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साम्प्रदायिकता की जहर में डूबता देश : एक दास्तां

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 23, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
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साम्प्रदायिकता की जहर में डूबता देश : एक दास्तां

Md. Belalमो. बेलाल आलम, सामाजिक कार्यकर्ता, हेल्पिंग हैंड, पटना

बचपन मे हम सभी कभी पढ़ा और सुना करते थे, ‘मज़हब नही सिखाता. आपस में वैर रखना. हिंदी है हम वतन है हिन्दुस्तान हमारा.’ और हमारा देश चैनों-अमन से बिना किसी जाति-धर्म के एक-दूसरे के दुःख-सुख में साथ रहता था. पर आज के वक्त साम्प्रदायिक राजनीति ने समाज को इस कदर विषाक्त कर दिया है कि जिस सरकार को जनता देश के विकास के लिए चुनी है, वह सरकार अपने हित के लिए जाति और धर्म के नाम पर इंसान को इंसान का दुश्मन बना दिया है.

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हमारे देश में शक और नफरत के नज़र से देखे जाने वाला इंसान और कोई नहीं वो मुसलमान है. मुझे लगता था कि हमारे देश के जो पढ़े-लिखे लोग हैं वे धर्म में भेदभाव नहीं रखते होंगे. पर आज जो मेरे साथ हुआ, इससे ये साबित हो गया कि राजनीतिक साम्प्रदायिक हवाओं ने हमारे देश में धर्म की ऐसी आंधी ला दी है, जिसके बंदिश में पूरा देश आ चुका है.

कल मैं और मेरे एक मित्र अशोक राज पथ, पटना के एक एयरटेल स्टोर पर गया. हम दोनों को अपना पुराना सिम एयरटेल से अपग्रेड कराना था. मैं कुर्ता पहने था और मेरे मित्र पैंट शर्ट में. जैसे ही हम स्टोर में प्रवेश करते हैं कि गार्ड ने पूछा, ‘क्या बात है ?’
मैंने बताया, ‘सिम अपग्रेड करना है.’
गार्ड ने मुझसे पूछा, ‘किसका सिम है ?’
मैंने कहा, ‘मेरा है.’
गार्ड ने पूछा, ‘किसके नाम पर है ?’
मैंने बताया, ‘मेरे नाम पर.’
फिर गार्ड ने पूछा, ‘सिम लाये हैं ?’
मैंने कहा, ‘हांं, लाए हैं.’
फिर पूछा, ‘कहां है ?’
मैंने कहा, ‘मोबाइल में.’
फिर गार्ड ने बोला, ‘। Id proof … है ?’
मैंने कहा, ‘मोबाइल में फ़ोटो है चलेगा ?’
उसने कहा, ‘नहीं.’
मैं समझ रहा था उसके खेल को. फिर मैंने बोला, ‘पैन चलेगा ?’
गार्ड ने बोला, ‘दिखाइए.’

मैंने पैन कार्ड निकाला और उसके हाथ में दे दिया. मेरा पैन कार्ड एक ट्रांसपेरेंट कवर में था. उस गार्ड ने पैन कार्ड को कवर से निकाल कर इस तरह से देखा मानो मैं कोई आतंकवादी था. ये सारा खेल एयरटेल स्टोर के अंदर कस्टमर केयर ऑफिसर के सामने हो रहा था. फिर उसने मेरा मोबाइल मांगा और कोड सेंड किया. फिर उसने मुझे नया सिम दिया.

बगल में मेरे मित्र थे, अब थी उनकी बारी.
उनसे पूछा, ‘सिम लाये हैं ?’
मेरे मित्र ने कहा, ‘हांं.’
गार्ड ने पूछा, ‘Id लाये हैं ?’
मित्र ने बोला, ‘नहीं.’
गार्ड ने बोला, ‘किसके नाम पर है ?’
मेरे मित्र ने अपना नाम बताया. फिर मेरे मित्र ने बोला, ‘नहीं हो पायेगा न ? id नहीं है. पर देखिए.’

बिना कुछ बोले एयरटेल स्टोर वाले ने उसे नया सिम इशू कर दिया. शायद आप समझ गए होंगे. मेरे मित्र हिन्दू थे और मैं मुस्लिम.

इस प्रकार की घटना ये दर्शाती है कि मुसलमानों के प्रति क्या मानसिकता बना दिया है देश में साम्प्रदायिक राजनीति करने वाले कर्णधारों ने. बात यहीं खत्म नहीं होती है. सिम मिलने के बाद एक्टिवेशन काउंटर पर एग्जीक्यूटिव ने मेरा मोबाइल 10 से 15 तक ले कर रखा, जबकि मेरे मित्र का मोबाइल बिना छुए एक्टिवेट कर दिया गया.

एयरटेल स्टोर वाले अगर वेरिफिकेशन सिस्टम बनाते हैं तो वह सभी के लिए समान होना चाहिए, न कि किसी एक जाति या धर्म के लिए अलग. मैं शर्मिन्दा हूं समाज के ऐसे लोगों से जो समाजिक या व्यवसायिक कार्योंं में भी जातिवाद करते हैं. एक अच्छी सोच समाज और देश को आगे बढ़ा सकती है, तो एक बुरी और साम्प्रदायिक सोच देश को गुलामी के दलदल में भी धंसा देगी.

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