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सेना, अर्द्धसेना और पुलिस जवानों के नाम माओवादियों की अपील

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 11, 2018
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[ देश में गृहयुद्ध का माहौल बन चुका है. एक ओर अंबानी-अदानी की सेवा में चाकरी करते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की तमाम सम्पदा, संसाधन अंबानी-अदानी के चरणों में डाल चुका है. तकरीबन 14 लाख करोड़ से ज्यादा रूपया इन लुटेरों का माफ कर चुकी यह केन्द्र सरकार और ज्यादा पैसों के लिए आरबीआई को रोजाना धमका रही है. जनता की ओर से उठे विरोधों को सेना, अर्द्ध सैन्य बल और पुलिस जवानों के माध्यम से क्रूर दमन चलाया जा रहा है, जिसमें देश के बहुतायत दलित, पिछड़ा, आदिवासी, महिलायें, अल्पसंख्यक पीस रहे हैं.
देश की क्रांतिकारी जनता को माओवादी बताकर हत्या-बलात्कार का दमनचक्र चलाया जा रहा है. तात्पर्य यह कि अंबानी-अदानी की सेवा में तैनात यह नरेन्द्र मोदी की सरकार देश भर में देशवासियों के ही विरूद्ध देशवासियों को ही झोंक दिया है, ताकि वे कटमर कर खत्म हो जायें. वक्त के ऐसे दौर में हर बार की तरह इस बार भी देश की क्रांतिकारी जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे सीपीआई-माओवादी के बिहार-झारखण्ड स्पेशल एरिया कमिटी की ओर से सेना, अर्द्धसेना और पुलिस जवानों के नाम एक अपील जारी किया है, जिसके पर्चे का एक अंश हम यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं ताकि यह आम समाज के बीच बहस का बिन्दु बन सके और माओवादियों और पुलिस के बीच के हिंसक झड़पों पर विराम लगाया जा सके क्योंकि इन झड़पों में जो जन-धन की हानि होती है, वह राष्ट्र की हानि है. ]

सेना, अर्द्धसेना और पुलिस जवानों के नाम माओवादियों की अपील

विभिन्न बलों के जवानो, हम दोनों समूह आपस में लड़ रहे हैं. क्या कीजिएगा, दोनों की अपनी-अपनी मजबूरी-निगोड़ी ने ऐसी ही परिस्थिति ला दी है. आप अगर हम पर कहर न बरपाएंगे, न मारेंगे, न पिटेंगे, न गरियाएंगे, हत्या न करेंगे, हमारी मां-बहनों से छेड़खानी न करेंगे या सत्ता और वर्दी का रौब दिखाकर उनके साथ मुंह काला न करेंगे तो आपके अधिकारी – जो कि साम्राज्यवाद-सामंतवाद-दलाल नौकरशाह पूंजीपति की सेवा में आम जनता और राष्ट्रीयता की जनता पर दमन का हर हद को पार करने को कटिबद्ध हैं – भला वह आप पर प्रसन्न होकर आपका पीठ कैसे थपथपयेगा ? अथवा प्रोत्साहन, प्रमोशन भला कैसे और क्यों देगा ?

ठीक उसी प्रकार हम माओवादी क्रांतिकारी जो कि अपनी प्रिय मातृभूमि, आम जनता व श्रमजीवी जनगण और उत्पीड़ित राष्ट्रीयताओं की सेवा में पूर्ण समर्पित होकर देश की आजादी, जनता की स्वाधीनता और जन-जीवन में क्रांति लाने हेतु मृत्युंजयी होकर आपके मालिक साम्राज्यवाद-सामंतवाद-दलाल नौकरशाह पूंजीपति तथा उसकी राजनीतिक सत्ता को उखाड़ फेंककर नवजनवादी राजसत्ता मजदूर-किसान, मेहनतकश इंसान की राजनीतिक सत्ता स्थापित करने को कटिबद्ध हैं. ऐसी परिस्थिति में आपके मालिकों को और उनके सेवादास के बतौर आप से भी लड़ना हमारी बेबसी है.




उपरोक्त बातों से स्पष्ट है कि हम दोनों वर्ग भाई-बंधु के बीच लड़ाई तभी बंद होगी, जब तक आप मातृभूमि और सच्ची मानवता का मूल्य भेंट करके शासक वर्गों से अपनी जांबाजी का खिताब हासिल करने की वर्गीय बेइमानी की जगह बदलकर अपने वर्ग के प्रति पूरी इमानदारी के साथ जनक्रांति की सेवा में खुद को जोड़ देंगे अथवा हम ही अपना वर्ग व जनता के प्रति बेइमान बनकर चंद कागज के टुकड़ों के लिए अपनी कृति और अस्मत बेचकर आपके जैसा गुलामी स्वीकार कर लेंगे- जो असंभव है. यह तो हुई हम लोगों के बीच बात-चीत, जो बदस्तूर जारी रहेगी. क्योंकि आप जब नौकरी में हैं तो हमारे और आपके बीच जमीन-आसमान की दूरी दिखती है, लेकिन जब आप घर में होते हैं तो दोनों एक ही घर-आंगन अथवा गांव के भाई-बंधु रहते हैं.

दूसरी, एक बात आप से साझा करते हैं वह है आपके झारखंड राज्य के बड़े अधिकारियों में से एक आईजी (ऑपरेशन) आशीष बत्रा जो आपके पश्मिंचल के अधिकारी हैं, उसने 17 मई, 2018 को बोला, ‘‘माओवादी आत्मसमर्पण कर दें, नहीं तो मारे जाएंगे.’’ इसके पहले आपका डीजीपी डी. के. पांडे जो आपका सर्वोच्च अधिकारी है, वह लगातार बोलता रहा, ‘‘नक्सली आत्मसमर्पण कर दें, नहीं तो मरने के लिए तैयार रहें.’’ एक बार उसने ऐसा भी बोला, ‘‘फलां-फलां को नहीं मार लूंगा तो मैं टोपी नहीं पहनुंगा.’’ ‘‘फलां-फलां के सर में इतना गोली मारूंगा कि भेजा पहचान में नहीं आएगा.’’ उसके पहले झारखंड राज्य का मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती – जिसे एक भ्रष्ट अधिकारी के रूप में सुचिन्हितकर कोर्ट ने सजा दी थी – बोला था, ‘‘माओवादी आत्मसमर्पण कर दें, नहीं तो घोलटा देंगे.’’




वैसा ही बिहार के डीजीपी, आईजी, डीआईजी लगभग इसी तरह की बात करते हैं जैसाकि ऊपर दिखाया गया है. इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के आईजी शिवराम प्रसाद कल्लुरी के अनाप-सनाप वक्तव्य व कु-कृत्य तो जगजाहिर है. ऐसी बातें केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ, झारखंड का मुख्यमंत्री रघुवर दास, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह, बिहार के धुर्त मुख्यमंत्री ‘‘मुंह में राम बगल में छुरी’’ रखने वाले नीतिश कुमार भी बोलता है तथा सीआरपीएफ का डीजीपी भी यही बात बोलता है. लगता है सारे देश में बंदूक का शासन चलाने वाले ये सारे अधिकारी जमींदार या पूंजीपति घराने के हैं और विशुद्ध विदेशी नस्ल से पैदा हुए हैं.

जरा इन लोगों से पुछिए तो, ‘‘अरे अत्याचारियों, तुम लोग और तुम्हारे पिता, परपिता, छरपिता और उनके भी ऊपर वालों के पिता, परपिता, छरपिता लोग देशभक्तों, क्रांतिकारियों की हत्याएं ही तो करते रहे हैं, तभी तो तुम्हें यह ओहदा हासिल हुआ है.’’ पर, बता तो सही कि क्रांतिकारियों के बीच छुपे कुछ गद्दारों को छोड़कर क्या तुमने सच्चे क्रांतिकारियों को कभी मौत या कठिन प्रताड़नाओं के बल पर आत्मसर्पण करवाया है ? एक भी उदाहरण क्या ऐसा है ? एक भी उदाहरण तुम्हें ऐसा नहीं मिलेगा.




बहुत सालों से और खासकर विगत 9 सालों में तो तुम लोगों ने माओवादियों पर कहर-दर-कहर बरपा रहे हो तो आज इस धमकी से तुम क्या हासिल करना चाहते हो ? सुन ले, तुम्हारे दिन लदने वाले हैं और हम मृत्युंजयी देशभक्त, जन सेवक, जनदर्दी, कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों के दिन पलटने वाले हैं, तुम्हारे सारे अस्त्र-शस्त्र और मनोवैज्ञानिक हमले, एलआइसी पॉलिसी, ऑपरेशन ग्रीन हंट तथा ऑपरेशन ‘समाधान’ का कबाड़ा निकलने वाला है.

हो सकता है, तानाशाह नरेंद्र मोदी और उसके जैसे देशद्रोहियों को अमेरिका में संरक्षण प्राप्त हो जाय, लेकिन तुमलोगों का उतना भी औकात नहीं है कि वह अमेरिका तुम्हें भी पूछे. माओवादी भारत के हैं, और एक सच्चे देशभक्त क्रांतिकारी भी हैं और तुम्हें भी इसी देश में रहना है. ऐसी स्थिति में भाकपा (माओवादी) के नेतृत्व में जारी जनयुद्ध में शामिल जनता तुम जैसे देशद्रोहियों से चुन-चुन कर हिसाब लेगी, नहीं तो समय रहते चेत जा, अत्याचार व कुकर्म बंद कर, हमने तेरा सारा बवंडर झेल लिया है, तुम भी जनता का कोपभाजन बनने के लिए तत्पर रहना.




हमारे भाई-बंधु आपके लिए हमारा एक आह्नान है. आपका आंख-कान, दिमाग है और आप देख-सुन रहे हो और दिमाग के जरिए सोंच भी पा रहे हो कि देश में अमीर और गरीब के बीच खाई रोज दिन बढ़ते ही जा रही है. महंगाई और बेरोजगारी में भारी वृद्धि हुई है तथा हो रही है. मजदूर रोज दिन नौकरी खो रहे हैं, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, शिक्षा का व्यवसायीकरण व भगवाकरण के कारण गरीब घर के लड़का-लड़की शिक्षा से वंचित हो रहे हैं.

दलित आदिवासी, धार्मिक अल्पसंख्यक, ब्राह्मणीय हिन्दुत्व फासीवादी मोदी सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार के दमन अत्याचार का दंश झेल रहे हैं. प्रगतिशील बुद्धिजीवी, पत्रकार, साहित्यकार, कलाकार भी विभिन्न प्रकार के दबाव-धमकी, मार-पीट, गिरफ्तारी और ऐसा कि हत्या का दंश झेल रहे हैं. अतः आप सोचें कि आप अत्याचारियों के साथ रहेंगे या देश की 90 प्रतिशत जनता के साथ. बंदूक का निशाना साधने के लिए पूर्ववत् ही व्यवहार करेंगे या निशाना पूरी तरह विपरीत दिशा में साधेंगे. आप खुद सोचें और आम जनता के हित में निर्णय लें.




हमारे भाई-बंधु, अतिआवश्यक दो जरूरी बातें व एक आह्नान हमने आपसे किया है और आगे भी ऐसा सिलसिला जारी रहेगा. आप सिर्फ और सिर्फ अपने अंदर की मर चुकी मानवता का मुल्यांकन कर अवश्य देखने व सोचने का प्रयास करें.




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