आरक्षण पर मिश्रा जी (पंडित) और यादव जी (अहिर) की चर्चा को अवश्य ही पढ़े चाहे वो विरोधी हो या पक्षधर : एक दिन शाम के समय रेलवे स्टेशन पर हम टहल रहे थे ! मिश्रा जी (पंडित)और यादव जी(अहिर) आरक्षण पर नोक झोंक कर रहे थे ! हम भी पास में बैठकर उनकी चर्चा सुनने लगे ! मिश्रा जी (पंडित) - आरक्षण से अयोग्य लोग प्रशासन राजनीति में आ रहे हैं और देश का बंटाढार कर रहे हैं ! यादव जी - मिश्रा जी ! यदि आरक्षण से देश का बंटाढ़ार होता है तो देश में जब आरक्षण नहीं था, तब देश को पाकिस्तान बांग्लादेश और भारत तीन टुकड़ों में तोड़ने वाले तो आपके ही योग्य पूर्वज थे न जी ! खेलों में कोई आरक्षण नहीं है फिर भी आपकी प्रतिभाएं ओलम्पिक खेलों में भारत माता की नाक कटवा कर क्यों आती है जी ! मिश्रा जी (पंडित) - आरक्षण से मंदबुद्धि लोग बुद्धिमान लोगों के हक छीनते हैं ! हमारी प्रतिभाएं विदेश जा रही है जी ! यादव जी - यदि आरक्षण वाले सब मन्दबुद्धि हैं तो आपकी प्रतिभाऐं चड्डी बनियान का अविष्कार भी क्यों नहीं कर पाई ? टीवी रेडियो इंटरनेट रेल बिजली सभी अविष्कार विदेशियों ने क्यों किये ! आपकी प्रतिभाएं विदेश में गाय और सूअर खाने वालों के अंडर में नौकरी कर क्यों हिन्दू समाज और संस्कृति की नाक कटाने पर तुली हुई है ? मिश्रा जी (पंडित) - हमारे वेद शास्त्रों में सारा विज्ञान भरा पड़ा है जी ! अंग्रेजों ने सारे अविष्कार हमारे शास्त्रों से चुराए हैं ! यादव जी - चलो मान लो सारा ज्ञान वेदों और शास्त्रों में भरा पड़ा है तो आपके पूर्वज उन्हें पढ़ कर माचिस की तीलियाँ भी क्यों नहीं बना पाए जी, और आज दुनिया में लाखों लोग भूख से हर साल मर जाते हैं ! आप शास्त्र पढ़कर ऐसी मशीन क्यों नहीं बना लेते जिससे गेहूं चावल सब्जी खेतों में न उगाना पड़े डायरेक्ट मशीन से टपकने लग जाए और बिना झंझट के दुनिया का पेट भर जाए ! मिश्रा जी (पंडित) - आप तो नास्तिक जैसी बातें कर रहे हो ! आप मार्क्सवादी या अम्बेडकरवादी लगते हो या हिन्दू विरोधी हो जातिवादी हो आप जैसे लोग ही हिन्दू समाज को जाति और आरक्षण के नाम पर तोड़ रहे हैं ... ! यादव जी - मगर आरक्षण जाति वर्ण तो आपके पूर्वजों की देन हैं मिश्रा जी ! मिश्रा जी (पंडित) - वो कैसे जी ? यादव जी - योग्य हो या अयोग्य मंदिर का पुजारी या हिंदुओं का गुरु केवल ब्राह्मण ही बन सकता है पूजिये 'विप्र' ज्ञान गुण हीना ! शूद्र न गण गुण ज्ञान प्रवीना !! यह आरक्षण नहीं तो क्या है ? हमारे पूर्वजों को नाई, धोबी, तेली, तम्बोली, लुहार सुतार, सुनार, कुम्हार, चमार, बलाई, भंगी, भील आदि कथित नीच कामों में सदियों से धर्म कर्म परलोक सामाजिक मर्यादा और ईश्वर की आड़ में गुलामी करवाते रहे ! क्या यह आरक्षण नहीं था जी ? मिश्रा जी (पंडित) - अब पुरानी बातें छोड़ो जी ! अब दुनिया बदल गई है ! अब परीक्षा में अपना टेलेंट दिखाओ ! आरक्षण या पुरानी बातें रोने से काम नहीं चलेगा जी ! यादव जी - टेलेंट शम्बूक ने दिखाया था आपके पूर्वजों ने उसकी गर्दन काट दी ! टेलेंट एकलव्य ने दिखाया था आपके पूर्वजों ने जबरदस्ती उस बेचारे आदिवासी का अंगूठा काट दिया ! टेलेंट महात्मा फुले और माता सावित्री बाई ने दिखाया था, आपके पूर्वजों ने उन्हें पग-पग पर हर पल सताया था ! टेलेंट डॉ. अम्बेडकर ने दिखाया था आपके भाई-भतीजे आज भी उनकी मूर्तियां तोड़ रहे हैं ! जाति देखकर आप कॉपियां जांचते हो ! लिखित परीक्षा में अधिक नम्बर होने पर भी आप इंटरव्यू में जाति देखकर ओबीसी एससी-एसटी के बच्चों को कम नम्बर देते हो जी ! आपको टैलेंट या प्रतिभा नहीं, गुलाम और दलाल लोगों की जरूरत है, तभी आप बन्धुआ मजदूर को सरपंच या जनपद अध्यक्ष बना देते हो और उसकी आड़ में खूब माल झाड़ते हो ! मिश्रा जी (पंडित) - वो तब की बातें हैं आज 90 नम्बर वाला फेल हो रहा है और 70 नम्बर वाला अधिकारी, डॉक्टर बन रहे हैं, ये क्या भला करेंगे देश का ? सबको समानता मिलनी चाहिए. योग्यता और काबिलियत से नौकरी और एडमिशन मिलने चाहिए. ये तो संविधान ही गलत है. यादव जी - पहली बात जब डॉ अम्बेडकर ने कहा था कि देश के तमाम संसाधनों पर सभी लोगों का हक होना चाहिए, तब तो तुम्हारे ही पूर्वज इसके खिलाफ थे कि हमारे बराबर जमीन उनकी कैसे हो सकती है और जब उन्हें आरक्षण मिला अब उसे भी हड़पना या खत्म करने पर तुले हो ? हां होना चाहिए समान अधिकार सभी को लेकिन शिक्षा का स्तर एक कीजिये, कोई कॉन्वेंट से पढ़कर, ट्यूशन और काजू बादाम खाकर कम्पीटिशन करे और कोई सरकार स्कूल में अध्यापकों के आभाव में, तिरस्कार, और अपमान झेलकर पढ़े, जातीय घृणाओं और सामाजिक बाधाओं को पार करके यहाँ पहुंचे तो उसे कुछ रियायत मिलनी चाहिए. यदि फिर भी आप चाहते है समानता तो समाज में पहले समानता लाओ, शिक्षा में समानता लाओ. फिनिशिंग लाइन यदि एक है तो स्टार्टिंग लाइन भी एक करनी होगी. मिश्रा जी (पंडित) - ऐसी बातों से हिन्दू समाज कमजोर होता है ! अपनी फुट से मुसलमान हावी हो जाएंगे ! 20 साल बाद मुसलमानों का राज आ जाएगा ! तब न संविधान बचेगा न आरक्षण ! न हिन्दू समाज ! इस्लामी राज्य में फिर से सब गुलाम हो जाएंगे ! न दलित बचेगा ! न पिछड़ा ! न सवर्ण ! यादव जी - मुसलमानों का भारत में सन् 1206 से 1857 तक एकछत्र दिल्ली में राज रहा तब वे हमें नहीं खा पाए तो अब क्या खाएंगे जी ! अब तो हिंदुओं का राज है फिर हिन्दू निजीकरण के नाम पर हिंदुओं की लाखों नौकरियां क्यों खा रहा है ? ठेका प्रथा की आड़ में हिन्दू, हिन्दू को क्यों गुलाम बना रहा है जी ? अब तो चपरासी से लेकर राष्ट्रपति भवन तक हिन्दू बैठा है फिर हिन्दू, हिन्दू के अधिकार क्यों छीनने में लगा है मिश्रा जी ? मिश्रा जी (पंडित) - तुम राजनीति कर रहे हो ! समाज को तोड़ रहे हो ! लोगों को गुमराह कर रहे हो ! ऐसी बातों से हिन्दू समाज में अलगाववाद और जातिवाद फैलता है ! ऐसी बातें करने के आपको विदेशियों से पैसे मिलते होंगे ! ये मुसलमान-ईसाई-मार्क्सवादी आप जैसे लोगों को बहका कर राष्ट्रविरोधी बनाते रहते हैं ! इनके बहकावे में मत आओ जी ! हिन्दू एकता के लिए कुछ करो नहीं तो 20 साल बाद सब कुछ खत्म हो जाएगा ! यादव जी - हिन्दू एकता करना है तो चलो गाँव-गाँव लोगों के दिमाग से शास्त्रों, परम्पराओं, ईश्वर और परलोक की आड़ में बनाए गए जाति वर्ण ऊँच-नीच भेदभाव के विचारों और अन्धविशवासों का चौराहे पर जोरदार खण्डन करें ! हर हिन्दू से रोटी-बेटी व्यवहार कर हर हिन्दू को शिक्षा रोजगार देकर मजबूत बनाएं जी ! इसी में हिन्दू समाज का भला है मिश्रा जी ! मिश्रा जी (पंडित) - आप लोगों को ऐसे समझ में नहीं आएगी ! किसी दिन हमारे हाथों से ठुकोगे न ! तक सब समझ में आ जाएगी ! दो किताब क्या पढ़ ली ! तुम लोग हमें ज्ञान बांटने लगे हो ! तुम जैसे लोगों की वजह से धर्म नष्ट हो रहा है, घोर कलयुग आ गया है ! ब्राह्मण से तर्क-वितर्क-कुतर्क करते हो, नरक में सड़ोगे ! गुस्सा होकर मिश्रा जी (पंडित) उठकर चले गए. मगर हमारा आत्मविश्वास और मजबूत हो गया.
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