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भाजपा और कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 14, 2018
in ब्लॉग
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भाजपा और कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू

देश में हजारों पार्टियां हैं. खुद भाजपा दर्जनों पार्टियों के साथ सांठगांठ कर सरकार चला रही है और अपने हर पाप का ठिकरा कांग्रेस के सर फोड़ती आ रही है, मानों उसे सत्ता ही इसीलिए मिली है कि देश की जनता का भारी लूटपाट कर सके. जब 2014 के चुनाव के दौरान देश में कांग्रेस-मुक्त होने का नारा लगाया और कांग्रेस महज 44 सीटों पर आकर सिमट गई तब भाजपा ने असली मात खाई.

भाजपा-कांग्रेस का आपस में चुनावी सांठ-गांठ बारी-बारी से देश को लूटने का दीर्घकालीन योजना तब खटाई में पड़ गया जब अपने अल्पकाल में ही दिल्ली की छोटी सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी भाजपा, मोदी और कांग्रेस की आशा के विपरीत दिल्ली की सत्ता पर न केवल भारी मतों से विराजमान ही हुआ बल्कि देश की उम्मीदों पर भी खड़ी उतरी.

प्रधानमंत्री मोदी के भारी विरोध के बावजूद दिल्ली की सत्ता पर 67 सीटों के साथ एक बार फिर आम आदमी पार्टी के भारी बहुमत में आ जाने के बाद भाजपा-कांंग्रेंस समझ गई कि वह आम आदमी पार्टी को खत्म नहीं कर सकती बल्कि वह उसे ही मिटा देगी.

आम आदमी पार्टी के उत्थान से भयाक्रांत भाजपा समझ गई कि आम आदमी पार्टी का विरोध के करने वजाय देश में लूट-खसोट का राज कायम रखने के लिए कांग्रेस का जिन्दा रहना जरूरी है. अगर कांग्रेस को मिटा दिया गया तो भाजपा भी मिटा दी जायेगी. यही वजह है मरती हुई कांग्रेस को संजीवनी देने के लिए भाजपा ने अपना पैतरा बदला और पंजाब के विधानसभा चुनाव में भाजपा के कार्यकर्ता घूम-घूम कर लोगों को यह बताती रही कि ‘‘वह कांग्रेस को वोट दें, पर आम आदमी पार्टी को वोट न दें.’’

देश के तमाम संस्थानों चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट समेत को निरर्थक कर देने और चुनाव में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के माध्यम से वोट बटोरने और फर्जी मतदाताओं को तैयार करने के बावजूद भाजपा को अपनी जीत पर भरोसा नहीं हो रहा है क्योंकि देश की आम जनता भी उसी तेजी के साथ इसके विरूद्ध होती जा रही है और जागरूक भी. यही कारण है आज जब देश भर में आम आदमी पार्टी समेत छोटी पार्टियों की विश्वसनीयता बढ़ रही है और भाजपा की विश्वसनीयता आमजनों के बीच तेजी से खत्म हो रही है, तब भाजपा ने एक नया पैतरा निकाला है, जिसे वह सोशल मीडिया के माध्यम से आईटी सेल के भाजपाई द्वारा फैला रहे हैं, ‘‘भाजपा और कांग्रेस ही सच्ची पार्टी है, बांकी सब पार्टियां किसी न किसी का एजेंट है.’’

यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने मंचों से जब भी अपना मूंह खोलते हैं कांग्रेस के ही खिलाफ बोलते हैं. कांग्रेस के सिवा और वह किसी और का जिक्र नहीं करते. वह देश की ज्वलंत मुद्दों पर बात नहीं करते. देश की जनता की बढ़ती बदहाली, अशिक्षा, अचिकित्सा, बेकारी, मंहगाई, किसानों की आत्महत्या, छोटी-छोटी बच्चियों के साथ बढ़ती हैवानियत भाजपा और मोदी सरकार के लिए कोई मुद्दा ही नहीं है. नोटबंदी के नाम लाखों करोड़ रुपये का घोटाला और जीएसटी के नाम पर बर्बाद देश की अर्थव्यवस्था पर मोदी अपने मूंह सील लिए हैं. उन्होंने देश में फर्जी विमर्श खड़ा कर लोगों को उलझाने का प्रयास किया है. देश के सामने झूठा इतिहास रखकर प्रधानमंत्री पद की गरिमा को हास्यास्पद बनाने का अपराध किया है. मोदी चाहते हैं कि जनता इतिहास भूलकर भाजपा आई टी सेल की व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी द्वरा फैलाये जा रहे बकवास को इतिहास मानें.

कांग्रेस-भाजपा दोनों मिलकर देश को लगातार लूटने और एक-दूसरे को बचाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. दोनों ही पार्टियों के नेता, विधायक, सांसद एक दूसरे में आराम से चले जाते हैं और चले आते हैं.  देश की जनता के सामने इस दोनों पार्टियों की पोल-पट्टी पूरी तरह खुल चुकी है. देश की जनता जान चुकी है कि जब मोदी 70 साल की बदहाली का जिक्र करते हैं तब वह यह भी साफ कर देते हैं कि इन 70 सालों में देश की जनता की बदहाली का कारण कांग्रेस और भाजपा दोनों है, जो बारी-बारी से चुनाव के बहाने जनता को झांसा देकर सत्ता हासिल करती है, और एक-दूसरे को बचाते हुए दोनों हाथों से जनता को लूटती है.

भाजपा-कांग्रेस लूट के इस खेल को समाप्त करना नहीं चाहती है इसीलिए देश की अन्य छोटी पार्टियों को या तो खुद में मिलाकर भ्रष्ट बना देती है अथवा उसे खत्म कर डालने का प्रयास करती है. अब जब कांग्रेस-भाजपा के बाद देश में सबसे बड़ी और आम आदमी के भरोसे पर खड़ी उतरने वाली आम आदमी पार्टी उभरी है, जिसे भाजपा-कांग्रेस मिलकर न तो भ्रष्ट बना पा रही है और न ही उसे मिटा पा रही है, तब उसका यह नया पैतरा कि भाजपा और कांग्रेस ही सच्ची पार्टी है, बांकी सब पार्टियां किसी न किसी का एजेंट है, भाजपा के आई टी सेल का यह कुप्रचार इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भाजपा और कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं कि, वह आम आदमी पार्टी की ईमानदार जनपक्षी नीतियों से किस कदर भयाक्रांत है.

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Comments 4

  1. Com Naveen says:
    8 years ago

    यह बहुत संकीर्ण विश्लेषण है।आज की भाजपा जो पूर्णतः आरएसएस के फासीवादी एजेंडा को लागू कर रही है।भाजपा कांग्रेस या किसी भी अन्य पार्टी जो संविधान द्वारा दिए गए चौहद्दी में या संविधान की व्याख्या में छूट लेती हुई उसकी संभावनाओं तक पर खेलती हैं (दरअसल ये भी संविधान का आधार ही लेना है) से भिन्न है।भाजपा संविधान व लोकतंत्र के लिए खतरा है और भीड़तंत्र के मातहत लोकतंत्र को ले आने की साजिश रच रही है।जिसमें बहुसंख्यक समुदाय व उसका वर्चस्वशाली कोर(ब्राह्मणवाद) , पितृसत्ता सभी भयानक तरीके से तमाम (सामाजिक/सांस्कृतिक भी )संस्थाओं पर काबिज हो जाएंगे।
    दूसरे कंपनी-राज चलाने के लिए तमाम नियमों को ताख पर रखकर क्रोनी पूंजीवाद का संचालन।
    इतिहास को तोड़फोड़ कर दीर्घकालिक कब्जे की साजिश।
    ये सब भाजपा को किसी भी अन्य पार्टी से अलग करती है।
    आज की तारीख में समान दूरी का तर्क या एक सिक्के का दो पहलू जैसा तर्क फासीवाद को छूट देना होगा।
    बौद्धिक आनंद से बाहर आना होगा ।भाजपा के पक्ष मे जाता कोई तर्क बौद्धिक होने का आनंद प्रदान कर सकता है लेकिन भारतीय जनता पर थोपे गए भयानक दूःस्वप्न के प्रति भारी संवेदनहीनता होगी।

    Reply
  2. Com Naveen says:
    8 years ago

    अंतिम वाक्य ऐसे कर लें – भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी का तर्क या आज के फासीवाद के बावजूद अकेले राह चलने की जिद (जो भाजपा के पक्ष में जाएगा) यह बौद्धिक आनंद प्रदान कर सकता है लेकिन भारतीय जनता को जो इस भयानक दूःस्वप्न से निजात चाहिए , उसके प्रति असंवेदनशील होना होगा।

    Reply
  3. Kaushal says:
    8 years ago

    👍👍👍👍
    वर्तमान परिस्थितियों और फ़ासीवादी आतंक के चौहद्दी पर खड़े आ धमकने पर राजनैतिक विश्लेषण बड़ी सावधानी से करने की ज़रूरत है। बेशक कांग्रेस के ढीले-ढाले लिबरल पुंजीवादी और सॉफ्ट फ़ासीवादी चरित्र ने ही आज एग्रेसिव धर्मान्ध फ़ासीवाद को मज़बूत होने का मौक़ा दिया, लेकिन समझने की ज़रूरत होगी कि आपके सामने लड़ने के लिये कैसा दुश्मन चाहिये।

    Reply
  4. Sakal Thakur says:
    8 years ago

    भाजपा के चार साल के शासन का अगर मुल्यान्कन करे देश की सारी संस्थाओं चुनाव आयोग न्यायपालिका शिक्षा आदि का संघीकरण साथ ही संविधान को बदलने क्या फासीवाद के लक्षण नहीं मुख्य बीजेपी का खतरा है कान्ग्रेस का नही

    Reply

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