यह लेख सीमा आजाद - विश्वविजय के अवसरवाद, विघटनवाद और संशोधनवाद के विशेष संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है.

'उदारतावाद अवसरवाद की एक अभिव्यक्ति है और मूलतः मार्क्सवाद के विरुद्ध है. यह नकारात्मक है और वस्तुगत रूप से इसका प्रभाव दुश्मन की सहायता करना है; इसीलिए दुश्मन हमारे बीच इसके बने रहने का स्वागत करता है.' — माओ  (Selected Works - Volume II)

'उदारतावाद निम्न-पूंजीवादी स्वार्थपरता से पैदा होता है; यह व्यक्तिगत हितों को क्रांति के हितों से ऊपर रखता है और इससे विचारधारात्मक, राजनीतिक और संगठनात्मक उदारतावाद पैदा होता है.' — माओ

भारत के क्रांतिकारी आंदोलन में लंबे समय से उदारतावाद की विभिन्न अभिव्यक्तियां मौजूद रही हैं. इसको खत्म करने के लिए समय-समय पर दोष निवारण आंदोलन भी चलाया गया. लेकिन ये दोष निवारण आंदोलन अपर्याप्त रहे. जिसके कारण आंदोलन को काफी क्षति उठानी पड़ी. जैसा कि माओ कहते हैं कि उदारतावाद अवसरवाद की ही एक अभिव्यक्ति है. स्वाभाविक है कि उदारतावाद की मजबूत अभिव्यक्तियां यह साबित करती हैं कि अवसरवाद भी मजबूती से आंदोलन में मौजूद रहा.

आज जब क्रांतिकारी आंदोलन तत्कालिक रूप से पीछे हटने की स्थिति में है, ऐसे में अवसरवाद, जिसकी विभिन्न अभिव्यक्तियां विभिन्न तरह के उदारतावाद के रूप में आती हैं, से संघर्ष अपरिहार्य हो जाता है. इस तरह उदारतावाद से संघर्ष भी अपरिहार्य हो जाता है.

आज जब क्रांतिकारी आंदोलन देश में अवसरवाद, विघटनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ स्पष्ट और तीखा संघर्ष चला रहा है, ताकि पार्टी को एक लेनिनवादी स्टाइल की बोलशेविक पार्टी के रूप में पुनर्गठित किया जा सके, तो क्रांतिकारी खेमे के अंदर विभिन्न रूपों की उदारतावादी प्रवृत्तियां सामने आ रही हैं.

सीमा आजाद - विश्वविजय प्रकरण

एक उदाहरण से कहें तो हाल ही में अवसरवादी-विघटनवादी गद्दार सीमा आजाद और विश्वविजय के खिलाफ करीब 2.5 वर्ष आंतरिक संघर्ष चलाया गया और अंततः जब वो सुधरने के लिए तैयार नहीं हुए और अपने अवसरवादी, विघटनवादी प्रवृत्तियों पर डटे रहे और पार्टी को ही खारिज कर दिया, तो अंततः उन्हें पार्टी से निष्कासित करना पड़ा.

सीमा-विश्वविजय के अवसरवाद और विघटनवाद, जो पार्टी को कमजोर और विघटित करने, तोड़-फोड़, समर्थकों को भटकाने, भूमिगत काम के महत्व को कम करने अथवा खारिज करने, सिर्फ खुले और कानूनी संगठनों की वकालत करने, कार्यकर्ताओं को कैरियरिज्म की ओर धकेलने, पार्टी कमेटियों और नेतृत्व पर हमला करने, पार्टी की हायर कमेटी और नेतृत्व को डिस्क्रेडिट करने, दुष्प्रचार करने इत्यादि के रूप में सामने आए, से जब खुले तौर पर संघर्ष शुरू हुआ तो क्रांतिकारी खेमे के बहुत से पुराने कार्यकर्ताओं और नेताओं ने, खासकर जो भूमिगत जीवन छोड़कर खुले जीवन में आ चुके हैं, अपने उदारतावाद और अवसरवाद के कारण सीमा-विश्वविजय को खुला और छिपा समर्थन देना शुरू किया.

कुछ लोगों ने सीमा-विश्वविजय से संघर्ष चलाने, उन्हें एक्सपोज करने की जगह अपनी पुरानी दोस्ती और उनके साथ अपने पुराने अनुभव का तर्क देकर उनका समर्थन किया. उनके पक्ष में सोशल मीडिया पर पोस्ट किए. कुछ लोगों ने फेसबुक पर उनके पोस्ट लाइक करके उन्हें समर्थन दिया, तो कुछ ने कमेंट करके अपनी सॉलिडेरिटी व्यक्त की.

कुछ ऐसे चतुर अवसरवादी भी सामने आए जो परोक्ष रूप से पार्टी को वामपंथी भटकाव का शिकार बताया. नेतृत्व की तुलना महादेव मुखर्जी, वांग मिंग से की. अवसरवादियों और जनवादी केंद्रीयता के उसूलों को खारिज करने वालों से अंतहीन आंतरिक संघर्ष चलाने की वकालत की.

ये उदारतावादी-अवसरवादी तत्व राजनीतिक, सैद्धांतिक और जुझारू संघर्षों को खुले तौर पर न चलाने की वकालत करते हैं. जबकि सीमा और विश्वविजय जैसे गद्दार पूरे देश में पार्टी समर्थकों के बीच अपनी अवसरवादी, विघटनवादी लाइन का प्रचार कर रहे हैं और आंतरिक संघर्ष शुरू होने से पहले से कर रहे थे.

ये उदारतावादी-अवसरवादी फासीवादी राजकीय दमन व दक्षिणपंथी अवसरवाद से कमजोर हुई क्रांतिकारी पार्टी की कमजोर स्थितियों का फायदा उठाते हुए पार्टी लाइन पर खुले तौर पर संदेह और हमले शुरू कर चुके हैं. इन्होंने पार्टी एलिमेंट्स से आंतरिक समन्वय बनाकर आपसी विचार, विमर्श और डिबेट की भी कोई कोशिश नहीं की और खुले तौर पर दलाल बड़े पूंजीपति वर्ग (CBB) को प्रधान अंतर्विरोध बताने लगे. जबकि यह जानते हैं कि पार्टी अभी खत्म नहीं हुई है. सिर्फ सैन्य मामलों में कमजोर हुई है.

अवसरवादी मैगजीन और उदारतावादी प्रवृत्ति

ये उदारतावादी दस्तक जैसे अवसरवादी मैगजीन, जो पार्टी लाइन के विरुद्ध जाकर संसदीय चुनाव में भागीदारी का अपील करती है, यौन अवसरवादी विचारों वाला लेख छापती है, कोबाड जैसे गद्दारों का लेख छापती है और पार्टी लाइन और प्रधान अंतर्विरोध सामंतवाद पर कभी कोई लेख नहीं छापती, ऐसी अवसरवादी मैगजीन जो शासक वर्ग की सेवा कर रही है, को ये उदारतावादी प्रतीकात्मक रूप से जलाने को फासीवादी कार्रवाई बताते हैं.

माओ ने ऐसे लोगों के बारे में कहा है: 'इन लोगों के पास मार्क्सवाद भी है और उदारतावाद भी - वे मार्क्सवाद की बातें करते हैं, लेकिन उदारतावाद पर अमल करते हैं; दूसरों के लिए मार्क्सवाद और अपने लिए उदारतावाद लागू करते हैं.'

उदारतावाद-अवसरवाद की विभिन्न अभिव्यक्तियां

सीमा-विश्वविजय जैसे गद्दारों के अवसरवाद, विघटनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष में क्रांतिकारी खेमे के साथियों और समर्थकों का उदारतावाद-अवसरवाद इन रूपों में अभिव्यक्त हो रहा है:

  • ये हमारे पुराने साथी हैं, इसलिए इनका पोस्ट लाइक कर देते हैं.
  • ये हमारे पुराने व परिचित साथी हैं, इसलिए इनके प्रति फेसबुक पर एकजुटता व्यक्त किया जाना चाहिए.
  • इनसे हमारा पुराना संबंध है, इसलिए अगर हम दस्तक मंगाने या बांटने से इंकार करते हैं तो इनसे हमारा संबंध खराब होगा.
  • मैं इन्हें बहुत दिनों से जानता हूं, ये गलत हो ही नहीं सकते.
  • पार्टी बहुत कठोरता से पेश आ रही है, इतना निर्मम संघर्ष ठीक नहीं है.
  • लंबे समय से पार्टी से जुड़े सीमा-विश्वविजय अगर कह रहे हैं तो पार्टी कमेटी जरूर गलत या संदेहास्पद है.
  • संघर्ष तो ठीक है, लेकिन मैथड ठीक नहीं है.
  • अनुभववाद - अपने पुराने अनुभव की वजह से व्यक्तियों में हो रहे बदलाव व पतन के प्रति आंख मूंद लेना.
  • दोस्ती और मित्रता जैसे व्यक्तिगत संबंधों की वजह से उनकी आलोचना न करना.
  • अपने व्यक्तिगत संबंधों और पुराने अनुभव की वजह से ऊपरी कमेटी की बात न मानना और अनुशासनहीनता करना.
  • अवसरवाद यानी मौकापरस्ती की वजह से गलत के खिलाफ संघर्ष की जगह उससे एकता कायम करना.
  • यह हमारे वरिष्ठ रहे हैं, इनके खिलाफ मैं कैसे जा सकता हूं.
  • हमारे परिवार के सदस्य हैं. इनकी आलोचना करने से रिश्ते खराब होंगे.
  • पार्टी और पार्टी कमेटियों, उच्चतर कमेटियों के निर्णय पर भरोसा करने और मानने की जगह दोनों पक्षों की बात सुनकर निर्णय लेने की मांग. यानी जनवादी केंद्रीयता का उल्लंघन.

व्यक्तिगत संबंध को सिद्धांत से ऊपर रखना.

कोई भी कम्युनिस्ट क्रांतिकारी यह जानता है कि पार्टी और क्रांतिकारी संगठनों में सक्रिय वैचारिक संघर्ष आवश्यक है. लेकिन यह प्रवृत्ति ऐसी होती है जो संघर्ष से बचती है और सिद्धांतहीन एकता का समर्थन करती है.

सीमा-विश्वविजय व उनके उदारतावादी समर्थकों ने एक भी राजनीतिक आलोचना का जवाब नहीं दिया. सिर्फ मैथड की आड़ लेते रहे. जबकि सीमा और विश्वविजय, खासकर सीमा, अपने अवसरवाद, संशोधनवाद और विघटनवाद का घूम-घूम कर प्रचार करती रहीं. दस्तक में संसदीय चुनाव में वोट देने का अपील भी करती रहीं. इतना ही नहीं, पिछले लोकसभा चुनाव में वोट भी दिया. तब भी तमाम उदारतावादी इनकी आलोचना से बच रहे हैं.

माओत्से तुंग द्वारा बताई गईं उदारतावाद की 11 अभिव्यक्तियां

1. पुराने संबंधों के कारण गलत बात को जाने देना

शान्ति और मित्रता के लिए किसी बात को यूं ही जाने देना, जबकि कोई व्यक्ति स्पष्ट रूप से गलत हो; और सैद्धान्तिक बहस से इसलिए बचना कि वह पुराना परिचित, उसी गांव का रहने वाला, सहपाठी, घनिष्ठ मित्र, प्रिय व्यक्ति, पुराना सहकर्मी या पुराना अधीनस्थ है. अथवा आपसी अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए मामले को हल्के ढंग से छूकर छोड़ देना, बजाय इसके कि उसकी पूरी तरह छानबीन की जाए. इसका परिणाम यह होता है कि संगठन और व्यक्ति दोनों को नुकसान पहुंचाता है. यह पहला प्रकार है.

2. संगठन के बजाय निजी तौर पर गैर-जिम्मेदाराना आलोचना

संगठन के सामने सक्रिय रूप से अपने सुझाव रखने के बजाय निजी तौर पर गैर-जिम्मेदाराना आलोचना करना. लोगों के सामने उनके मुंह पर कुछ न कहना, लेकिन उनकी पीठ पीछे गपशप करना; या बैठक में कुछ न कहना, लेकिन बाद में गपशप करना. सामूहिक जीवन के सिद्धान्तों की बिल्कुल परवाह न करना, बल्कि अपनी मनमानी करना. यह दूसरा प्रकार है.

3. गलत बात को देखकर भी चुप रहना

यदि कोई बात स्वयं को प्रभावित नहीं करती तो उसे यूं ही बहने देना; यह जानते हुए भी कि क्या गलत है, जितना हो सके कम बोलना; दुनियादारी से काम लेना, सुरक्षित खेल खेलना और केवल दोष से बचने की कोशिश करना. यह तीसरा प्रकार है.

4. संगठनात्मक अनुशासन की अवहेलना

आदेशों का पालन न करना, बल्कि अपनी राय को सर्वोपरि रखना. संगठन से विशेष रियायत की मांग करना, लेकिन उसके अनुशासन को अस्वीकार करना. यह चौथा प्रकार है.

5. राजनीतिक बहस की जगह व्यक्तिगत हमला

एकता, प्रगति या काम को ठीक ढंग से पूरा करने के लिए गलत विचारों के विरुद्ध बहस और संघर्ष करने के बजाय व्यक्तिगत आक्रमण करना, झगड़ा खड़ा करना, व्यक्तिगत द्वेष निकालना या बदला लेने की कोशिश करना. यह पांचवां प्रकार है.

6. गलत और प्रति-क्रांतिकारी विचारों को अनदेखा करना

गलत विचार सुनकर उनका खंडन न करना और यहां तक कि प्रति-क्रांतिकारी टिप्पणियां सुनकर भी उनकी रिपोर्ट न करना, बल्कि ऐसे व्यवहार करना जैसे कुछ हुआ ही न हो. यह छठा प्रकार है.

7. जनता से उदासीन रहना

जनता के बीच रहते हुए प्रचार और आंदोलन न करना, बैठकों में भाषण न देना, उनके बीच जांच-पड़ताल और पूछताछ न करना, बल्कि उनके प्रति उदासीन रहना और उनके कल्याण की कोई चिंता न करना; यह भूल जाना कि व्यक्ति एक कम्युनिस्ट है और ऐसा व्यवहार करना जैसे वह कोई साधारण गैर-कम्युनिस्ट हो. यह सातवां प्रकार है.

8. जनता के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले व्यवहार को न रोकना

किसी व्यक्ति को जनता के हितों को नुकसान पहुंचाते हुए देखकर भी आक्रोश महसूस न करना, उसे समझाने या रोकने या उसके साथ तर्क करने के बजाय उसे ऐसा करते रहने देना. यह आठवां प्रकार है.

9. काम के प्रति लापरवाही

बिना किसी निश्चित योजना या दिशा के आधे-अधूरे मन से काम करना; लापरवाही से काम करना और जैसे-तैसे समय काटना - 'जब तक साधु बने हो, घंटा बजाते रहो.' यह नौवां प्रकार है.

10. अपने पुराने योगदान पर अहंकार

यह समझना कि व्यक्ति ने क्रांति के लिए महान सेवा की है, अपने को अनुभवी कार्यकर्ता होने पर गर्व करना, छोटे कार्यों को तुच्छ समझना जबकि बड़े कार्यों के लिए स्वयं को अयोग्य पाना, काम में लापरवाह और अध्ययन में ढीला होना. यह दसवां प्रकार है.

11. अपनी गलतियों को सुधारने से इनकार

अपनी गलतियों से अवगत होना और फिर भी उन्हें सुधारने का कोई प्रयास न करना, अपने प्रति उदारतावादी रवैया अपनाना. यह ग्यारहवां प्रकार है.