Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

बहुरुपिया मुखिया के चक्कर में मत फंसिए

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 14, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

बहुरुपिया मुखिया के चक्कर में मत फंसिए

कृष्ण कांत

महबूब नमाज पढ़कर लौट रहे थे. सामने एक रेलवे ट्रैक था. वे गुजर रहे थे कि अचानक उन्हें चीख सुनाई देती है. जिस मालगाड़ी पर चढ़कर वे ट्रैक पार रहे हैं, उसी के नीचे एक लड़की फंस गई है. गाड़ी चल चुकी है. महबूब अली फुर्ती के साथ गाड़ी के नीचे कूद गए, लड़की का सिर पकड़ कर जमीन से चिपट कर लेटे रहे और गाड़ी के 27 डिब्बे उन पर गुजर गए. लड़की की जान बच गई.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

दरअसल, मालगाड़ी खड़ी हो गई थी. महबूब अपने दोस्त के साथ गाड़ी पर चढ़कर उस पार निकल गए. कुछ और लोग उसके नीचे से पटरी पार कर रहे थे तभी एक नाबालिग लड़की का पैर फंस गया. इसी दौरान गाड़ी चल पड़ी और लड़की गाड़ी के नीचे ही फंस गई.

पेशे से कारपेंटर महबूब ने लड़की को बचाने के लिए एक सेकेंड गंवाए बिना अपनी जान की बाजी लगा दी. किसी ने इसका वीडियो बना लिया जो अब वायरल हो रहा है.

यह घटना भोपाल के बरखेड़ी फाटक की है. महबूब ने बताया कि वह फर्नीचर बनाने का काम करते हैं. 5 फरवरी को सोनिया कॉलोनी से नमाज पढ़कर आ रहे थे. बरखेड़ी फाटक के पास एक मालगाड़ी धीरे-धीरे आकर रूक गई. वह और उनका एक दोस्त मालगाड़ी के ऊपर से निकल गए, तभी एक लड़की नीचे से निकल रही थी और इसी दौरान मालगाड़ी चलने लगी. वह घबराकर चिल्लाने लगी. तभी मैं तुरंत अंदर घुस गया और लड़की को लेकर पटरी पर लेट गया. हादसे के बाद लड़की अपने परिजनों के साथ चली गई.

महबूब ने अपनी जान की परवाह किए बगैर लड़की की जिंदगी बचाई, इसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया है. एक स्वयंसेवी संस्था ने महबूब को उपहारस्वरूप मोबाइल फोन दिया है क्योंकि उनके पास फोन नहीं था.

मैं यह कहानी सुबह से लिखना चाहता था. बहुत थकने के बाद भी मन नहीं माना. भले ही चार लोगों तक पहुंचा सकूं लेकिन दुनिया को यह बताना जरूरी है कि महबूब जैसे निश्छल और नेकदिल लोग कम होते हैं. इंसानियत यही है जो महबूब ने किया.

इस देश का मुखिया कहता है कि दंगाइयों को कपड़ों से पहचाना जा सकता है. क्या इस दाढ़ी और टोपी वाले मसीहा को देखकर आप बता सकते हैं कि वह एक लड़की के लिए आज खुदा बन गए और उसकी जान बचा ली ? आपको बरगलाया जा रहा है. कपड़े और हुलिए से इंसान नहीं पहचाने जा सकते. कपड़ा, हुलिया, रंग, क्षेत्र, जाति, धर्म से नफरत पहचानी जाती है. इन सबसे जुड़े जज्बात नफरत के कारोबारियों के औजार हैं

किसी बहुरुपिये के चक्कर में मत फंसिए. आपके आसपास भी तमाम महबूब होंगे. आपसे कहा जा रहा कि उनके पहनावे और पहचान के आधार पर उनसे नफरत कीजिए. आपको यह नहीं करना है. क्या पता किसी दिन आप फिसल जाएं और जो हाथ आपको थाम ले, वह किसी महबूब का ही हो. अपने दोस्त के रूप में, पड़ोसी के रूप में, गांव या शहर के पहचान के रूप में, हर महबूब से मोहब्बत बनाए रखें. इंसानियत में थोड़ा हिस्सा तो आपका भी है.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

रोजगार और कारोबार की मंदी और आत्महत्या करते लोग

Next Post

हिजाब पर खिंचाव अर्थात, नया संसद, नया संविधान, नया देश बनाने की कवायद

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

हिजाब पर खिंचाव अर्थात, नया संसद, नया संविधान, नया देश बनाने की कवायद

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

26 मार्च : बांका में शहीद स्मृति दिवस समारोह

March 15, 2022

इस चुनाव परिणाम ने भाजपा का पर कतर दिया

June 15, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.