Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

सांप्रदायिक राजनीति और इवीएम का खेल ख़त्म करने की ज़िम्मेदारी अब नीतीश पर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 11, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

सांप्रदायिक राजनीति और इवीएम का खेल ख़त्म करने की ज़िम्मेदारी अब नीतीश पर

 

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

Suboroto Chaterjeeसुब्रतो चटर्जी

भारत में सांप्रदायिक राजनीति और इवीएम के खेल ख़त्म करने की ज़िम्मेदारी अब नीतीश पर है. मेरे बहुत सारे महानुभाव मित्र, डाटा विशेषज्ञ और न्यूज़ चैनल वाले ग़लत साबित हुए. मैं भी ग़लत साबित हुआ. मेरे अनुमान से महागठबंधन को 170 से 180 सीटें आनी चाहिए थी. डाटा कुमारों के हिसाब से 136 से 148 तक. सारे अनुमान ग़लत हुए, कैसे ?

डाटा विश्लेषण के अनुसार जितनी सीटें महागठबंधन को आनी चाहिए उससे बहुत कम हैं, मेरे अनुमान से और भी कम. कैसे ?

मैंने तो ग्राउंड रिपोर्ट पर भरोसा किया. डाटा विशेषज्ञ आंंकड़ों पर. सब ग़लत और एक क्रिमिनल गिरोह सही. कैसे ? क्या बिहार की जनता सांप्रदायिक लाईन पर पूरी तरह से बंट गई है ? क्या बिहार की जनता ने मोदी भक्ति को ही अपना ध्येय मान चुकी है ? सवाल कई हैं.

इसकी पड़ताल के लिए आपको यह मान कर चलना होगा कि मोदी शाह की भाजपा के चरित्र का आंंकलन आपको क्रिमिनल लोगों के एक गिरोह की तरह करना होगा. अगर आप यह मान कर चलेंगे कि कोई भी संघी संविधान, क़ानून और राजनीतिक शुचिता में विश्वास करता है तो आप अव्वल दर्जे के मूर्ख हैं. ठीक उसी तरह, अगर आप बिहार की जनता को सिरे से सांप्रदायिक मान कर चलें तो भी आप अव्वल दर्जे के मूर्ख हैं.

फिर, भाजपा के इस प्रदर्शन का राज क्या है ? इवीएम मशीन. मैं शुरु से ही कहता रहा हूंं कि गुजरात से इवीएम मशीन लाने के साथ ही खेल शुरु हो गया था. पटना के ए एन कॉलेज के पास और सिवान में इवीएम लदे छ: ट्रक का पकड़ाना कोई संयोग नहीं था. दरअसल, सैकड़ों ऐसे ट्रकों पर जाली इवीएम मशीन ढोए गए. यह ज़मीनी हकीकत है, जिसे सिर्फ़ मूर्ख ही अनदेखी कर सकते हैं.

बंगाल के आसन्न चुनाव के मद्देनज़र क्रिमिनल मोदी की इमेज को बनाए रखने की चुनौती थी. अब नीतीश के सामने एक चुनौती है. नीतीश को मालूम है कि भाजपा ने उनकी पीठ पर छुरा मारा है. भाजपा शायद उनको मुख्यमंत्री भी बना दे, लेकिन, अपंग जदयू का कोई भला नहीं होने वाला. अपने मृत्यु काल में नीतीश अगर ४० विधायकों के साथ तेजस्वी का समर्थन करें तो शायद उनका पाप कुछ धुल जाए.

लेकिन, नीतीश ऐसा नहीं करेंगे. कारण ? कारण उनकी जाति है. कुर्सी खुरपी चलाता है, तलवार नहीं कि अपना हाथ काट कर गंगा में बहा देने का जज़्बा 75 साल उम्र में हो. सुनने में बुरा लगेगा, लेकिन सच यही है.

अंत में, मेरे सवर्ण कम्युनिस्ट मित्रों को एक सलाह. declassification उतना भी आसान नहीं है जितना कि भाषण देना. चारित्रिक दोष का निराकरण पीढ़ियां लील लेती हैं, ख़ासकर उन संस्कृतियों में जिसकी जड़ें सामंती हैं. इसलिए, फ़ासिस्ट क्रिमिनल लोगों से निर्णायक लड़ाई लड़ने में वे सर्वथा अनुपयुक्त हैं. सर्वहारा की सत्ता सर्वहारा ही स्थापित कर सकता है, दूसरा कोई नहीं, सवर्ण तो कदापि नहीं.

व्यक्तिगत रूप से मैं न चुनाव में विश्वास करता हूंं, न ही भारतीय संविधान में. जब कोई तथाकथित कम्युनिस्ट भारतीय संविधान की दुहाई देता है तो हंसी आती है.

अंत में, मध्यममार्गी राजनीति का अस्तित्व भी इवीएम की मौत में छुपी है. आप इसे मेरा अरण्य रोदन कह सकते हैं, मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, क्योंकि मेरा विश्वास चुनाव के मौजूदा स्वरूप पर है ही नहीं.

Read Also –

 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

बीजेपी को किन लोगों ने वोट किया ?

Next Post

कोठे ने भंडुवे को ज़मानत दी, ये कोई ख़बर है क्या ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

कोठे ने भंडुवे को ज़मानत दी, ये कोई ख़बर है क्या ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

एक केजरीवाल को मिटाने में पूरी सियासत नंगी हो गई

March 2, 2018

डार्विन, जिसने सारी पुरानी मान्यता को ध्वस्त कर दिया

December 6, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.