Monday, June 8, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कोरोना बनाम फनफनाती हिन्दू संस्कृति

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 22, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कोरोना बनाम फनफनाती हिन्दू संस्कृति

हम हिंदुस्तानी और उनमें भी विशेषकर हिंदुत्ववादी कुछ बातें पक्के तौर पर जानते हैं. पहली यह कि भारत कभी जगद्गुरु था और मोदीजी उसे फिर से जगद्गुरु बनाने वाले हैं. कोरोना गया और भारत जगद्गुरु बना. दूसरी बात पहले से जुड़ी हुई है कि हिंदू संस्कृति महान थी, महान है और युगों-युगों तक यही महान रहनेवाली है, बाकी सब धूल चाटने में व्यस्त हो जाएंंगी.

You might also like

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

इस संस्कृति के आगे दुनिया का कोई संस्कृति टिक नहीं पाएगी. चाहे तो कुश्ती लड़ाकर देख ले ! तीसरी बात यह कि भारत का हर आदमी, बच्चा-बच्चा तक डाक्टर, वैद्य, हकीम, होम्योपैथ, तंत्र-मंत्र, गंडा-ताबीज एक्सपर्ट है. हमारे पास आनेवाली हर समस्या, हर रोग, हर महामारी का रामबाण इलाज है. अमेरिका-यूरोप-चीन सब हमारे आगे मूरख साबित हो चुके हैं. बस घोषणा होना बाकी है.

पंडित जी मुहूर्त निकाल रहे हैं. एक दिन ये सब हमारी संस्कृति का डंका बजाएंंगे और ओरीजनल डंका हमीं उन्हें एक्सपोर्ट करेंगे. हम चीन को डंका बनाकर बेचने नहीं देंगे. वह ज्यादा बदमाशी करेगा तो हम दुनिया भर में मुफ्त में डंके बंटवा देंगे. भारत सरकार के पास इसके लिए पर्याप्त धन है.

http://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2020/03/VID-20200316-WA0041.mp4

कोरोना को हम एक छोटे से उदाहरण के रूप में लेते हैं. हम सदियों से जानते हैं कि हर शहर, हर गांंव, हर गली में अगर यज्ञ किए जाएंं तो उसके पवित्र धुंंए से कोरोना मुआ लंगोटी छोड़कर भाग जाएगा. फिर साला पलटकर कोरोना क्या उसका बाप, उसके परदादा का परदादा भी आने की हिम्मत नहीं करेगा. हमसे पनाह मांंगेगा. अपनी जूतियांं हमारे सामने रगड़ेगा.

दुर्भाग्य से मुझे कुछ ऐसे अखबार पढ़ने की लत-सी लग चुकी है, जिनमें कोरोना भगाने में यज्ञ-हवन, पूजा-पाठ आदि के अभूतपूर्व योगदान की चर्चा नहीं होती. हारकर ज्ञानवर्द्धन के लिए मुझे गूगल देवता की शरण लेनी पड़ी. उन्होंने आश्वास्त किया कि बेटा, परेशान मत हो. देश सही दिशा में जा रहा है. देशभर में कोरोना भगाओ यज्ञ इतनी बड़ी तादाद में हो रहे हैं कि पूरी सूची अगर मैंंने तुझे थमा दी तो तेरे होश उड़ जाएंंगे और उड़े तो फिर उड़े, वापिस पिंजरे में नहीं आएंगे. एक बार सोच ले.

यह जानकार गहरा संतोष हुआ कि हिंदू संस्कृति हर महामारी, हर रोग का निवारण यज्ञ से करने की प्राचीन परंपरा नहीं भूली है. अनुमान लगाने के मामले में मैं बहुत कंजूस हूंं, मगर भारत भर में ऐसे दस हजार यज्ञ हुए होंगे. इससे इस संस्कृति के प्रति मेरी आस्था बहुत पुष्ट हुई, इतनी कि अजीर्ण होने लगा.

अजीर्ण के बावजूद यह जानकार तृप्ति मिली कि पूजा- पाठ, आरती, भगवती जागरण के भी अनगिनत आयोजन संपन्न हो रहे हैं. गोबर लेपन, गोमूत्र पीवन कार्यक्रम भी हजारों की संख्या में हो रहे हैं. इसके बावजूद किसी की हिंदू संस्कृति में आस्था प्रबल न हो तो ऐसे मूर्ख का भगवान भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

मैं इस अवसर पर हिंदू संस्कृति के प्रचार-प्रसार में विशेषकर व्हाट्सएप के महती योगदान को भूल जाऊंं तो मेरे जैसा अधम मनुष्य दूसरा न होगा, जबकि मैं चाहता हूंं कि यह गौरव अकेले मैं क्यों प्राप्त न करूंं ! इस मामले में मैं कतई स्वार्थी नहीं हूंं. मेरे चरित्र पर ऐसे मामलों में स्वार्थी होने का दाग कोई नहीं लगा सकता.

मुझे दूसरों के व्हाट्सएप से ज्ञात हुआ कि हमारी महान संस्कृति ने हजारों वर्षों पहले यह सिखाया था कि हिंदुओं, तुम दूसरों को नमस्कार किया करो. आज पता चल रहा है कि उन्होंने कितनी वैज्ञानिक बात कही थी. उन्हें मालूम था कि 2019-20 में कोरोना आएगा और तब दुनिया को इस संस्कृति की महानता से अभिभूत होने का सौभाग्य प्राप्त होगा. देखो आज पूरी दुनिया नमस्कार कर रही है !

यहांं तक कि व्हाट्सएप ज्ञान से परिपूर्ण उन ज्ञानी मैडम से स्वयं ट्रंप ने सपने में आकर नमस्कार किया. वे यह देखकर भावविभोर हो गईं. इस अवस्था में वह अपने ससुर समकक्ष ट्रंप के पैर छूने वाली थीं कि कोरोना ने उन्हें बरज दिया. तब विभोरावस्था में उन्होंने ट्रंप का नमस्कार इतनी देर तक किया कि वह सिर स्पर्श करके सौभाग्यवती कहने वाला था कि ये अचकचा कर पीछे हट गईं.

इससे हताश होकर उसे वापिस व्हाइट हाउस जाना पड़ा. वहांं से उसने हाथ हिलाकर मैडम को अभिवादन किया. उन्होंने उसे व्हाट्सएप मैसेज भेजा कि ट्रंप जी धन्यवाद. अगर आपको कोरोना हो जाए तो शरीर पर गोबर लपेट लेना और दिन में दस बार गोमूत्र पिया करना. गारंटी से ठीक हो जाओगे. यह बात अपने देशवासियों को भी बता देना, कोरोना मंगलयान की गति से छूमंतर हो जाएगा और तुम लोग ये रूम स्प्रे, बाडी स्प्रे आदि सब क्या करते रहते हो ?

कुछ अकल भी है कि नहीं. जिस धरती पर जगद्गुरू भारत निवास करता हो, हिंदू संस्कृति दनदनाती-फनफनाती-सनसनाती घूम रही हो, वहांं तुम लोग कपूर, लोभान, अगरबत्ती का इस्तेमाल क्यों नहीं करते ?

फास्ट फूड छोड़ो, शाकाहारी सादा भोजन करो और मेरी तरह उच्च विचार रखना सीखो. खुद नहीं सीख सकते तो तुम लोगों को हिंदी में शिक्षित करने के लिए मुझे स्वयं अमेरिका आना पड़ेगा. तुम वीजा तैयार रखो, मैं पासपोर्ट का आवेदन करनेवाली हूंं.

इधर पासपोर्ट तैयार होता है, उधर मैं नरेन्द्र मोदी, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी सबको ठीक करके आती हूंं. इन्होंने कोरोना भगाने के लिए एक बार भी यज्ञ-हवन, भजन-कीर्तन, भगवती जागरण, ताबीज आदि की महत्ता पर प्रकाश नहीं डाला. पहले इनके अज्ञान का अंधेरा दूर करूंंगी, तब तक पासपोर्ट बन जाएगा और वीसा तो तुम खैर तैयार रखोगे ही. तब तक के लिए नमस्कार.

  • विष्णु नागर

Read Also –

कोरोना : महामारी अथवा साज़िश, एक पड़ताल
कोरोना संकट : मोर्चे पर उपेक्षित सरकारी मेडिकल सिस्टम ही
मोदी, कोरोना वायरस और देश की अर्थव्यवस्था

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

कोरोना : महामारी अथवा साज़िश, एक पड़ताल

Next Post

कोरोना व जनता कर्फ्यू तथा लॉक डाउन की हकीकत

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

by ROHIT SHARMA
May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

by ROHIT SHARMA
May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

कोरोना व जनता कर्फ्यू तथा लॉक डाउन की हकीकत

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

खाद्यान्न संकट के नाम पर जीएम बीजों को अनुमति देने की तैयारी

August 27, 2020

आइये जानते हैं पाकिस्तानी जासूस सीमा 007 की कहानी !

July 19, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026
Uncategorized

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

May 30, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ममता बनर्जी वही काट रही है जो उसने तीन दशकों में बोया था…

May 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 7, 2026

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 7, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.