Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

पेट्रोलियम बना जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने का यंत्र

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 31, 2018
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

पेट्रोलियम बना जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने का यंत्र

सत्ता में आने के पूर्व भाजपा के कई लुभावन नारों में एक प्रमुख नारा था – ‘अब न सहेंगे पेट्रोल-डीजल की मार, अबकी बार मोदी सरकार’. पिछली सरकार के कामकाज से असंतुष्ट जनता ने इनकी बातों को राहत के विकल्प के तौर पर देखा और इनकी बातों और इनके कमल पर मुहर लगा दी. लेकिन सत्ता में आतें ही मोदी सरकार ने अपने वादों को ‘जुमला’ कहना शुरू कर दिया. अपने 4 साल पूरे होने पर मोदी सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है लेकिन पेट्रोल-डीजल के मामले में चुप्पी साधे हुए है.

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

मनमोहन सरकार के समय कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल थी और उस समय पेट्रोल पर कुल 43 प्रतिशत टैक्स लगता था. मोदी सरकार के कार्यकाल में तो ज्यादा समय तक कच्चे तेल की कीमत घटती गई या स्थिर रही. जनवरी, 2016 ई. में तो कच्चे तेल की कीमत 28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. साफ है उस दौर में सरकार ने बहुत अच्छी कमाई की और चाहती तो इस गिरावट का फायदा जनता को दे सकती थी. जनता भी इसी आशा में थी. पर हुआ ठीक इसका उल्टा.

ज्यादा से ज्यादा कमाई करने के चलते सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद-शुल्क बढ़ा दिया. पिछले चार सालों में सरकार ने नौ बार पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया और सिर्फ एक बार इसमें कटौती की. परिणाम यह हुआ कि 2014-15 में मोदी सरकार को पेट्रोलियम सेक्टर से मिलने वाला राजस्व 3,32,620 करोड़ रूपये थो, जो 2016-17 में बढ़कर 5,24,304 करोड़ रूपये तक पहुंच गया. 2017-18 के पहले 6 महीनों में ही सरकार को पेट्रोलियम सेक्टर से मिलने वाला राजस्व 3,81,803 करोड़ रूपये पहुंच गया, जो कि 2014-15 के पूरे साल से ज्यादा है.

सरकार ने तेल को मोटी कमाई का बेहतरीन जरिया मान लिया है इसलिए इसे जीएसटी के दायरे से भी बाहर रखा है. हलांकि पेट्रोलियम और पेट्रो-उत्पादों को 1995 ई. के एक्ट की धारा-2 के तहत् आवश्यक वस्तुओं की सूची में शामिल किया गया है, पर सरकार की नीति देखिए – दिल्ली में पेट्रोल की रिफाइनरी लागत पर करीब सौ फीसदी तक और डीजल पर करीब 50 फीसदी तक टैक्स लिया जाता है.

मोदी सरकार की तरफ से कई मंत्री विकास कार्यों का हवाला देकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का औचित्य साबित करते रहते हैं किन्तु इससे अर्थव्यवस्था के बांकी क्षेत्र कितने प्रभावित होते हैं, इस प्रश्न पर बगलें झांकने लगते हैं.,

आज का दौर ‘पेट्रोल-डीजल बिन सब सून’ का दौर आ गया है. सरकारों का ध्यान केवल शहरों को चकाचौंध करने पर है. सरकारों के लिए विकास का मतलब शहरों में चमचमाती सड़कें, लक्जरी गाड़ियां, बड़े-बड़े मॉल हैं. इसलिए महानगरों को छोड़कर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का सर्वत्र अभाव है. इसलिए निजी वाहन लोगों की मजबूरी है. यही कारण है कि पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों के वाबजूद भी भारत में इसकी खपत दिन-व-दिन बढ़ती ही जा रही है. वैश्विक परिस्थितियां जिस तरह बदल रही है, उसके मद्देनजर भारत में पेट्रोल-डीजल क्रमशः 100 और 90 रूपये प्रति लीटर पहुंचने की आशंका निर्मूल नहीं है. इसके लिए सरकार के पास दो उपाय हैं. एक यह कि वह पेट्रोलियम पदार्थों की राशनिंग करें और दूसरा उक्त वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर घटाकर जनता को राहत दें. सरकार की मुश्किल यह है कि पहला काम अलोकप्रिय है, और दूसरा खजाने में कटौती.

हिन्दुस्तान के पड़ोसी छोटे-छोटे मुल्कों में यहां की तुलना में इनके दाम काफी कम है. पड़ोसी मुल्क नेपाल में भारत द्वारा पेट्रोलियम पदार्थ की आपूर्ति होती है. भारत-नेपाल सीमा के रक्सौल इंडियन ऑयल का एक बड़ा तेल डिपो है, जहां रेल के माध्यम से प्रतिदिन 300 से 400 तेल टैंकर नेपाल ऑयल निगम को जाती है और बिडंबना देखिए कि भारत से नेपाल जाकर वही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 15-17 रूपये प्रति लीटर सस्ता मिलता है. यह दर्शाता है कि हमारे देश में सरकार चाहे केन्द्र की तो हो या राज्य की, वह पेट्रोल-डीजल पर भारी भरकम कर लगाकर आम जनता का तेल निकाल रही है.

जीएसटी लागू होने के बाद भ्रम हुआ था कि सरकार पेट्रोलियम पदार्थों को उसके अन्तर्गत लाकर कुछ राहत प्रदान करेगी परन्तु केन्द्र सरकार की ढ़िलाई और राज्यों की रूसवाई ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया, जिससे सरकारी मुनाफाखोरी पूर्ववत् जारी रही. अब जबकि पानी गर्दन से ऊपर आने को है, आमजन को कमर कसकर तेल का पैसा पीकर सरकार के मोटे हुए गर्दन को पकड़कर उसे तेल पर लगे आवश्यक कर कटौती करने के लिए मजबूर करने की जरूरत है.

  • संजय श्याम

Read Also –

भारत की सम्प्रभुता आखिर कहां है ?
भारी महंगाई और पूंजीपतियों की ‘‘कठिन” ज़िन्दगी
बेरोजगारी और गरीबी का दंश झेलता भारत की विशाल आबादी

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

[ प्रतिभा एक डायरी ब्लॉग वेबसाईट है, जो अन्तराष्ट्रीय और स्थानीय दोनों ही स्तरों पर घट रही विभिन्न राजनैतिक घटनाओं पर अपना स्टैंड लेती है. प्रतिभा एक डायरी यह मानती है कि किसी भी घटित राजनैतिक घटनाओं का स्वरूप अन्तराष्ट्रीय होता है, और उसे समझने के लिए अन्तराष्ट्रीय स्तर पर देखना जरूरी है. प्रतिभा एक डायरी किसी भी रूप में निष्पक्ष साईट नहीं है. हम हमेशा ही देश की बहुतायत दुःखी, उत्पीड़ित, दलित, आदिवासियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों के पक्ष में आवाज बुलंद करते हैं और उनकी पक्षधारिता की खुली घोषणा करते हैं. ]

Tags: पेट्रोल-डीजल
Previous Post

गालीबाजों के मुखिया मोदी का सोशल मीडिया पर “ज्ञान”

Next Post

वरवर राव की गिरफ्तारी में दिखा हिंसक पुलिस का विद्रुप ब्राह्मणवादी चेहरा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

वरवर राव की गिरफ्तारी में दिखा हिंसक पुलिस का विद्रुप ब्राह्मणवादी चेहरा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

कायर सावरकर के माफीनामे की तुलना अब शिवाजी महाराज से

November 25, 2022

2021 भौतिकी नोबेल पुरस्कार : सुकोरो मनाबे , क्लाउस हैसलमेन तथा जिओर्जिओ परीसी

October 28, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.