पार्टी को हुए नुकसान और अवसरवाद का उभार

भीषण फासीवादी राजकीय दमन और दक्षिणपंथी अवसरवादी - विघटनवादी और संशोधनवादी गद्दारों के भीतरघात के बाद जब से CP I(MAOIST) पार्टी को अभूतपूर्व नुकसान की स्थिति का सामना करना पड़ा है, तब से उत्तर और दक्षिण भारत में ढेर सारे पार्टी बुद्धिजीवियों और समर्थकों में अवसरवाद का खुले और छुपे रूप में अभूतपूर्व उभार हुआ है. 

माओवादी पार्टी के 2024 के पीबी रेजोल्यूशन में उत्तर भारत और तेलंगाना में दक्षिणपंथी भटकाव को चिन्हित किया गया है. देश में कई साथी पार्टी की कमजोरी का फायदा उठाते हुए मनमाना लाइन और राजनीतिक दिशा पेश कर रहे हैं. जैसे कि इन्होंने मान लिया है कि पार्टी अब खत्म हो गई है इसलिए अब जो मन में आए लिखा और बोला जा सकता है.

मानो वो अपनी अलग लाइन पेश करने के लिए पार्टी के कमजोर या खत्म होने का इंतजार कर रहे थे. उन्होंने एक बार भी यह कोशिश नहीं की कि पार्टी के बचे हुए शीर्ष, मध्यम और निचले स्तर के कैडरों व कमेटियों से कोऑर्डिनेट किया जाए और व्यापक अध्ययन और जांच पड़ताल के आधार पर डॉक्यूमेंट तैयार कर आंतरिक स्तर पर सही मैथड से टू लाइन स्ट्रगल चलाया जाए. पार्टी की कमियों कमजोरियों की रिव्यू की जाए. 

हमारा स्पष्ट मानना है कि लाख कमजोरियों के बावजूद अगर अवसरवादी, विघटनवादी, संशोधनवादी गद्दारों ने पार्टी के भीतर से गद्दारी न की होती तो पार्टी को अपने कोर एरिया में इतना बड़ा नुकसान न झेलना पड़ता. आज पार्टी के सामने सबसे बड़ा कार्यभार अवसरवाद - विघटनवाद - संशोधनवाद (OLR) से संघर्ष करना और पार्टी कोऑर्डिनेशन, पार्टी रिवाइवल और पार्टी बिल्डिंग का है. यह कार्यभार हर पार्टी कैडर व ईमानदार समर्थकों की आम समझदारी है.

पार्टी की कमजोरी और अलग राजनीतिक लाइन का सवाल

लेकिन K Murali और इनके जैसे अन्य (खासतौर से भूतपूर्व क्रांतिकारियों जिन्होंने अपना भूमिगत जीवन छोड़कर खुला जीवन अपना लिया है और फिर कभी भूमिगत जाने की सोचने की भी हिम्मत नहीं कर सके) पार्टी के तथाकथित समर्थक पार्टी के कमजोर होते ही अपनी डफली, अपना राग अलापने लगे.

कुछ अवसरवादी पार्टी लाइन से अलग लाइन लेते हुए कह रहे हैं कि दलाल नौकरशाह बुर्जुआ(CBB) प्रधान अंतर्विरोध है और नए नए अवसरवादी बने K Murali अपने लेख 'The Comprador Bureaucratic Bourgeoisie of India' में इशारा करते हैं कि साम्राज्यवाद, दलाल नौकरशाह बुर्जुआ (CBB) और सामंतवाद का हाइब्रिड आज का प्रधान अंतर्विरोध है. 

मुख्य सवाल यह है कि अगर आप की समझ पार्टी के कमजोर होते ही बदल गई (पार्टी सामंतवाद और व्यापक जनता के बीच के अंतर्विरोध को प्रधान अंतर्विरोध मानती है) तो आपने टू लाइन स्ट्रगल का इंटरनल मैथड क्यों नहीं अपनाया ? आपने रेवोल्यूशनरी पेशेंस (क्रांतिकारी धैर्य) का परिचय देने की जगह पार्टी कैडरों और सिंपेथाइजर्स (समर्थकों) को कन्फ्यूज (भ्रमित) करने की कोशिश क्यों की ? आपकी नई लाइन का जवाब अभी मै नहीं दे रहा हूं, उसका जवाब बाद में दिया जाएगा, धैर्य रखें.

पार्टी बिल्डिंग, अनुशासन और जनवादी केंद्रीयता

अभी मुख्य सवाल पार्टी बिल्डिंग, अनुशासन और जनवादी केंद्रीयता का है. अवसरवाद रूपी सांप वह मौकापरस्त होता है जो मौका पाते ही अपनों पर ही फन काढ़ लेता है. अपनी अलग लाइन पब्लिक में पेश करके K Murali ने CP I(Maoist) का नाम लेने का भी अधिकार खो दिया है. 

पार्टी का सच्चा वारिस सिर्फ वही है जो पार्टी की एकता कांग्रेस (2007) की लाइन, 2020-21 के प्रोडक्शन रिलेशन डॉक्यूमेंट और 2024 के पोलित ब्यूरो रेजोल्यूशन पर मजबूती से खड़ा है. अगर कोई बदलाव हो सकता है तो पार्टी के उचित कमेटी में बोलशेविक तरीके से इंटरनल टू लाइन स्ट्रगल और पार्टी की भावी कांग्रेस में ही हो सकता है.

NCC, सीमा आजाद और विश्वविजय के सवाल पर K Murali की अवस्थिति

उत्तर भारत तालमेल कमेटी (NCC) द्वारा तथ्यों के साथ सीमा आजाद और विश्वविजय जैसे गद्दारों के अवसरवाद, विघटनवाद और संशोधनवाद का पर्दाफाश करने के बावजूद और के मुरली को पर्सनली इसका पहले से रिपोर्ट होने के बावजूद उन्होंने सीमा और विश्वविजय का बचाव किया, उनके साथ 2.5 साल चले संघर्ष को नजरअंदाज करते हुए जुलाई के अपने फेसबुक लेख 'On Ideological Struggle' में उनसे अंतहीन संघर्ष चलाने की वकालत की और NCC की तुलना महादेव मुखर्जी से की.

इसके अलावा आपने 12 सितंबर के अपने फेसबुक लेख On Rectification में परोक्ष रूप से NCC की तुलना वांग मिंग और left Opportunists से कर डाली. 'रोग को खत्म करो और रोगी को बचा लो' का तरीका उनके लिए है जो पार्टी डिसिप्लिन, पार्टी भावना और डेमोक्रेटिक सेंट्रलिज्म को मानते हों. जो घोषित विघटनवादी और अवसरवादी हैं उनसे निर्मम संघर्ष ही हो सकता है.

K Murali की नई राजनीतिक लाइन और संशोधनवाद का सवाल

K Murali की नई राजनीतिक लाइन आने के बाद यह और स्पष्ट हो रहा है कि अपने उपरोक्त लेखों में आपने ऐसा क्यों लिखा क्योंकि आप भी कुछ भी बोलने, लिखने और करने की छूट लेना चाहते हैं.आपने जो नई राजनीतिक लाइन लिया है, वास्तव में वो पुरानी बोतल में नई शराब ही है. आप से पहले भी कुछ ML पार्टियां ये लाइन ले चुकी हैं. दरअसल इस नई लाइन के माध्यम से पूर्व की कई ML पार्टियों की तरह संशोधनवाद और संसदीय मार्ग के लिए K Murali रास्ता तैयार कर रहे हैं.

अवसरवाद और पार्टी की राजनीतिक विरासत

अवसरवाद का मतलब होता है मौकापरस्ती. K Murali @ Ajith और उनके देश के और खासकर दक्षिण के अन्य साथी यही कर रहे हैं. लेकिन जो मार्क्सवादी हैं उन पर आपके आभामंडल का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. चंद ढुलमुल तत्वों और अवसरवादियों के अलावा पूरा पार्टी कैडर और समर्थक पार्टी के बोलशेविक सिद्धांतों और 2007 की एकता कांग्रेस की लाइन के प्रति प्रतिबद्ध हैं.

  • रितेश विद्यार्थी