Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home पुस्तक / फिल्म समीक्षा

शापित कब्र के अंदर दस करोड़ लोग

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 27, 2020
in पुस्तक / फिल्म समीक्षा
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

शापित कब्र के अंदर दस करोड़ लोग

Manmeetमनमीत, यायावर

क्या कोई ऐसी सभ्यता हो सकती है, जिसके बच्चों, जवान, बूढ़ों और औरतों को इंसान मानने से ही इंकार कर दिया गया हो ? ये मान लिया गया हो कि अगर इन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाए तो इन्हें दर्द ही नहीं होगा. इनके अंदर संवेदना नहीं ही होगी और भावनायें तो बिल्कुल भी नहीं. आमतौर पर आज के वक्त में हमें कोई इस तरह का किस्सा सुनाये तो हम उसे तत्काल खारीज कर देंगे.

You might also like

‘कास्ट एंड रिवोलुशन’ : जाति उन्मूलन का एक क्रान्तिकारी नज़रिया

‘नो अदर लैंड’, तब जाएं तो जाएं कहां ?

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

लेकिन ऐसा था। और ये सभ्यता कोई सैकड़ों, लाखों में नहीं बल्कि लगभग दस करोड़ लातिन अमेरिकी थे. एदुआर्दो गालियानों की किताब ‘ओपेन वेन्स ऑफ लैटिन अमेरिका’ का हिन्दी अनुवाद ‘लातिन अमरीका के रिसते जख्म पढ़ रहा हूं.’

‘ओपन वेन्स ऑफ लैटिन अमेरिका’ के हर पन्ने को पढ़ने के बाद बेचैनी इतनी बढ़ जाती है कि कुछ देर किताब को बंद करना मजबूरी-सी हो जाती है. एदुआर्दो की ये किताब, एक किताब भर नहीं है. ये एक जीवंत आरोप भी है उस सामंतवादी और सम्राज्यवादी समाज पर, जिसने लातिन अमेरिका के लगभग दस करोड़ जनता का इस कदर खून चूसा, कि वो महज चार सदियों में पचास लाख से भी कम हो गई.

अमेरिकी महाद्वीप से ठीक नीचे लातिन अमेरिकी परिक्षेत्र में 26 देश है, जिनमें, मुख्य रूप से क्यूबा, बालीविया, मैक्सिको, कोलंबिया, ब्राजिल, चीली, अर्जेटीना, वेनेज्यूला है. 14 वीं शताब्दी तक इन देशों की अपनी खुशहाल सभ्यतायें थी और अपने देवता.

लातिन अमेरिकावासी इसलिये भी खुश थे, क्योंकि उनके पास प्रकृति का दिया हुआ सब कुछ था. जो नहीं था, वो थी महत्वकांक्षायें लेकिन, एक अगस्त 1492 को एक दिशा से भटका हुआ जहाज लातिन अमेरिकी महाद्वीप पहुंचा. इस जहाज को स्पेन से जाना तो जापान था, लेकिन ये तुफान में दिशा भटक कर बिल्कुल विपरीत यहां पहुंच गया.

इस जहाज में था, स्पेनी सम्राज्य का शाही सेना का उप कमांडर और कैथोमिक चर्च का एजेंट क्रिस्टोफर कोलंबस. समुद्र किनारे जहाज से उतरते ही कोलबंस ने वहां की महिलाओं के कानों और हाथों में सोने-चांदी के अभूषण देखा तो भौंचका रह गया. वो सूखा मांंस और चमड़े की सप्लाई लेने जापान की यात्रा पर था लेकिन नियती को शायद कुछ और मंजूर था. उसने लौटकर ये बात अपने देश में सरकार को बताई. उसके कुछ समय बाद लैतिन अमेरिका में सेना उतार दी गई.

एक सभ्यता कितनी मासूम हो सकती है, वो इस बात से भी पता चलता है कि जब स्पेनिश सेना समुद्री किनारों में पहुंची तो उनके बड़े बड़े जहाजों को देखकर वहां के राजा ने सोचा कि साक्षात देवता आ गये है. स्पेनिश जवान इतने गौरे और उनके बाल सुनहरे थे कि लातिन लोगों ने उन्हें स्वर्ग से उतरे देवता समझा. स्पेनिश जवानों ने इन लोगों के पेट पर सटाकर अपनी बारूद भरी बंदूक से फायर किया तो भी इन्हें समझ नहीं आया कि ये हो क्या रहा है.

बहरहाल, उसके बाद शुरू हुआ लातिन अमेरिका में सोने और चांदी की लूट का चार सदी का काला अध्याय. लातिन अमेरिका के ही करोड़ों लोगों से पहले खाने खुदवाई गई. इस दौरान ही जहरीली गैस निकालने से लाखों लोग मारे गये. जब लोग खदानों के अंदर जाने से डरने लगे तो बंदूक के बल में उन्हें अंदर भेजा जाता थे. हालत इस कदर बुरे हो गये थे कि मां अपनी औलादों को खुद ही मार देती थी.

सैकड़ों फीट नीचे नंगे बदन मजदूर चट्टान तोड़ने जाता था. चट्टान तोड़कर अपनी नंगी पीठ पर मोमबत्ती जला कर ऊपर तक आता था. इस दौरान कई दब कर मर जाते थे. कोई भाग कर ऊपर आने की कोशिश करता था तो उसे गर्म तेल डाल कर मार दिया जाता था. जो बच गये वो मलेरिया, हेजा और फ्लेग से मर जाते थे.

जब चांदी और सोना खत्म हो गया तो फिर इन लोगों से कोको, रबर, गन्ना, कॉफी की खेती करवाई गई. ये वो ही वक्त था, जब यूरोप के कैथोलिक चर्च के जुल्म अपने चरम पर थे. स्पेनिश सेना के बाद यूरोप के तमाम सम्राज्यवादी देश यहां लूट के लिये पहुंचे. इन देशों के साथ कैथोलिक चर्च के पोप भी पहुंचे, जिन्होंने यहां पर धर्म परिवर्तन के नाम पर हत्याओं का नंगा नाच किया.

एक दूसरे के धर्म को सबसे ज्यादा हिंसात्मक ठहराने वाले भी इस किताब को पढ़कर जान सकते हैं कि क्यों आखिरकार सैकड़ों साल बाद फ्रांस की क्रांति की जरूरत पड़ी, जिसने धर्म और सत्ता को पहली बार अलग किया और एक आदर्श समाज की परिकल्पनाओं के बीज बोये, जिसका फल आज भारत भी खा रहा है.

बहरहाल, एदुआर्दो गालियानों का गुस्सा वाजिब है. असल में, ‘ओपेन वेन्स ऑफ लैटिन अमेरिका’ उन दस करोड़ लातिन अमेरिकियों का गुस्सा भी है, जो इतिहास की शापित क्रबों में दफन है. ओपेन वेन्स ऑफ लैटिन अमेरिका पूंजीवादी जुल्म का वो खूनी दस्तावेज भी है, जिसे पढ़कर धर्म और मुनाफे के कॉकटेल का असली रूप सामने भी आता है.

Read Also –

पुस्तक समीक्षा : पलामू की धरती पर 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

गुरिल्लों की रातें

Next Post

टिहरी रियासत की वो पहली आजाद ‘सोवियत’

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘कास्ट एंड रिवोलुशन’ : जाति उन्मूलन का एक क्रान्तिकारी नज़रिया

by ROHIT SHARMA
June 9, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘नो अदर लैंड’, तब जाएं तो जाएं कहां ?

by ROHIT SHARMA
April 16, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘Coup pour Coup’ (Blow for Blow) : फ्रांस के टेक्सटाइल महिला मजदूरों की कहानी

by ROHIT SHARMA
April 2, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

दि फर्स्ट ग्रेडर : एक मर्मस्पर्शी फिल्म

by ROHIT SHARMA
March 23, 2025
पुस्तक / फिल्म समीक्षा

‘No Other Land’: A moment of hope and solidarity

by ROHIT SHARMA
March 4, 2025
Next Post

टिहरी रियासत की वो पहली आजाद 'सोवियत'

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

बिहार के बाद बंगाल

November 23, 2020

जनता का स्टील कारखाना : विशाखापत्तनम में निजीकरण के खिलाफ जारी संघर्ष की एक अनूठी दास्तान

July 11, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.