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केजरीवाल के धरने से नंगा होता मोदी का बर्बर चेहरा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 17, 2018
in ब्लॉग
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3.2k
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पिछले एक सप्ताह से जारी धरना

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भारी वोटों से चुनी हुई दिल्ली सरकार का नौकरशाह उप-राज्यपाल अनिल बैजल के सामने महज मिलने के लिए गिड़गिड़ाना और नौकरशाह अनिल बैजल का हठपूर्वक नहीं मिलना, संविधान की लोकतांत्रिक अवधारणा पर सीधा प्रहार है. दिल्ली में जारी यह प्रकरण दिन की उजाले की तरह यह भी दिखाता है कि जनता के टैक्स के पैसों पर पलने वाला यह नौकरशाह किस हद तक पतित हो सकता है ! जब वह एक चुनी हुई सरकार को अपने जूते के नोंक पर रख सकता है, तब वह आमजनता से किस कदर क्रूरता से पेश आता है, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती.

देश के संविधान को अपने जूते के नोंंक पर रखता यह नौकरशाह और उसके संरक्षक प्रधानमंत्री मोदी जब खुलेआम दिल्ली के जनता के निर्वाचित प्रतिनिधियों को धता बता कर नीति आयोग के मुख्यमंत्रियों के स्तर की बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री को बुलाने के बजाय दलाल नौकरशाह मोधुल कुत्ता अनिल बैजल को बुला कर अपना मंशा साफ कर दिया है कि “नौकरशाह ही शासक है, जिसकी जनता के प्रति कोई जवाबदेही नहीं है. चुनाव एक खेल है, जिसका कोई अर्थ नहीं.”

भारतीय संविधान की धज्जियां उघेड़ते नौकरशाह दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल जब देश के चार चुने हुए मुख्यमंत्रियों से मिलने से सीधा इंकार कर दिया, तब क्या यह माना जा सकता है कि उपराज्यपाल अनिल बैजल इतना शक्तिशाली है कि वह देश के चुने हुए चार-चार मुख्यमंत्रियों से मिलने से साफतौर पर इंकार कर दे ? चुनी हुई सरकार के मंत्रिमंडल से मिलने से साफतौर पर इंकार कर दे ? आखिर इस नौकरशाह को इतनी हिम्मत आई कहां से ?

निश्चित तौर पर उसे यह हिम्मत संविधान ने नहीं दिया है. उसे यह हिम्मत फासिस्ट ताकतों को मजबूती प्रदान करनेवाले प्रधानमंत्री पद पर विराजमान नरेन्द्र मोदी ने दिया है, जिसका एकमात्र लक्ष्य साम्राज्यवादियों की चाकरी करना और पूंजीपतियों का खजाना भरना है, इसके साथ ही देश में मनुस्मृति को लागू कर देश की विशाल आबादी को ब्राह्मणवादियों के कदमों तले रौंद डालना है.

अपनी ढीठता और अकर्मण्यता के लिए कुख्यात हो चुके नरेन्द्र मोदी ने देश की हरेक संस्थानों को तबाह कर डाला है, जिसपर संविधान ने लोकतंत्र को बचाए रखने का जवाबदेही सौंपा है.

अपने सैल्समैन के पीठ पर हाथ रखे मुकेश अंबानी

अरविंद केजरीवाल देश की संवैधानिक लोकतंत्रिक संस्थाओं को बचाए रखने का एक आखिरी दुर्ग है, जहां आम आदमी के हितार्थ नीतियां बनती है और उसकी मिशाल पेश करती है, जो अब तक किसी भी सरकार या संस्थानों ने ईमानदारी से नहीं किया है. आम आदमी के निजी दुःख-तकलीफों को दूर करने के शानदार प्रयास का नाम अरविन्द केजरीवाल है. अरविंद केजरीवाल को खत्म करने का अर्थ है देश की आम आदमी को गुलामी और संकटों के गहरे दलदल में धकेल देना. मोदी सरकार ठीक यही कर रही है.

अरविन्द केजरीवाल को खत्म करने के लिए जब कोई आपराधिक मामले नहीं मिलें तब आम आदमी का विरोधी केन्द्र की मोदी सरकार ने अपने “मोधुल कुत्ता” अनिल बैजल के माध्यम से तमाम नौकरशाहों को असहयोग का आदेश देकर केजरीवाल सरकार को पिछले 4 माह से ठप्प कर दिया ताकि आम आदमी के हितार्थ कोई काम दिल्ली सरकार न कर सके और निकम्मे मोदी सरकार के सामने जनता का कोई विकल्प शेष न रहे.

कहना न होगा एक अय्याश और बेवकूफ लंपट छात्र की तर्ज पर मोदी सरकार बजाय लंबी लकीर खींचने के वह विरोधियों के लकीरों को मिटा कर छोटा करने में यकीन रखता है. भ्रष्ट और अय्याश मोदी सरकार ठीक यही कर रही है. देश के आम आदमी को भ्रष्ट और अय्याश लंपट मोदी सरकार के विरुद्ध सवाल करना होगा और केजरीवाल सरकार को खत्म करने की घिनौनी हरकतों का भंडाफोड़ करना होगा. अरविन्द केजरीवाल का उपराज्यपाल के सामने सप्ताह भर से जारी धरना का हर पल मोदी सरकार और उसके मोधुल कुत्ता अनिल बैजल की नंगई को उजागर कर रहा है, जो मोदी सरकार पर भारी पड़ेगा.

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Comments 2

  1. S. Chatterjee says:
    8 years ago

    केजरीवाल का विरोध करते हुए मोदी सिर्फ़ अपनी ही क़ब्र खोद रहा है । कोई भी निरंकुशता चिरस्थायी नहीं होती।

    Reply
  2. Sakal Thakur says:
    8 years ago

    यह जरूरी है भाजपा की दादगिरि को परास्त करने के लिए

    Reply

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