Saturday, June 13, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

बिगड़ते आर्थिक हालात, FRDI बिल की धमक और खतरे में जमाकर्ताओं की जमा पूंजी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 8, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

बिगड़ते आर्थिक हालात, FRDI बिल की धमक और खतरे में जमाकर्ताओं की जमा पूंजी

गिरीश मालवीय, पत्रकार

कल आर्थिक जगत से दो खबरें आईं है जो भारत के बिगड़ते आर्थिक हालात की सही तस्वीर बयान करती है. और यह भी बताती हैं कि FRDI बिल भी बहुत जल्द लाया जाएगा.

You might also like

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

परसों आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास ने सरकारी क्षेत्र के बैंक प्रमुखों की एक बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने सबसे पूछा कि आप इतने कम कर्ज़ क्यों बांंट रहे हो ? कर्ज़ वितरण की रफ्तार इतनी धीमी क्यों हो गयी है ?

आरबीआई गवर्नर ठीक कह रहे हैं. आरबीआई ने पिछले शुक्रवार को जनवरी, 2020 के कर्ज वितरण के आंकड़ें जारी किए थे. उस महीने कर्ज वितरण में मात्र 8.5 फीसद की वृद्धि हुई थी, जबकि जनवरी, 2019 में यह वृद्धि 13.5 फीसद की थी.

बैंकों के प्रमुखों ने आरबीआई गवर्नर से कहा कि वे कर्ज देने को तैयार हैं लेकिन बाजार में कर्ज लेने वालों ही कम हो गए हैं. बाजार में मांग नहीं है और उद्योग जगत को ऐसा लग रहा है कि अभी मांग बढ़ने वाली नहीं है. ऐसे में उद्योग जगत नया कर्ज लेने के लिए आगे नहीं आ रहा है. सबसे खराब हालत सर्विस सेक्टर की है, जिसमें कर्ज लेने की रफ्तार बहुत तेजी से घट रही है. एक बैंक प्रमुख ने बैठक में साफ तौर पर कहा कि कर्ज वितरण की रफ्तार आने वाले दिनों में और कम हो सकती है.

एक बात हम सभी जानते हैं कि बैंक जमाकर्ताओं की जमा रकम पर उन्हें कम ब्याज देते हैं और उनकी जमा रकम से लोन लेने वालों को अधिक ब्याज पर पैसा देते हैं. इसी डिफरेंस के पैसे पर बैंक अपना खर्च चलाते हैं. अगर लोन लेना ही कम हो गया है तो स्थिति बहुत बुरी है.

दूसरी खबर ओर भी भयानक है. इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की है. उसमें कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में जारी सुस्ती ( मंदी ) के कारण अगले तीन वर्षों में 10.52 लाख करोड़ रुपये का कॉरपोरेट कर्ज एनपीए हो सकता है. यह राशि कुल कॉरपोरेट कर्ज की करीब 16 फीसदी है.

रेटिंग एजेंसी ने जोखिमों का आंंकलन करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों का विश्लेषण किया. इसके बाद निष्कर्ष निकाला कि रियल एस्टेट, ऊर्जा, ऑटो और सहायक क्षेत्र, दूरसंचार व इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित 11 क्षेत्रों पर ऋण डिफॉल्ट का सबसे ज्यादा जोखिम है.

एजेंसी ने इस विश्लेषण के लिए 500 बड़े कर्ज वाली कंपनियों की संपत्ति गुणवत्ता और उनकी उत्पादकता व गैर-उत्पादक संपत्तियों का गहन अध्ययन किया है. इससे कंपनियों के रीफाइनेंसिंग जोखिमों का भी खुलासा होता है.

भारत का एनपीए रेशियो ‘हाई एनपीए’ वाले देशों में सबसे ज्यादा है. भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर मशहूर वाणिज्यिक एजेंसी मूडीज ने पिछले साल एक बड़ी चेतावनी देते हुए इसे दुनिया की सबसे असुरक्षित व्यवस्थाओं में से एक करार दिया था.

भारत की अर्थव्यवस्था की हालत पहले से ही बहुत खराब है, मोदी सरकार यह बात मानती हैं या नहीं मानती इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता. साफ नजर आ रहा है कि कोरोना वायरस के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी छाने वाली है. भारत की जीडीपी ग्रोथ लगातार 7 तिमाहियों से गिरती जा रही है. सुधार के कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं और इस सबका पहला असर भारत की बैंकिंग व्यवस्था पर ही पड़ेगा.

सरकार पहले ही फैसला कर चुकी है कि प्रमुख सरकारी बैंकों को अब बेलआउट पैकेज नहीं दिया जाएगा इसलिए ही एक बार फिर से मोदी सरकार FRDI बिल लाने जा रही है, जिसका सबसे प्रमुख प्रावधान बेल इन है, जिसके अंतर्गत बैंक द्वारा जमाकर्ताओं के पैसे को बांड या शेयर आदि में बदल कर खुद को दिवालिया होने से बचने प्रबंध करना होगा. खतरे की घण्टी की आवाज लगातार तेज होती जा रही हैं.

Read Also –

नए नोट छापने से रिजर्व बैंक का इन्कार यानी बड़े संकट में अर्थव्यवस्था
एसबीआई : पापों का प्रायश्चित
नोटबंदी के ‘दूरगामी’ परिणाम
विदेशी कंपनियों के मुनाफा के लिए लोगों का जीवन बरबाद कर रही है सरकार
पीएमसी (पंजाब और महाराष्ट्र को-आपरेटिव बैंक)
ट्रम्प और मोदी : दो नाटकीयता पसंद, छद्म मुद्दों पर राजनीति करने वाले राजनेता

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

दिल्ली : भाजपा का इरादा बहुत बड़ी हिंसा करने का था

Next Post

‘देश नहीं बिकने दूंगा’ कहने वालों ने आज उन 28 सरकारी कंपनियों को बेचने की लिस्ट जारी की

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

by ROHIT SHARMA
June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

by ROHIT SHARMA
June 4, 2026
Next Post

‘देश नहीं बिकने दूंगा’ कहने वालों ने आज उन 28 सरकारी कंपनियों को बेचने की लिस्ट जारी की

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

आंदोलन के गर्भ से पैदा हुआ संविधान, सत्ता के बंटवारे पर आकर अटक गई

March 18, 2019

श्मशान और कब्रिस्तान ही है अब विकास का नया पायदान

June 21, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026
गेस्ट ब्लॉग

भारत में अमीरी के प्रति, गैर बराबरी के प्रति गहरी सहनशीलता है

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

कैसे एक पेपर लीक का मुद्दा घूमते-घूमते ‘हिंदू-मुस्लिम’ तक पहुंच गया ?

June 10, 2026
गेस्ट ब्लॉग

जिन्हें भाजपाई होने पर शर्म आती है, इसलिए खुद को समाजवादी कहते हैं

June 4, 2026
गेस्ट ब्लॉग

धरती और औरत, दोनों के प्रति आदिवासी समाज का नजरिया गैर आदिवासी समाज से भिन्न

June 10, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

मोदी सरकार का योजना जनता की आंखों में धूल झोंकने वाली ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ है !

June 12, 2026

सशस्त्र संघर्ष के समर्थन में गणपति का साक्षात्कार

June 12, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.