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गैर-राजनैतिक व्यक्ति घोर राजनैतिक स्वार्थी, चालाक और डरपोक व्यक्ति हैं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 11, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
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गैर-राजनैतिक व्यक्ति घोर राजनैतिक स्वार्थी, चालाक और डरपोक व्यक्ति हैं

हिमांशु कुमार, सामाजिक कार्यकर्त्ताहिमांशु कुमार, गांधीवादी कार्यकर्त्ता

आप का कहना है कि आप कोई राजनैतिक व्यक्ति नहीं हैं. आप के लिए सभी पार्टियां एक जैसी हैं और आप एक अराजनैतिक व्यक्ति हैं लेकिन आप देशप्रेमी हैं. आप सरकार का समर्थन करते हैं. आप अपनी सेना और पुलिस का भी पूरा समर्थन करते हैं. आप दलितों पर होने वाले अन्याय से इसलिए प्रभावित नहीं होते क्योंकि आप जात-पात को नहीं मानते. आप आदिवासियों के साथ होने वाली हिंसा पर इसलिए ध्यान नहीं देते क्योंकि आदिवासी नक्सलवादियों को समर्थन देते हैं, इसलिए पुलिस उन्हें मारती है. आपको मुसलमानों के साथ होने वाले अन्याय से कोई परेशानी इसलिए नहीं होती क्योंकि आप साम्प्रदायिक भी नहीं हैं.

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आपका कहना है कि आप गैर-राजनैतिक व्यक्ति है. आपको राजनीति में कोई रुची नहीं है लेकिन आप असल में झूठ बोल रहे हैं. आपका यह कहना कि आपकी कोई राजनीति नहीं है. यही आपकी सबसे बड़ी राजनीति है. असल में आपको राजनीति में भाग लेनी की ज़रूरत इसलिए नहीं है क्योंकि राजनीति इस समय देश में जो कुछ कर रही है, आप उसके कारण बड़े आराम मे हैं. ध्यान से देखिये अपने आप को.

आपके पास एक नौकरी है. आप एक मजदूर या किसान से कई गुना कम काम करते हैं लेकिन आपको कई गुना ज़्यादा रूपये मिलते हैं. आपकी बिजली के लिए आदिवासी का घर तोडा जाता है. आपके मकान में लगे सीमेंट के लिए कई गाँव के लोग अस्थमा से खांस कर दम तोड़ते हैं. आपके लोहे के लिए कई नदियाँ लाल गाद से भर जाती है, उसमें फंस कर कई हज़ार जानवर मर जाते हैं. कई किसान बरबाद हो जाते हैं. आपके घर में लगे दरवाजों और फर्नीचर के लिए कितने ही जंगल काट डाले गए. विरोध करने वाले आदिवासी परिवारों को जेलों में ठूंस दिया गया. आप जिस कंपनी में काम करते हैं, उसके लिए कच्चे माल के लिए कितने ही लोगों की ज़मीनों को छीनने के लिए पुलिस नें विरोध करने वाली आदिवासी महिलाओं से बलात्कार किया और आप कहते हैं कि आप गैर-राजनैतिक हैं ?

झूठ सरासर झूठ, इस सब अन्याय होते हुए चुपचाप देखते रहना ही आपकी राजनीति है. आपकी राजनीती यह है कि जब तक आप खुद मजे उड़ा रहे हैं, तब तक आप चाहते हैं कि सब कुछ ऐसे ही चलता रहे लेकिन मजा उड़ने वाला आपका वर्ग बहुत छोटा है.

देश में ज्यादातर लोग वह है जो तकलीफ में है. जो तकलीफ में हैं वो चाहते है कि सब कुछ बदल जाए इसलिए ये लोग हड़ताल करते हैं. यह लोग लाइन में लग कर वोट डालते हैं. इस उम्मीद में कि शायद इस दफा कुछ बदल जाएगा. यही लोग हैं जो आदिवासी इलाकों में रैली करते हैं और पुलिस की गोलियों से मारे जाते हैं, जिनके मर जाने की खबर छापने के लिए आपके अखबारों को एक कोना भी नहीं मिलता. आप फिल्म ऐक्ट्रेस की नयी ड्रेस की पूरे पेज़ की फोटो देखते हैं. आप मुंह बिचका कर कहते हैं, ‘आई हेट पालिटिक्स.’

नहीं,आप पालिटिक्स से हेट नहीं करते. आप हकीकत से हेट करते हैं. आप इंसाफ का साथ देने से ड़रते हैं. आप सोचते हैं कि सही के हक़ में आवाज़ उठाऐंगे तो आपके संगी साथी, चोपड़ा, शर्मा पांडे अग्गरवाल साब, हंसी उडायेंगे और बोलेंगे कि पागल हो गए हो,या कम्युनिस्ट बन रहे हो क्या ? या कहेंगे कि नक्सलवादी बन रहे हो क्या ?

आप सोचते हैं कि कहीं सरकार या पुलिस नाराज़ ना हो जाए ? कहीं आपके बेटे बेटी की जाब पर कोई आंच ना आ जाए ? कहीं पुलिस आपके दरवाजे तक ना आ जाए, तो जनाब आपकी राजनीति, खुद की हैसियत, सुख सुविधा और रुतबा को बचाए रखने की राजनीति है. आप गैर राजनैतिक बिलकुल भी नहीं हैं लेकिन आप जैसों के लिए ही दिनकर नें बहुत पहले लिखा था, ‘ जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध .’ आपका तटस्थ होना ही आपकी चालकी से भरी राजनीति है.

ठीक इसी मुद्दे पर भगत सिंह ने वाइसराय को खत लिख कर कहा था कि ‘हम मानते हैं हम एक युद्ध में शामिल हैं, लेकिन यह युद्ध आपने शुरू किया है. आपकी पुलिस आपकी सेना रोज़ गरीबों की ज़मीनों और जीवन के साधनों पर हमला करके उन्हें छीन रही है. इस युद्ध में आपकी पूरी सरकारी मशीनरी, आपकी सेनाएं, हथियारों के भारी ज़खीरे शामिल हैं.आपने जनता के विरुद्ध एक युद्ध छेड़ा हुआ है. हम तो सिर्फ जनता के ऊपर छेड़े गए आपके इस युद्ध का जवाब दे रहे हैं इसलिए आप हमें युद्ध बंदी मानिये और हमें फांसी देने की बजाय हमें गोली से उड़ा दीजिए.’

आज भी एक युद्ध चल रहा है. भारतीय राज्य के सशस्त्र दस्ते आदिवासी इलाकों में जनता के विरुद्ध एक युद्ध कर रहे हैं. आपके फेवरिट उद्योगपतियों के कारखानों के लिए लोहा, कोयला, सोना, पानी, ज़मीनें, जंगल पर कब्जा करने के लिए, आपके फेवरिट नेता फौजों को देश के किसानों, आदिवासियों को मार कर ज़मीनों पर कब्ज़ा करने का हुक्म दे रहे हैं.

आपके फेवरिट सुपर स्टार इस युद्ध से आपका ध्यान हटाने के लिए आपका दिल बहला रहे हैं,  ठीक इसी समय आपके फर्ज़ी धर्मगुरु आपको मन की शांती के झूठे नुस्खे दे रहे हैं. आपके पुरस्कार लोलुप कवि और साहित्यकार फर्ज़ी और मनगढंत विषयों पर खोखला साहित्य का कचरा आपको परोस रहे हैं और आप कहते हैं आपको इस अब से कोई लेना देना नहीं है. आप कहते है कि आप गैर-राजनैतिक हैं. बिलकुल झूठ. आप घोर राजनैतिक स्वार्थी, चालाक और डरपोक व्यक्ति हैं.

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