आक्रोशित चीखें ऐसा कोलाहल उत्पन्न करती हैं, जिसमें सत्य गुम होने लगता है
बात होनी चाहिये कि बीते वर्षों में हमारे नीतिकार कश्मीर में आगे बढ़े हैं या उन्होंने हालात को और अधिक ...
बात होनी चाहिये कि बीते वर्षों में हमारे नीतिकार कश्मीर में आगे बढ़े हैं या उन्होंने हालात को और अधिक ...
बिहारी गरीब होते हैं, गंदे होते हैं, बिहारियों को बोलने नहीं आता है, ‘र’ और ‘ड़’ में फर्क नहीं मालूम. ...
अलीगढ़ एनकाउंटर की कहानी उस घर में कभी पुलिस नहीं आयी थी. दो लड़के पड़ोस के हाजी के यहां कढ़ाई ...
'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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