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Home गेस्ट ब्लॉग

एसबीआई : पापों का प्रायश्चित

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 4, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
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एसबीआई : पापों का प्रायश्चित

पं. किशन गोलछा जैन, ज्योतिष, वास्तु और तंत्र-मंत्र-यन्त्र विशेषज्ञ
मिश्रा जी, ये F5 किधर है ?’ मैडम की उम्र 44-45 के आसपास होने के कारण शायद मिश्रा जी पास आकर मदद करने की जहमत नहीं उठाते इसलिये वहीं बैठे-बैठे जोर से बोलते हैं, ‘की-बोर्ड में सबसे ऊपर देखिये मैडम !’

जरूरी नहीं कि पापों के प्रायश्चित के लिये मलमास में आप दान पुण्य ही करे, आप एसबीआई में खाता खुलवा कर भी प्रायश्चित कर सकते हैं. अगर भूल से छोटा-मोटा पाप हो गया हो तो बैलेंस पता करने चले जाये. चार काउन्टर पर धक्के खाने के बात पता चलता है कि बैलेंस मिश्राइन मैडम बतायेगी.

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मिश्राइन मैडम का काउन्टर कौन-सा है ? ये पता करने के लिए फिर किसी काउन्टर पर जाना पड़ता है. तब आपका लेवल वन कम्प्लीट होता है (यानि मिश्राइन मैडम का काउन्टर पता चल गया है लेकिन अभी थोड़ा वेट करना पड़ेगा क्योंकि मैडम अभी सीट पर नहीं है). आधे घंटे बाद चश्मा लगाये पल्लू संभालती हुई युनिनोर की 2जी स्पीड से चलती हुई मैडम सीट पर विराजमान हो जाती है.

आप मैडम को खाता नंबर देकर बैलेंस पूछते हैं. मैडम पहले तो आपको इस तरह घूरती है जैसे आपने उसकी तिजोरी की चाबी मांग ली हो ! आप भी अपना थोबड़ा ऐसे बना लेते है जैसे सुनामी में आपका सब कुछ उजड़ गया है और आज की तारीख में आपसे बड़ा लाचार दुःखी कोई नहीं है.

मैडम को आपके थोबड़े पर तरस आ जाता है और बैलेंस बताने जैसा भारी काम करने का मन बना लेती है लेकिन इतना भारी काम अकेली अबला कैसे कर सकती है ? तो मैडम सहायता के लिए आवाज लगाती है ‘मिश्रा जी, ये बैलेंस कैसे पता करते है ?’ मिश्रा जी एक अबला की करुण पुकार सुनकर अपने ज्ञान का खजाना खोल देते हैं और मिश्राइन मैडम को बताते हैं कि पहले तो खाते के अंदर जाकर क्लोजिंग बैलेंस पर क्लिक करने पर बैलेंस आ जाता था, लेकिन अभी सिस्टम चैंज हो गया है इसलिये अभी आप F5 दबाये और इंटर मार दे तो बैलेंस दिखा देगा !’

मिश्राइन मैडम चश्मा ठीक करती है. तीन बार मोनिटर की तरफ और तीन बार की-बोर्ड की तरफ नजर मारती है, फिर उंगलियां की-बोर्ड पर ऐसे फिराती है जैसे कोई तीसरी क्लास का लड़का वर्ल्ड मैप में सबसे छोटा देश मस्कट ढूंढ रहा हो. मैडम फिर मिश्रा जी को मदद के लिए पुकारती है, ‘मिश्रा जी, ये F5 किधर है ?’ मैडम की उम्र 44-45 के आसपास होने के कारण शायद मिश्रा जी पास आकर मदद करने की जहमत नहीं उठाते इसलिये वहीं बैठे-बैठे जोर से बोलते हैं, ‘की-बोर्ड में सबसे ऊपर देखिये मैडम !’

लेकिन सबसे ऊपर तो सिर्फ तीन बत्तियां जल रही है. मिश्राइन मैडम फिर से लाचार होकर पूछती है क्योंकि कम्प्यूटर चलाना अभी भी ठीक से आता नहीं है. तभी मिश्रा जी की फिर आवाज आयी – ‘हां, उन बत्तियों के नीचे एक लम्बी लाईन है जिसमे F1 से लेकर F12 तक है, वहां देखिये !’ फायनली, मैडम को F5 मिल जाता है.

मैडम झट से बटन दबा देती हैं लेकिन जैसे कि सरकारी कम्प्यूटर में अभी भी विंडो एक्सपी ही प्रयोग में है तो मोनिटर पर आधे घंटे जलघड़ी (कुछ लोग उसे डमरू समझते हैं) बनी रहती है. अंत में, एक मैसेज आता है, ‘Session expired – Please check your connection.’ मैडम एक नजर आपके लाचारी से पुते चेहरे पर डालती है और कहती है – ‘सॉरी, सर्वर में प्रोब्लम है.’

कहने का टोन ठीक वैसा ही होता है जैसे पुरानी फिल्मों में डॉक्टर ऑपरेशन थियेटर से बाहर आ कर कहता था- ‘सॉरी !!! हमने बहुत कोशिश की पर ठाकुर साहब को नहीं बचा पाये’ और आप अंदर से धधकते दिल में मैडम का मर्डर कर देने वाले विचार के साथ चेहरे पर जबरन मुस्कराते हुए कहते हैं – ‘कोई बात नहीं मैडम.’

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