर व्याप्त कदाचार, खुलेआम भ्रष्टाचार, अपनी सेना के अन्दर ही सैनिकों पर अनुशासन के नाम पर आतंक पैदा करना आदि जैसे खौफनाक मामलों के लगातार उजागर होते रहने से सेना की वस्तुस्थिति का एक वीभत्स चेहरा देश के सामने आया है. खाने में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले बर्खास्त सैनिक की पत्नी जब यह कहती है कि “कोई भी अपने बेटों को सेना में भेजना नहीं चाहेगी”, तो वह सेना के अन्दर की वीभत्स स्थिति का ही एक खतरनाक पहलू देश के सामने रखती है.

इन तमाम मामलों के सामने आने के बाद बेखौफ थल सेना के जनरल विपिन रावत जब एक प्रेस वार्ता में घोषणा करते हैं कि ‘‘जिस देश के लोग फौज से डरना बन्द कर दें, वह बर्बाद हो जाता है’’, सेना की अपने देशवासियों के प्रति भावना का भी स्पष्ट आभास हो जाता है. जिस देश की सेना देश की जनता को डराने लगे, देश की जनता के खिलाफ लड़ने की उन्मादी घोषणा करने लगे, वह सेना खुद को नष्ट करने की दिशा में आगे बढ़ जाती है.

अब तक तो यही माना जाता था कि सेना देश के सीमाओं की रक्षा करने के लिए होती है, पर विपिन रावत ने स्पष्ट कर दिया कि “देश की सेना देशवासियों को डराने के लिए” बनी होती है. सेना का संदेश देश के लोकतंत्र के नाम पर एक काला धब्बा है. यह सेना के द्वारा देश के जटिल राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप की अनाधिकार चेष्टा भी है, जो मोदी सरकार के द्वारा किये गये सेना के राजनीतिकरण का एक डरावना पहलू है.

ऐसे में इस आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता जब सेना ही देश की बागडोर सम्भाल लें और देशवासियों को डराने लगे. लोकतंत्र, सैन्यतंत्र में तब्दील हो जाये और देश और समाज सैन्यशासित राष्ट्र पाकिस्तान जैसे भयानक भंवरजाल में फंस जाये. इससे पहले की आशंका सच में तब्दील हो जाये, सेना को देश के अन्दरूनी जटिल राजनीतिक मामलों से दूर रखकर एक स्वस्थ राजनीतिक ऐजेंडे के तहत् काश्मीर सहित देश की अन्य तमाम समस्याओं को सुलझा लिया जायें.

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Comments 1

  1. cours de theatre paris says:
    9 years ago

    Thanks for the blog post.Really thank you! Cool.

    Reply

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