Friday, July 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

तानाशाही, आपकी मर्दशाही से पृथक नहीं

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 2, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

तानाशाही, आपकी मर्दशाही से पृथक नहीं

कल के फेसबुक लाइव में इन तस्वीरों को देखा. सूरत में ये औरतें शाहीनबाग की तरह सड़कों पर उतरीं हुईं हैं. चार औरतें स्टेज पर हैं, चारों एक विशेष परिधान से ढकी हुई. चारों आंख से लेकर, नाक, गला, हाथ, घुटने, सब पर काले कपड़े में तहबन्द. सामने सुनने वाली औरतों की भीड़ है, सब उसी विशेष परिधान में ढकी हुई हैं.

You might also like

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

राजनीति विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो इस तस्वीर से खूबसूरत क्या तस्वीर हो सकती है ? इस पल से सुंदर क्या कोई सुंदर पल हो सकता है ? औरतें जिनकी जुबान पर धर्म और मर्दों ने ताले जड़े हुए हैं, उनकी जुबानों पर आज इंकलाब है. लेकिन इसी तस्वीर को सामाजिक विज्ञान की दृष्टि से देखा जाए तो ये बेहद डरावनी और घृणित तस्वीर है, इससे अधिक दुर्भाग्य कहां ?

मेरा सवाल इन औरतों से नहीं है. क्योंकि मैं जानता हूंं इन औरतों के हाथ कुछ भी नहीं. चूंकि मैंने अपने घर की औरतें देखी हैं. किस तरह घर में मर्दों का एकछत्र शासन चलता है, जहां मांं की भूमिका परोक्ष-अपरोक्ष रूप से एक अवैतनिक नौकरानी से अधिक नहीं. सैंकड़ों बार पिता से मांं को पिटते देखा है. मुझे याद है मेरी बहनें कैसे मर्दों की इच्छाओं के नीचे दबकर रह जातीं थी. इसलिए मेरा सवाल इन औरतों से है ही नहीं.

मेरा सवाल मर्दों से है. क्योंकि आज यदि कोई औरत सड़क पर है तो इसमें एक अनकही अनुमति मर्दों की है मुझे मालूम है. लेकिन मुझे शक है जो मर्द अपनी नागरिकता की चिंता में है, जिसे अपनी आजादी प्यारी है, वह अपनी बीबी की स्वतंत्रता के प्रति उतना संवेदनशील है भी कि नहीं ? मुझे इस पर पूरा शक है क्योंकि मैंने अपने घर के मर्द देखें हैं, पिता देखा है, भाई देखा है. औरतों के मामले में, मुझे मर्दों के नारों पर शक होता है.

मनुवाद से आजादी की जरूरत हिंदुओं को है, मुस्लिमों को भी है, लेकिन घर में शरीयत लागू करके मनु से आजादी का नारा बेतुका रह जाता है. लोकतंत्र और संविधान की दुहाइयों में औरतों की अनगिनत चीखों को भी शामिल करना चाहिए. ब्राह्मणवाद, आपके मौलवीवाद से पृथक नहीं है. तानाशाही, आपकी मर्दशाही से पृथक नहीं है. मनुस्मृति और शरीयत-हदीस में कोई अधिक अंतर नहीं है.

आपको बाजार में अपनी दाढ़ी पकड़े जाने की चिंता है, तो आपको अपनी औरतों की वर्षों पुरानी घुटन की भी चिंता होनी चाहिए. जिसकी घर मे ऊंची आवाज भी आपके अभिमान पर चोट कर जाती है.

कुरान जब तक मुहम्मद के मुंह पर रही थी, पवित्र थी, लेकिन जैसे ही मौलवी-मुल्लों के मुंह पर आई, उसमें मिलावट कर दी गई, घालमेल कर दिया गया. तब से लेकर आज तक इस्लाम में एक इंच का भी बदलाव नहीं आया. औरतें आपके लिए भैंस-गाय पशुओं से अधिक नहीं रहीं. इस्लाम धर्म ने औरतों को बंधक बनाया हुआ है. वर्षों होने के बावजूद एक चूं करने वाली आवाज को भी आपने मनुवादियों की तरह ही कुचल दिया.

धार्मिक-सामाजिक सुधारों को कुचलकर आपने किसी अन्य धर्म की हानि नहीं की, सिर्फ अपनी की. अपने बच्चों की की. अपनी आने वाली पीढ़ियों की.

बुर्का या पर्दा एक कपड़ा भर नहीं, बल्कि औरतों पर मर्दों के नियंत्रण का सूचक है. जहां औरतों को उनकी मर्जी के कपड़े पहनने की स्वतंत्रता है वहां उसे स्कूल जाने की स्वतंत्रता भी होती है, अपनी पसन्द का पति चुनने की भी होती है. देर शाम घर लौटने की आजादी भी होती है, नए दोस्त बनाने की भी होती है. दूसरे मजहब के लड़कों से बातें करने की भी आजादी होती है. कपड़ों की स्वतंत्रता, जीने की स्वतंत्रता से पूरी तरह जुड़ी हुई है.

शहर की किसी लड़की के लिए बुर्का चॉइस हो सकती है, जैसे हिंदुओं में साड़ी. लेकिन गांव की औरत के लिए बुर्का चॉइस नहीं है, उसके लिए बुर्का एक कपड़ा भर नहीं है बल्कि मर्दों का एक आदेश है, जिसका पालन अनिवार्य है. बुर्का अलिखित, अघोषित धार्मिक आदेश है.

चॉइस होती तो पूरी भीड़ में कोई एकजन उस परिधान में दिखती, लेकिन यहां मंच से लेकर श्रोताओं तक एक ही तरह का परिधान है, ये मर्दों का सामाजिक अनुशासन है जिसकी शक्ति का स्रोत धर्म है, शरीयत है, हदीस है.
पूरी भीड़ के लिए एक खास कपड़ा चॉइस नहीं हो सकता.

इस तस्वीर को देखकर जितनी घृणा मर्दों से हो रही है, जितनी घृणा धर्म और आपकी कथित परम्पराओं से हो रही है. उतनी ही ईर्ष्या मुझे इन औरतों के भाग्य से हो रही है. इन औरतों को आज सड़क पर आने का मौका मिल गया, जो इनके आत्मविश्वास को एक स्तर से ऊपर ले जाने वाला है. पता नहीं मेरे घर की औरतों को ये मौका कब मिल पाएगा ?

मुझे यकीन है जो औरतें मर्दों के लिए एक तानाशाह सत्ता से लड़ सकती है, अपनी आजादी के लिए एक न एक दिन मर्दों का मुंह भी नोच सकती है.

Read Also –

नारी शिक्षा से कांंपता सनातन धर्म !
रेप और गैंगरेप जैसे अपराध पर पुरुषों की मानसिकता
तुम बलात्कारी हो, बलात्कारियों के पक्षधर हो, औरतों के खिलाफ हो
साम्प्रदायिक और जातिवादी कचरे का वैचारिक स्रोत क्या है ?

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

बजट 2020 : न लीपने का और न पोतने का

Next Post

मीडिया के बाद ‘न्यायपालिका’ का ‘शव’ भी आने के लिए तैयार है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

by ROHIT SHARMA
July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

by ROHIT SHARMA
July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

लोकतंत्र के अंतिम किले का पतन : भाजपा की ढाल बना चुनाव आयोग

by ROHIT SHARMA
June 16, 2026
Next Post

मीडिया के बाद 'न्यायपालिका' का 'शव' भी आने के लिए तैयार है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भारत सरकार के दोनों फैसले नेहरूयुगीन नीतियों का ही स्वाभविक विस्तार है

October 8, 2018

वास्तुशास्त्र

May 20, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

Uncategorized

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
गेस्ट ब्लॉग

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 1, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026
Uncategorized

‘ऑपरेशन कगार के खिलाफ और भारत में जनयुद्ध के समर्थन में लामबंदी जारी रखें’ – ICSPWI इटली

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

क्या कम्युनिस्ट पार्टी ने वास्तव में सुभाष चन्द्र बोस को ‘तोजो का कुत्ता’ कहा था ?

July 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जाति का सवाल वर्ग संघर्ष का ही एजेंडा है !

July 20, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 3 : उत्तर समन्वय समिति, सीपीआई माओवादी

July 22, 2026

उत्तर-आधुनिक अवसरवाद, भाग – 2, उत्तर समन्वय समिति (एनसीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी)

July 20, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.