Monday, September 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

भारत से समस्त मुसलमानों को 1947 में ही पाकिस्तान भेजने वाली बात भारत-द्रोह और राष्ट्रघात

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 22, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.4k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत से समस्त मुसलमानों को 1947 में ही पाकिस्तान भेजने वाली बात भारत-द्रोह और राष्ट्रघात

आलोक श्रीवास्तव

आरएसएस की शाखाओं, पुस्तकों और प्रचार सामग्रियों में पिछले 74 सालों में जो बातें सर्वाधिक दोहराई जाती रही हैं, उनमें से एक यह है कि जब विभाजन हुआ ही तो भारत से सारे मुसलमानों को पाकिस्तान क्यों नहीं भेजा गया ? वे भारत में क्यों रह गए ?

यह प्रश्न बेहूदा है परंतु हम इसके अन्य सभी आयामों को छोड़ कर सिर्फ एक तथ्य पर बात करते हैं कि क्या भारत राष्ट्र का विभाजन किसी संयुक्त परिवार का विभाजन था ? या किसी संपत्ति का विभाजन था, जिसे समग्रतः किया जाना था ?

You might also like

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

अगर हिंदुत्व की राजनीति के इस तर्क को मान भी लें तो फिर इस पूरे उपमहाद्वीप के विभाजन में हिंदू-मुस्लिम आबादी का संपूर्ण तबादला और इन दोनों समुदायों की आबादी के अनुपात में ही भूमि का भी बंटवारा होना चाहिए था, ऐसी स्थिति में भूमि बंटवारा का आंकड़ा यह होता –

  • विभाजन के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश का क्षेत्रफल था– 10.4 लाख वर्ग किलोमीटर
  • विभाजन के बाद भारत का क्षेत्रफल बचा – 32.87 लाख वर्ग किलोमीटर
  • विभाजन के बाद भारत की आबादी 37 करोड़
  • विभाजन के बाद पूर्वी व पश्चिमी पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़

अविभाजित भारत की कुल आबादी 57 करोड़ की 35 फीसदी मुस्लिम आबादी के लिए नया देश बना. इसका मतलब यह था कि देश की 35 फीसदी जमीन भी पाकिस्तान को जानी चाहिए थी, अर्थात 15 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक. पर पाकिस्तान और बांग्लादेश की कुल भूमि 10 लाख वर्ग किलोमीटर थी. अर्थात आबादी के हिसाब से 5 लाख वर्ग किलोमीटर जमीन कम गई थी.

अब इसी तर्क से भारत में रह गए मुसलमान भी यदि पाकिस्तान जाते तो भारत की वर्तमान भूमि का लगभग 10 लाख वर्ग किलोमीटर और पाकिस्तान में शामिल होता. पाकिस्तान व बांग्लादेश से भारत आने वाले हिंदुओं की संख्या से इस भूमि-अनुपात में मामूली-सा ही फर्क पड़ता. अर्थात हिंदुत्व की राजनीति का तर्क यह कहता है कि भारत का भूगोल और छोटा होता और अविभाजित पाकिस्तान का भूगोल भारत के भूगोल से थोड़ा ही कम होता.

अर्थात पाकिस्तान संसाधन, शक्ति, अर्थ-व्यवस्था, सेना सभी में भारत के लगभग बराबर होता और इस प्रस्तावित हिंदू राष्ट्र के लिए वह एक ऐसा संकट होता, जिससे वह सतत संघर्ष करता और दोनों देश अब तक तीन नहीं तीस युद्ध लड़ कर एक दूसरे को पूरी तरह खोखला और नष्ट कर चुके होते.

तो हिंदुत्व की राजनीति के महाविचारकों की देश और राष्ट्र की धारणा, इतिहास और अर्थव्यवस्था की समझ, विश्व राजनीति और भारत की चुनौतियों और राष्ट्र-निर्माण की समझ का स्तर यह है. हां, विभाजन नहीं होना चाहिए था, पर हुआ तो वह संपूर्ण होना चाहिए था, यह तर्क दरअसल ऊपर से भले हिंदू राष्ट्र का तर्क दिखता हो, पर यह इस समूचे उपमहाद्वीप के संपूर्ण विनाश का कुतर्क है.

और इसी संपूर्ण विभाजन के न होने से व्यथित हिंदुत्व की राजनीति भारत के मुस्लिम समुदाय के प्रति विद्वेष की पूरी एक राजनीति रचने में सफल हुई है. उसके अनुसार नेहरू और गांधी का मूल पाप यही है कि उन्होंने भारत के मुसलमानों को आश्वस्त किया था कि भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र रहेगा और वे यहां रहें. इसे ही व्यापक रूप से कांग्रेस का मुस्लिम तुष्टिकरण कहा जाता है.

1947 में भारत की आबादी उसमें मुस्लिम आबादी, पाकिस्तान की आबादी आदि के आंकड़ों पर अलग-अलग स्रोतों में भिन्नता दिख रही है. पर यहां हमारा मूल विषय आंकड़ों की सटीकता नहीं है, न ही वह मेरी विशेषज्ञता का क्षेत्र है.

मेरा मूल तर्क यह है भारत का संपूर्ण विभाजन – हिंदू-मुस्लिम आबादी के आधार पर किसी भी दिन संभव ही नहीं था. इसीकारण यह बात जिन्ना, मुस्लिम लीग, कांग्रेस सभी के सामने स्पष्ट था कि विभाजन का मतलब आबादी की अदला-बदली नहीं है, सिर्फ उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के मुस्लिम बहुल प्रांतों को पाकिस्तान बनना है.

दूसरी बात यदि किसी कारण से विभाजन का अर्थ यह निकलता कि भारत के सभी मुसलमानों को भारत से पाकिस्तान चले जाना है, तो इसका यह अर्थ भी निश्चित रूप से निकलता कि पाकिस्तान का भौगोलिक रूप वह कतई नहीं होता, जो विभाजन के बाद हुआ. वह कम से कम 5-10 लाख वर्ग किलोमीटर अधिक होता. पूरा बंगाल और पूरा पंजाब पाकिस्तान में जाता और अविभाजित पंजाब और अविभाजित बंगाल के सभी हिंदुओं को भारत आना पड़ता. उसी स्थिति में भारत के सभी मुसलमानों का पाकिस्तान जाना हो पाता. यह सब हालांकि कतई संभव नहीं था.

इसी कारण, जिन्ना और मुस्लिम लीग ने भी आबादी के अदला-बदली वाले विभाजन की मांग नहीं की थी और इसी कारण कांग्रेस और गांधी-नेहरू आदि ने भी किसी भी तरह की आबादी की अदला-बदली को गलत माना था. पर यही वह मूल बात है जिसे लेकर हिंदुत्ववादी राजनीति अपना दुष्प्रचार अभियान चलाती है और यह रटती है कि भारत से सभी मुसलमानों को पाकिस्तान बनने के बाद पाकिस्तान भेजा जाना चाहिए था.

इस आलेख का मूल तत्व यही है कि भारत के विभाजन को लेकर हिंदुत्ववादी राजनीति ने जितने भी और जिस भी तरह के दुष्प्रचारों को भारतीय हिंदू मध्यवर्ग के दिमागों में पिछले 74 सालों में उतारा है, वे तथ्य, इतिहास, आंकड़े सभी दृष्टि से गलत हैं और भारत-राष्ट्र के संपूर्ण विध्वंस की सामग्री हैं.

यदि किसी भी कारण से आबादी की संपूर्ण अदला-बदली की गई होती तो लाखों नहीं दसियों करोड़ लोग मारे जाते. पाकिस्तान भौगोलिक, आर्थिक, सैन्य रूप में भारत के लगभग बराबर होता. भारत में उस स्थिति में 1947 के बाद उग्र हिंदुत्व की सत्ता होती. भारत और पाकिस्तान को वहां की मुस्लिम राजनीति और यहां की हिंदू राजनीति आंतरिक रूप से घुन की तरह खा चुकी होती और बाह्य रूप से अब भी कहता हूं, कि दोनों देश तीन नहीं तीस युद्ध लड़ कर एक दूसरे को पूर्णतः ध्वस्त कर चुके होते.

अतः मूल बात यही है कि – भारत से समस्त मुसलमानों को 1947 में ही पाकिस्तान भेजने वाली बात भारत-द्रोह और राष्ट्रघात का सर्वोपरि तर्क है.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

आप नेता लुटेरे पूंजीपतियों को उलटा टांगने की बात क्यों नहीं करते ?

Next Post

यसीन मलिक : कश्मीरी राष्ट्रीयता के संघर्ष का लोकप्रिय चेहरा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

by ROHIT SHARMA
September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

by ROHIT SHARMA
September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

by ROHIT SHARMA
August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

by ROHIT SHARMA
August 27, 2026
Next Post

यसीन मलिक : कश्मीरी राष्ट्रीयता के संघर्ष का लोकप्रिय चेहरा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

गिरमिटिया : बिदेसिया हुए पुरखों की कथा – ‘कूली वूमन- द ओडिसी ऑफ़ इन्डेन्चर’

October 15, 2023

सियासी ठगों से सावधानी, सतर्कता और बचाव ही एकमात्र उपाय

May 27, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026
गेस्ट ब्लॉग

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

तौर-तरीकों को पकड़कर विघटनवाद के खिलाफ संघर्ष की सारवस्तु का गला घोटने के अवसरवादी-विघटनवादी इरादों का पर्दाफाश !

September 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

आत्मसमर्पण क्यों करते हैं क्रांतिकारी नेता ? 2019 के एक दस्तावेज में सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति की समझ

August 29, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत : अवसरवाद, परिसमापनवाद और संशोधनवाद के खिलाफ संघर्ष तेज़ करें !

August 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के बारे में संक्षिप्त जानकारी

August 26, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

रूस यूक्रेन युद्ध में हार जीत के असल मायने

September 6, 2026

युवा शक्ति की पहली ललकार में ही बह निकली इनकी सप्तधारा !

September 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.