Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

यूक्रेन युद्ध : अमरीका के नेतृत्व में चलने वाले नाटो को भंग करो

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
July 12, 2023
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

अमरीका समेत पश्चिम यूरोप के देशों द्वारा यूक्रेन सरकार को दी जाने वाली भारी सामरिक एवं आर्थिक सहयोग की बदौलत यूक्रेन एवं रूस के बीच पिछले एक साल से जारी युद्ध के रुकने को संभावना समाप्त-सी होती जा रही है. अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की यूक्रेन की राजधानी कीव का गुप्त दौरा तथा यह घोषणा कि हम रूस को यूक्रेन युद्ध में परास्त करके रहेंगे की प्रतिक्रियास्वरूप रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमरीका एवं रूस के बीच हुए ‘न्यू स्टार्ट परमाणु संधि’ से रूस को अलग करने की घोषणा कर दी है. पूरी दुनिया में इसकी वजह से गहरी चिंता देखी जा रही है.

अमरीका और रूस के बीच वही अंतिम संधि थी जिसकी बदौलत परमाणु हथियारों एवं लंबी दूरी के मिसाइलों की संख्या को सीमाबद्ध किया गया था. इसकी जांच-परख अमरीकी विशेषज्ञ रूस जाकर एवं रूसी विशेषज्ञ अमरीका जाकर उनके सामरिक अड्डों का निरीक्षण करके करते थे. यह संधि 2010 में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा एवं रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव की सहमति के पश्चात उनके हस्ताक्षर से जारी किया गया था.

इस समझौते के अनुसार रूस और अमरीका अधिकतम 1550 परमाणु मिसाइल, 700 लंबी रेंज की मिसाइल और बमवर्षक बिल्कुल तैयार रख सकते हैं. आज रूस और अमरीका के पास पूरी दुनिया के परमाणु हथियारों के 90% हैं. साथ ही दोनों देश इसकी जांच और निगरानी भी समय-समय पर करते रहेंगे. इस समझौता से रूस के निकलने के परिणामस्वरूप अब वे एक-दूसरे के हथियारों की जांच नहीं कर सकते तथा दोनों इसकी तय सीमा से ज्यादा परमाणु बम, मिसाइल और बमवर्षक विमान बनाकर रख सकते हैं.

इस प्रकार यह एक नये परमाणु हथियारों की प्रतिद्वंद्विता को जन्म देगा. अन्य परमाणु सम्पन्न देश भी नये-नये परमाणु बम और मिसाइल बनाना शुरू कर सकते हैं. इससे विश्व में परमाणु युद्ध की संभावना बढ़ जाएगी तथा पूरी मानवता का अस्तित्व ही संकट में पड़ जाएगा. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरन अमरीका ने जापान के दो शहरों पर परमाणु बम गिराए थे जिससे लाखों लोग जलकर भस्म हो गए तथा अन्य लाखों लोग भयानक बीमारियों से ग्रस्त हो गए. पूरा शहर राख का ढेर बन गया. मानव समाज इस त्रासदी को भूला नहीं है.

लेकिन अमरीका एवं इसके नाटो सैन्य संधि के सहयोगी देश, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, इत्यादि रूस को शिकस्त देने एवं उसकी आर्थिक-सामरिक शक्ति को ध्वस्त करने पर आमादा हैं. अपने इस कात्सित उद्देश्य की पूर्ति के लिए इनलोगों ने सोवियत रूस के अन्तिम राष्ट्रपति गोर्वाचिव को दिए अपने वादे को तोड़ दिया कि अगर गोर्वाचिव वारसा संधि को समाप्त कर देते हैं ता वे नाटो को भंग कर देंगे.

गोर्वाचिव के निर्देश पर सोवियत यूनियन ने वार्सा समझौते को समाप्त कर दिया, जिसके तहत पूर्वी यूरोप के देश पोलैंड, हंगरी, चेकोसलोवाकिया, रूमानिया इत्यादि से सोवियत सेनाएं वापस हो जाएंगी. लेकिन अमरीका एवं इनके अन्य पूंजीवादी साम्राज्यवादी सहयोगियों ने न सिर्फ नाटो को भंग नहीं किया, बल्कि वार्सा पैक्ट से बाहर आए रूस के पड़ोसी देश, पोलैंड, हंगरी, इत्यादि को नाटो में शामिल कर लिया.

पूर्वी यूरोप में अपना पांव पसारकर अमरीकी साम्राज्यवाद एवं उसके यूरोपीय सहयोगियों ने यूक्रेन को भी नाटो में शामिल करने की कवायद शुरू कर दी. पुतिन ने बार-बार चेतावनी दी कि वे ऐसा नहीं करें, अन्यथा इसका परिणाम बुरा होगा. यूक्रेन के नाटो में शामिल होने से अमरीका, इंग्लैंड, जर्मनी, फ्रांस की सेनाएं वहां रूस की सीमा के पास अपना सैनिक अड्डा एवं मिसाइल सिस्टम तैनात करती. यूक्रेन की सीमा से अमरीकी मिसाइल मात्र 12 मिनट में मास्को पर बम गिरा सकती है.

रूस के लोग भूले नहीं हैं कि हिटलर की सेनाएं यूक्रेन के रास्ते ही रूस में घुसीं और तेजी से मास्को की ओर कूच कर गईं, क्योंकि वह समतल क्षेत्र है. मास्को को मुक्त कराने की ऐतिहासिक लड़ाई एवं बलिदान रूस के लोग भूले नहीं हैं. इतना ही नहीं, अमरीका एवं इंग्लैंड की योजना थी कि यूक्रेन से सटे काले सागर पर वे कब्जा कर वहां अपना नौसनिक अड्डा बनाएंगे तथा रूस को वहां से बेदखल कर देंगे. रूसी नेवी का केन्द्र ब्लैक सी (काला सागर) में ही है.

इस प्रकार अमरीकी साम्राज्यवाद एवं उसके नाटो सहयोगी रूस को बर्बाद करने एवं वहां अपनी कठपुतली सरकार बनाने कौ नीति पर काम कर रहे थे. सोवियत यूनियन के विघटन के बाद पूरी दुनिया पर अपना दबदबा बनाने का अमरीकी सपना पूरा करने में एक ही बाधा थी, रूस की विशाल सैन्य शक्ति (जिसमें उसको परमाणु क्षमता सबसे अहम थी). अपने इसी मंसूबे को पूरा करने के लिए इन्होंने पहले यूक्रेन की चुनी हुई सरकार को भीड़तंत्र का उपयोग करके अपदस्थ कर दिया एवं जेलेन्सकी सरकार को स्थापित किया.

इस सरकार ने 10 विरोधी दलों को प्रतिबंधित कर दिया है, जो यूक्रेन के नाटो में शामिल होने का विरोध करते थे. साथ ही लाखों उन यूक्रेनवासियों का भयानक दमन किया जो रूसी भाषा बोलते थे तथा रूस के साथ अच्छे रिश्ते के हिमायती थे. उन क्षेत्रों में यूक्रेन से अलग होने का आन्दोलन चल रहा था. वहां के लोगों का जबरदस्त दमन वर्तमान सरकार ने किया. रूसी सेनाओं ने उनको आजाद कर दिया.

फिलवक्त आवश्यकता इस बात की है कि युद्ध को रोका जाय. अगर ऐसा नहीं हुआ तो परमाणु युद्ध और विश्व युद्ध होने की संभावना पैदा हो जाती है. ऐसा हुआ तो पूरी मानवता तबाह और बर्बाद हो जाएगी. लेकिन ये तभी संभव है जबकि रूस को घेरने एवं बर्बाद करने की अमरीका एवं नाटो के मंसूबों पर लगाम दिया जाय. तभी समझौते के रास्ते पर चलकर युद्ध विराम एवं स्थायी शांति के लिए समझौता हो पाएगा. अमरीका के नेतृत्व में चलने वाले नाटो को भंग करने का निर्णय भी आज नहीं तो कल लेना पडेगा. अन्यथा ये दुनिया में कहीं-न-कहीं युद्ध को अंजाम देते ही रहेंगे. इस दृष्टिकोण के साथ शांतिप्रिय लोगों को पूरी दुनिया में गंभीर प्रयास करना होगा.

  • अरविन्द सिन्हा

Read Also –

लिथुआनिया नाटो शिखर बैठक से पहले यूक्रेन बाहर : यूरोप को पुतिन और एशिया को जिनपिंग करेंगे कंट्रोल
नाटो और अमरीका का सरेंडर ही अब परमाणु युद्ध से पृथ्वी को बचा सकता है
आज मार्क्स की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक है !

    [ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

    scan bar code to donate
    scan bar code to donate
    Pratibha Ek Diary G Pay
    Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

राजनीति-निरपेक्ष बुद्धिजीवियों से

Next Post

हे लेखक !

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

हे लेखक !

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

स्टीफन हॉकिंग : वह आदमी जो ब्रह्मांड को जानता था…

March 19, 2024

किसानों की कर्जमाफी पर शोर मचाने वाले कॉरपोरेट घरानों के कर्जमाफी पर क्यों नहीं शोर मचाते ?

December 30, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.