Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कोरोना से लड़ने के दो मॉडल

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 27, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

कोरोना से लड़ने के दो मॉडल

गिरीश मालवीय

चाइना के वुहान में जो कोरोना का संक्रमण फैला था, उसके बाद पूरी दुनिया में कोरोना से लड़ने के दो मॉडल सामने आए. एक इटली का मॉडल है, एक दक्षिण कोरिया का मॉडल है.

You might also like

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

पहले इटली का मॉडल क्या है, वो समझ लेते हैं क्योंकि हमने भी वही मॉडल अपनाया है. इटली में 20 फरवरी को यहां पहला कोरोना पॉजिटिव केस आया था लेकिन अचानक 23 फरवरी को एक साथ 130 लोग कोरोना पॉजिटिव मिले. इसके बाद देश के 11 शहरों को सील कर दिया गया.

उसी रात इटली के पीएम ने जनता से कहा कि ‘हम पहला देश हैं जो इस हद तक नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं.’ ठीक ऐसा ही एटीट्यूड मोदी सरकार का भी था, जब आलोचकों का जवाब देते हुए वह WHO द्वारा तारीफ किये जाने की दलील दे रहे थे.

इटली की सरकार वायरस के इस कदर फैल जाने के लिए तैयार नहीं थी. उन्होंने एक्शन तो लिया लेकिन एक्शन पर अमल नहीं किया. इटली के मिलान शहर में एक कैंपेन शुरू हो गया- ‘Milan Doesn’t Stop.’ ठीक ऐसे ही भारत मे देश की जनता ‘जनता कर्फ्यू’ की शाम 5 बजे चौराहे पर आकर कोरोना उत्सव मनाती देखी गई.

उधर इटली में अस्पताल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही थी. आखिरकार 8 मार्च को पीएम ने इटली के उत्तरी हिस्से में लॉकडाउन की घोषणा की, तब तक 7,375 लोग कोरोना पॉजिटिव थे. तब जाकर इसे नेशनल इमरजेंसी घोषित किया गया लेकिन तब तक देर हो चुकी है और संक्रमण काफी फैल चुका था. अब रोज सैकड़ों मौतें इटली में हो रही है, जो जल्द ही हजारों मौतें प्रतिदिन में बदल जाएगी.

अब दक्षिण कोरिया ने इस समस्या का सामना कैसे किया, वो हम समझ लेते हैं. दक्षिण कोरिया ने वायरस से लड़ने के लिये शहर को लॉक डाउन करने के उपाय के बजाए एक अलग तरीका अपनाया.

दक्षिण कोरिया का कहना है कि पूरे शहर को बंद करना सही तरीका नहीं है. इसके बजाय ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच होनी चाहिए. साउथ कोरिया की सरकार का शुरू से इस बीमारी को लेकर अप्रोच थोड़ा अलग रहा. वहां पर वैज्ञानिकों ने बड़ी तेजी से टेस्ट की तैयारी की और सरकार ने बायोटेक कंपनियों को टेस्ट किट तैयार करने का टास्क दिया और उन्होंने कुछ ही दिनों में इसे पूरा कर दिया. जल्द ही साउथ कोरिया ने प्रतिदिन 20 हजार आबादी का कोरोना वायरस टेस्ट करने की क्षमता विकसित कर ली.

दक्षिण कोरिया ने तय किया कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की जांच करेंगे ताकि यह साफ हो जाए कि कौन संक्रमित है और कौन नहीं. इसके लिए 50 ड्राइव थ्रू टेस्ट स्टेशन बनाए गए. जहां लोग अपनी कार ड्राइव करते हुए पहुंच सकते थे. जांच की पूरी प्रक्रिया मुफ्त रखी गई. वहांं प्रति व्यक्ति इस प्रक्रिया में मात्र दस मिनट लगा और चंद घंटों में रिज़ल्ट दे दिये गए.

फोन-बूथ की तरह बनाए गए इन जांच सेंटर्स में मेडिकल स्टाफ एक प्लास्टर पैनल की आड़ से संदिग्धों की जांच करता है. यहां पर negative air pressure रखा गया ताकि कमरे से बाहर हवा का कोई भी पार्टिकल न जा सके. इससे संक्रमण फैलने का डर बहुत कम हो गया.

अब यहांं खास बात यह है कि दक्षिण कोरिया सरकार ने डाटा को एक प्रभावी टूल की तरह इस्तेमाल किया. फरवरी की शुरुआत में ही सरकार ने उन सभी लोगों की आईडी, क्रेडिट-डेबिट कार्ड की रसीद और दूसरे प्राइवेट डाटा निकाल लिया, जो वायरस से संक्रमित पाए गए और उनके जरिए उनके संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान की जाने लगी.

जिन लोगों का टेस्ट पोज़िटिव पाया गया उनके सेल फोन रिकार्ड और क्रेडिट कार्ड के रसीद से पता किया गया कि वह कहां-कहां गये थे और साथ ही यह जानकारी ऑनलाइन कर दी गई ताकि दूसरे भी देख सकें कि उस वक्त उस व्यक्ति के पास तो नहीं थे. जैसे अगर कोई सिनेमा देखने गया तो सीट नंबर के साथ जानकारी पब्लिक कर दी गई. ताकि अगल-बगल बैठे लोगों को पता चल जाए और वे अपना सैंपल दे सके.

एक तरफ जहां इटली में दिनों-दिन कोरोना प्रभावितों और मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरे मॉडल का प्रयोग कर साउथ कोरिया ने इस रफ्तार को बेहद सीमित करने में सफलता पाई है. वहांं पिछले चार सप्ताह में सबसे कम नए केस दर्ज किए गए हैं.

दक्षिण कोरिया का अनुभव बता रहा है कि ऐसी महामारी की स्थिति में आप तभी लड़ सकते हैं, जब आपके पास सैंपल जांच करने की व्यवस्था मुकम्मल हो. पोज़िटिव पाए गए मरीज़ के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने का सिस्टम मौजूद हो. इसमें डाटा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है पर भारत सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है.

अभी WHO ने भी साफ कर दिया है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सिर्फ लॉकडाउन ही काफी नहीं है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, WHO के माइक रायन ने अपने एक बयान में कहा है कि सिर्फ लॉकडाउन ही कोरोना को रोकने के लिए काफी नहीं है, इस वक्त जरूरत है कि जो लोग बीमार हैं और इससे पीड़ित हैं, उन्हें ढूंढा जाए और निगरानी में रखा जाए. तभी इसको रोका जा सकता है.

Read Also –

कोराना संकट : असल में यह हत्यारी सरकार है
कोरोना व जनता कर्फ्यू तथा लॉक डाउन की हकीकत
कोरोना : महामारी अथवा साज़िश, एक पड़ताल
कोरोना संकट : मोर्चे पर उपेक्षित सरकारी मेडिकल सिस्टम ही
मोदी, कोरोना वायरस और देश की अर्थव्यवस्था

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

एक मूर्ख दंगाबाज हमें नोटबंदी, जीएसटी और तालबंदी के दौर में ले आया

Next Post

कोराना संकट कितना प्राकृतिक, कितना मानव निर्मित

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

by ROHIT SHARMA
April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

by ROHIT SHARMA
March 28, 2026
Next Post

कोराना संकट कितना प्राकृतिक, कितना मानव निर्मित

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

इंटरनेट वस्तुतः कम्युनिकेशन की महानतम ऊंचाई है

March 8, 2025

मिटता हुआ यूक्रेन, अस्त होता नाटो

July 8, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.