Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

भगत सिंह की विचारधारा ही शोषणमुक्त समाज बनायेगी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 25, 2021
in ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भगत सिंह की विचारधारा ही शोषणमुक्त समाज बनायेगी

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में 2 जून, 1931 को आयोजित ‘लीग अगेंस्ट इंपीरियलिज़्म’ की कार्यकारी समिति के एक राजनीतिक प्रस्ताव से यह निष्कर्ष निकाला गया, जो भारत के साथ काफी महत्वपूर्ण है. सबसे पहले, यह ‘लीग अगेंस्ट इंपीरियलिज्म’ नेहरु को उनके डोमिनियन स्टेटस को स्वीकार करने और भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को पूरा करने में विफल रहने के आधार पर निष्कासित करता है. यह सवाल आम तौर पर उन लोगों द्वारा चुप्पी में पारित किया गया था, जो सीपीएसयू की 20 वीं कांग्रेस की भावना में थे, नेहरू की राजनीति में प्रगतिशील विचार के तत्वों को अतिरंजित करना चाहते थे.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मूल्यांकन का एक प्रमुख उदाहरण सोवियत सिद्धांतकार आर. उल्यानोव्स्की[1] है. जीडीआर के इतिहासकार होर्स्ट क्रूगर ने नेहरू को लीग अगेंस्ट इंपीरियलिज्म से निष्कासित करने के कारणों का उल्लेख किया था : गांधी-इरविन संधि के कारण 5 अप्रैल 1931 तक भारतीय राष्ट्रीय सम्मेलन ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने और सविनय अवज्ञा अभियान को खत्म करने का वादा किया. क्रुगर साम्राज्यवाद के खिलाफ लीग के विषयवस्तु का वर्णन करने में साम्प्रदायिक होने के कारण विफल नहीं हुए.

दूसरे संकल्प में नेहरू के लोगों के लिए बुनियादी रूप से असहमति के संदर्भ में सुभाष चंद्र बोस के विचारों का मूल्यांकन करता है. इस लक्षण का वर्णन सीपीआई और सीपीआई (एम) की सुभाष चंद्र बोस के समकालीन सहानुभूतिपूर्ण समझ के विपरीत, हिटलर और तोजो के साथ सहयोग के बावजूद, स्पष्ट है.

तीसरा, यह संकल्प विशेष रुचि का है क्योंकि यह भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत के दो महीने बाद सामने आया. साम्राज्यवाद के विरुद्ध लीग ने ‘वीर भारतीय क्रांतिकारियों, भगत सिंह और उनके साथियों की स्मृति को सम्मानित किया, जिनकी ब्रिटिश साम्राज्यवाद द्वारा हत्या कर दी गई है, जबकि वे भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे.

लीग ने इस बात पर जोर दिया कि यह संघर्ष वीरता के व्यक्तिगत कृत्यों से भले ही विजयी नहीं हो सकता, लेकिन केवल कार्यकर्ताओं और किसानों, और क्रांतिकारी युवाओं की ‘सचेत सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से जरूर विजयी हो सकता है. ‘शहीदों के लिए उच्च प्रशंसा को सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता के राजनीतिक मूल्यांकन के साथ जोड़ा गया था.

[International Secretariat of the League Against Imperialism, Berlin, June, 1931.]

एक वेबसाइट ‘लोकवाणी’ भगत सिंह के कि शहादत पर अपने एक लेख में लिखता है – 23 मार्च को भगत सिंह की शहादत पर भाजपा की आईटीसेल के एक नौजवान कार्यकर्ता का ट्वीट देखा, जिसमें उस नौजवान ने उन्हें नमन करते हुए #RSS #IndianArmy #bhagatsingh ये तीन हैशटैग लगा रखे थे.

शायद उस नौजवान को यह नहीं पता नहीं होगा कि आरएसएस और उसकी पार्टी भाजपा ने हमेशा ही भगत सिंह के विचारों का क़त्ल किया है. एक एजेंडा के तहत ही उस नौजवान को भी बाकी सभी नौजवानों की तरह भगत सिंह को पूजना सिखाया गया है, पढ़ना नहीं. इसी वजह से उसे आरएसएस के उन मायाजालों के बारे में नहीं मालूम जो संघ परिवार ने क्रांतिकारियों के खिलाफ बुने हैं.

You might also like

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

आरएसएस के सरसंघचालक भगत सिंह के विचारों को दबाते थे

आरएसएस की स्थापना करने वाले डॉ. हेडगवार ने आज़ादी की लड़ाई के समय युवाओं को भगत सिंह के प्रभाव से बचाने के लिए खूब मेहनत की थी. उनके बाद दूसरे सरसंघचालक गुरु गोलवलकर ने भी भगत सिंह के आंदोलन को कोसा था. संघ के पास ऐसे साहित्य की भरमार है जो युवाओं को भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के बताए राह पर चलने से रोकता है. संघ के तीसरे प्रमुख बालासाहब देवरस ने खुद एक ऐसे किस्से के बारे में लिखा है, जिसमें डॉ. हेडगेवार ने उन्हें और दूसरे युवाओं को भगत सिंह और उनके विचारों के प्रभाव से बचाने के लिए प्रपंच रचा था.

बिना देरी किए पहले किस्सा पढ़िए :

‘कॉलेज की पढ़ाई के समय हम (युवा) सामान्यत: भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के आदर्शों से प्रभावित थे. कई बार मन में आता कि भगत सिंह का अनुकरण करते हुए हमें भी कोई न कोई बहादुरी का काम करना चाहिए. हम आरएसएस की तरफ कम ही आकर्षित थे क्योंकि वर्तमान राजनीति, क्रांति जैसी जो बातें युवाओं को आकर्षित करती हैं, पर संघ में कम ही चर्चा की जाती है.

जब भगत सिंह और उनके साथियों को फांसी दी गई थी, तब हम कुछ दोस्त इतने उत्साहित थे कि हमने साथ में कसम ली थी कि हम भी कुछ खतरनाक करेंगे और ऐसा करने के लिए घर से भागने का फैसला भी ले लिया था. पर ऐसे डॉक्टर जी (हेडगेवार) को बताए बिना घर से भागना हमें ठीक नहीं लग रहा था, तो हमने डॉक्टर जी को अपने निर्णय से अवगत कराने की सोची और उन्हें यह बताने की जिम्मेदारी दोस्तों ने मुझे सौंपी.

हम साथ में डॉक्टर जी के पास पहुंचे और बहुत साहस के साथ मैंने अपने विचार उनके सामने रखने शुरू किए. ये जानने के बाद इस योजना को रद्द करने और हमें संघ के काम की श्रेष्ठता बताने के लिए डॉक्टर जी ने हमारे साथ एक मीटिंग की. ये मीटिंग सात दिनों तक हुई और ये रात में भी दस बजे से तीन बजे तक हुआ करती थी. डॉक्टर जी के शानदार विचारों और बहुमूल्य नेतृत्व ने हमारे विचारों और जीवन के आदर्शों में आधारभूत परिवर्तन किया.

उस दिन से हमने ऐसे बिना सोचे-समझे योजनाएं बनाना बंद कर दीं. हमारे जीवन को नई दिशा मिली थी और हमने अपना दिमाग संघ के कामों में लगा दिया (देखें- स्मृतिकण- परम पूज्य डॉ. हेडगेवार के जीवन की विभिन्न घटनाओं का संकलन, आरएसएस प्रकाशन विभाग, नागपुर, 1962, पेज- 47-48).

भगतसिंह ‘लेनिन अमर रहे’ के नारे लगाते हैं और भाजपा वाले लेनिन की मूर्ति गिराते हैं

साल 2018, त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत के बाद बीजेपी समर्थकों ने साउथ त्रिपुरा में बुलडोज़र से व्लादिमीर लेनिन की मूर्ति को तोड़ दिया. मूर्ति गिरने के बाद भाजपा के नेता लेनिन के विचारों को भी निशाना बनाने लगे. अब इन मूर्खों को यह कौन समझाए कि लेनिन दुनिया भर के क्रांतिकारियों के प्रेरणा स्त्रोत थे और भगत सिंह भी उनके विचारों को मानते थे. भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु पर चल रहे मुक़दमे की एक सुनवाई 21 जनवरी को थी. इसी दिन लेनिन की पुण्यतिथि भी होती है.

उस समय के अख़बारों की रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भगत सिंह और उनके साथी 21 जनवरी, 1930 को अदालत में लाल रुमाल बांध कर हाजिर हुए थे. जैसे ही मजिस्ट्रेट ने अपना आसन ग्रहण किया उन्होंने ‘समाजवादी क्रान्ति जिन्दाबाद,’ ‘कम्युनिस्ट इंटरनेशनल जिन्दाबाद,’ ‘जनता जिन्दाबाद,’ ‘लेनिन का नाम अमर रहेगा,’ और ‘साम्राज्यवाद का नाश हो’ के नारे लगाये. इसके बाद भगत सिंह ने अदालत में तार का मजमून पढ़ा और मजिस्ट्रेट से इसे तीसरे इंटरनेशनल को भिजवाने का आग्रह किया.

तार का मजमून –

लेनिन दिवस के अवसर पर हम उन सभी को हार्दिक अभिनन्दन भेजते हैं जो महान लेनिन के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ भी कर रहे हैं. हम रूस द्वारा किये जा रहे महान प्रयोग की सफलता की कमाना करते हैं. सर्वहारा विजयी होगा. पूंजीवाद पराजित होगा. साम्राज्यवाद की मौत हो.

भगत सिंह (1931)

मोदी बनाम भगत सिंह

भगत सिंह ने कोर्ट में एक नारा लगाया था, ‘पूंजीवाद पराजित होगा.’ लेकिन हमारे प्रधानसेवक इसी नारे के उल्ट पूंजीपतियों की गोद में जाकर बैठ गए हैं. कभी उनका अरबों-खरबों का क़र्ज़ माफ़ करते हैं तो कभी बैंकों के कर्जदारों को देश से ही भगा देते हैं. मोदी और संघ परिवार धर्म और भगवान के नाम पर जनता को गुमराह करते हैं, उनको आपस में लड़ाते हैं, दंगे करवाते हैं और फिर वोटों की भीख भी मांगते हैं. इसी के उल्ट भगत सिंह ने कहा था-

इन ‘धर्मों’ ने हिन्दुस्तान का बेड़ा गर्क कर दिया है. और अभी पता नहीं कि यह धार्मिक दंगे भारतवर्ष का पीछा कब छोड़ेंगे. इन दंगों ने संसार की नज़रों में भारत को बदनाम कर दिया है, और हमने देखा है कि इस अन्धविश्वास के बहाव में सभी बह जाते हैं. इन दंगों के पीछे साम्प्रदायिक नेताओं और अख़बारों का हाथ है.

आज भी संघ-भाजपा जैसी साम्प्रदायिक शक्तियां और गोदी मीडिया भगतसिंह के विचारों पर पर्दा डालकर खुलेआम हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवाकर उनके विचारों का क़त्ल कर रहे हैं. युवा भी अब भगतसिंह को पढ़ने की बजाय उन्हें पूजने में लगे हुए हैं. ऐसे में क्रांतिकारियों के खिलाफ फैलाए गए दुष्प्रचार के जाल से लोगों को निकालने के लिए भाजपा और संघ की खिलाफत करने की सख्त जरूरत है.

संदर्भ :

1. ‘Jawaharlal Nehru’, in Rostislav Ulanovsky, ‘National Liberation, Essays on Theory and Practice’, Progress Publishers, Moscow, 1978, p. 253.

2. Horst Kruger, ‘Jawaharlal Nehru and the League Against Imperialism’, NMML, New Delhi, 1975, pp. 25-27.

3. Loc.cit. p. 24.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

‘यह होकर रहेगा’ – मेक्सिम गोर्की

Next Post

आरएसएस का बेशर्म राजनीतिक मुखौटा भाजपा और मोदी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

रोज़ गाय काटकर खाने वाला शैतान इजराइल दुनिया के पेट पर लात मारा है !

by ROHIT SHARMA
March 22, 2026
ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
Next Post

आरएसएस का बेशर्म राजनीतिक मुखौटा भाजपा और मोदी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कोरोना है तो है

May 5, 2021

मुल्क का सबसे निर्धन मुख्यमंत्री – कामरेड मानिक सरकार

April 30, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.