Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

लखीमपुर से आगे : जहां आंदोलन का सिर्फ बीज था वहां अब बरगद उगेगा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 6, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
http://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2021/10/VID-20211005-WA0010.mp4

मैं जानता हूं कि समझौते के बाद काफी किसान पुत्र गुस्से में रहेंगे. मेरा उन्हें एक संदेश है – ‘गुस्सा पालना सीखिये, गुस्से का गुलाम मत बनो.’ केंद्रीय गृहराज्य मंत्री बड़ा पद है, कितनी ताक़त होती है आप समझ नहीं सकोगे. 15 दिनों में गुस्से ने उसका क्या किया ?

मात्र 10 दिन पहले दो दर्जन किसानों द्वारा झंडे दिखाए जाने पर उसके अहंकार का, पद का, बदमाशी का गुस्सा जाग उठा. उसने 25 तारीख को बहुत छोटी-छोटी जनसभाओं मे धमकियां दी – ‘देख लूंगा…, दो मिनुट में सीधा कर दूंगा…., मुझे जानते नहीं MP बनने से पहले मैं क्या था…., अक्ल ठिकाने लगा दूंगा….’ इत्यादि. वो सभाएं उस इलाके में थी जहां हमारे वर्तमान आंदोलन के जबरदस्त मजबूत साथी गुरमनीत मंगत का घर है.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

सबको याद होगा कि अम्बाला बॉर्डर से सिंधु बॉर्डर तक डेढ़ सौ किलोमीटर तक कैसे और कितने बैरिकेड तोड़े गये थे. मगर ये बात चंद आंदोलन के भीतरी लोग जानते हैं कि सबसे ज्यादा बैरियर तोड़ने का संघर्ष मंगत जैसे किसानों का था, जो पंजाब हरियाणा की संयुक्त ताक़त के बगैर, बड़े बड़े नेताओं की अगुवाई के बिना, साढ़े चार सौ किलोमीटर तक तिगुने बैरियर-बॉर्डर तोड़ गाजीपुर पहुंचे थे. मंगत ने इन दस महीनों में घर नहीं देखा. पर उसका सारा समय गुजरात, मध्यप्रदेश, असाम, उड़ीसा, बंगाल, पंजाब इत्यादि में बीता.

अब ग्रह राज्य मंत्री ने सभाओं में मंगत का नाम लेकर लखीमपुर छोड़ यूपी से बाहर निकाल देने की धमकी दी. उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया. उनके स्कूल को तोड़ने की धमकी दी. FIR की गयी आखिर पुलिस महकमे के सबसे बड़े मालिक का दबाव था. खैर मंगत तो झुकना नहीं था, बस मंगत ने शांत रहते हुए अपने इलाके के किसानों को जागरूक किया. उसी हफ्ते वहां डिप्टी CM मौर्य का प्रोग्राम तय हो गया.

किसान जागरूक थे तो जो खट्टर के साथ कैमला में किया था, वही काम चंद जागरूक किसानों ने वहां कर दिया. गृहमंत्री के घर जाते डिप्टी CM को रोकना, हेलीकाप्टर ना उतरने देना किसानों की बड़ी जीत थी. ज़ाहिर है बाप केंद्रीय मंत्री हो, दबंग रहा हो, पुलिस महकमे के मालिक हो और घर में चंद किसानों से बेइज्जत हो रहा हो तो बेटे मोनू मिश्रा का गुस्सा क्या होगा.

वहां झंडे दिखाने का प्रोग्राम खत्म हो चुका था. गुरुद्वारे से चाय आ गयी थी. ऐलान हुआ कि चाय पीकर किसान घर लौटे. मगर अभी मंत्री के बेटे का गुस्सा मंत्री के ही गले का फंदा बनना बाकी था. बेटा गाड़ियों के काफिले के साथ खुद थार चलाते हुए आंदोलनस्थल पर लौटा. पिस्तौल लोड कर फायर किया. किसानों को कुचला पर सड़क बेहद तंग होने के कारण दो गाड़ियां सड़क से उतर गई.

खुद किसानों ने मंत्री पुत्र के काफिले के एक गुंडे को भीड़ से बचाते हुए पुलिस को हैंड ओवर किया (उसकी वीडियो भी है), मगर वो भी एक खेत में मरा पाया गया. भीड़ ने गुस्से में जो किया वो नहीं होना चाहिए था, पर गोधरा का क्रिया-प्रतिक्रिया के तर्क सिर्फ संघियों का पेटेंट तो है नहीं, लिहाज़ा किसानों ने जो किया मैं उन्हें तब तक बरी करता हूं जब तक इसी आधार पर गुजरात के दंगाइयों को फांसी नहीं होती.

देश किसानों के साथ रहेगा या लाश पर कुदते राष्ट्रवादियों के साथ, समय तय करेगा. योगी प्रशासन कल छह बज़े से हथियार डाल चुका था. लखीमपुर के ही दो थानों की पुलिस वाले थाने छोड़ भागने की अपुष्ट खबरें कल रात हवा में थी. गांव के रास्तों, खेतों से वहां बिना इंटरनेट भी 40 हजार की भीड़ रात 9 बजे तक इकट्ठी हो चुकी थी. बस रात इंटरनेट के कारण विजुअल नहीं आ रहे थे.

रात 11 बजे तक योगी इतने दबाव में थे कि खुद किसी भी सूरत में मामला सुलझाने में लगे थे. जहां आंदोलन का सिर्फ बीज था वहां अब बरगद उगेगा. राज्यमंत्री के राजनीतिक भविष्य पर उसके गुस्से का ग्रहण लग चुका है. चुनावी हार पक्की है. मंगत भाई आज भी अपनी ज़मीन पर शांति के सहारे प्रतिरोध का प्रतीक बनकर खड़ा है.

अब बात इज्जत की. खट्टर ने जो 500-700 लठैतों का गैंग बनाकर किसानों के साथ भिड़ने की अपील की है, उसकी भर्त्सना, कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए, होगी भी. अगर मुख्यमंत्री ही गुंडागर्दी करवाएंगे तो आगे कुछ नहीं हो सकता. ऐसे में जरूरत थी कोई नेता असलियत में लीडर वाला काम करे.

गुरनाम के मुख्यमंत्री को सीधे सीधे लाठी ले के मैदान में दो दो हाथ करने के बयान का मैं समर्थन करता हूं. गुरनाम के आज तक के सौ खून माफ. शेर दिल जवाब दिया है. अपने साथियों की इज्जत के लिए नेता को मजबूत होना ही चाहिये. गुरनाम ज़िंदाबाद.

सब तैयार रहो, नेताओ को घेरों, मुद्दों पर अडिग रहो, आंदोलन सबसे नाजुक दौर में है. सुप्रीम कोर्ट पूछ रहा है आंदोलन क्यों हो रहा है, उसे भी जवाब देंगे. और लास्ट, राजेवाल की बात याद रखो कि आंदोलन शांतिमय रहेगा तो सरकार हारेगी.

– चौधरी राकेश टिकैत (साथी हरिश्चंद्र के सौजन्य से)

Read Also –

 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

समाज के पतन का प्रमाण है दैनिक जागरण

Next Post

पूरी तरह से कोई नहीं लौटता घर

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

पूरी तरह से कोई नहीं लौटता घर

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

लकड़बग्घा हंस रहा है…

July 25, 2024

नोम चोम्स्की के लिए अमेरिका

December 13, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.