Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

ताइवान ने पारदर्शिता, टेक्नालॉजी और बिना तालाबंदी के हरा दिया कोरोना को

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 14, 2020
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ताइवान ने पारदर्शिता, टेक्नालॉजी और बिना तालाबंदी के हरा दिया कोरोना को

कम पुलिस, ज्यादा नर्सें : फुटस्क्रैय मेलबोर्न की एक दीवार पर लिखा स्लोगन

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

Ravish Kumarरविश कुमार, पत्रकार, मैग्सेसे अवार्ड प्राप्त

कोरोना महामारी से लड़ने में पूर्वी एशिया के एक और देश ताइवान की खूब तारीफ हो रही है. सवा दो करोड़ की आबादी वाले इस देश में 100 दिन में कोविड-19 के 376 मामले ही सामने आए हैं और 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि यह चीन का पड़ोसी है और चीन से यहां अच्छी खासी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है. ताइवान के करीब साढ़े आठ लाख लोग चीन में काम करते हैं इसलिए ताइवान ख़तरे के निशाने पर था.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि चीन के बाद कोरोना से प्रभावित यह दूसरा देश होगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ताइवान ने यह सब तालाबंदी के बग़ैर हासिल किया क्योंकि जब कोविड-19 का प्रकोप फैला तब ताइवान 24 फरवरी को अहमदाबाद में ट्रंप की रैली जैसी ग़लती कर समय गंवाने में नहीं लगा था और न ही एक राज्य की सरकार गिराने के लिए विधायकों को विमान में भर कर ले जाया जा रहा था. ताइवान में न स्कूल बंद हुआ, न दफ्तर बंद हुए. रेस्त्रां, बार, यूनिवर्सिटी सब खुले हैं.

ताइवान संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन का सदस्य भी नहीं है. चीन के हस्तक्षेप के साये में रहने वाला ताइवान एक लोकतांत्रिक देश है. यहां की सरकारों ने अपनी पारदर्शिता के कारण जनता का विश्वास हासिल किया है. यह विश्वास तभी हासिल होता है जब सरकार जनता से झूठ न बोले या कम बोले. यही कारण है कि जनता महामारी जैसे आपदा के वक्त सरकार पर भरोसा करती है कि वह उसकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को एक जगह लाकर नज़र रख सकती है. जनता यह छूट दे देती है.

ताइवान ने जनता में बने इस विश्वास का लाभ उठाया और कोरोना को काबू में करने की सफलता पा ली. मैंने जितने भी विश्लेषण पढ़े हैं उन सबमें ज़िक्र आया है कि ताइवान ने इस लड़ाई में पारदर्शिता को अपना हथियार बनाया है. सरकार ने लोगों को गुमराह नहीं किया है. अमरीका और भारत का मीडिया जनवरी, फरवरी और मार्च के आधे हिस्से तक क्या कर रहा था, आप अपने विवेक का इस्तेमाल कर सकते हैं.

ताइवान में विशेषज्ञों और विद्वानों को सरकार में भेजने की प्रथा रही है. यहां के राष्ट्रपति Tsai Ingwen लंदन स्कूल ऑफ इकोनमिक्स से पीएचडी हैं. उप राष्ट्रपति Chen Chien-Jen महामारियों के विशेषज्ञ हैं. 2003 में जब सार्स का प्रकोप फैला था तब इन्हें स्वास्थ्य मंत्री बना दिया गया था. Chen अपने फेसबुक पर दुनिया भर में कोविड-19 की स्थिति पर एक विश्लेषण भी लिखते हैं ताकि उनकी जनता बातों को व्यापक संदर्भ में समझ सके.

2009 में स्वाइन फ्लू आया था. सार्स और स्वाइन फ्लू की कामयाबी को ताइवान ने संजो कर रखा है और जब कोरोना का प्रकोप फैला तो उसका भरपूर इस्तेमाल किया. 2003 में ही ताइवान ने भविष्य की महामारियों से लड़ने के लिए नेशनल हेल्थ कमांड सेंटर बना दिया था.

31 दिसंबर को जब चीन के वुहान में कोरोना के विषाणु की ख़बर आई थी और तब उसका नाम कोरोना भी नहीं था, अज्ञात कहा जा रहा था, तभी ताइवान ने चीन से आने वाली उड़ानों को सीमित कर दिया था. चीन से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग होने लगी थी. उन्हें क्वारिंटिन में भेजा जाने लगा था.

20 जनवरी को ही ताइवान ने अपने नेशनल हेल्थ कमांड सेंटर के तहत सेंट्रल एपिडेमिक कमांड सेंटर को सक्रिय कर दिया. सभी मंत्रालय मिलकर नीतियां बनाने लगे और लागू करने लगे. ताइवान के स्वास्थ्य मंत्री इस कमांड सेंटर का नेतृत्व कर रहे हैं. सारी सीमाओं को सील कर दिया गया और नियमित प्रेस ब्रीफिंग होने लगी.

चीन के फैलाए फेक न्यूज़ से लड़ने के लिए भी सरकार ने कमर कस ली. 10 फरवरी को जब ताइवान में 16 मामले ही सामने आए थे और चीन में 31000 तभी ताइवान ने चीन से जुड़ी सभी उड़ानें रद्द कर दीं. चीन, हांगकांग और मकाऊ से आने वाले यात्रियों को क्वारिंटिन में भेजा जाने लगा.

ताइवान के डिजिटल मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए हर ज़रूरी डेटा को एक दूसरे से जोड़ दिया. बीमा कंपनियों से डेटा लिया गया कि किस किस ने विदेश यात्रा के लिए बीमा कराया है और वीज़ा विभाग से जानकारी ली गई. 18 फरवरी से ही तमाम जानकारियां अस्पताल से लेकर क्लिनिक और दवा दुकानों को दी जाने लगीं ताकि जो भी मरीज़ जाए उसकी यात्राओं का इतिहास सबको मालूम रहे. ऐसे लोगों के शरीर का तापमान लिया जाने लगा और क्वारिंटिन पर भेजा जाने लगा.

आम तौर पर सरकारें ऐसी सूचनाओं का इस्तेमाल नागरिकों पर नियंत्रण करने के लिए करती है, मगर ताइवान ने इस मामले में अपनी जनता का विश्वास हासिल किया है. वहां सरकार ऐसा सिर्फ आपदा के समय ही कर सकती है. लोगों को फोन पर अलर्ट जाने लगा कि किस इलाके में जाना ठीक नहीं रहेगा और कहां-कहां पर मास्क मिल जाएगा.

दूसरी तरफ सरकार ने निर्यात बंद कर उत्पादन शुरू कर दिया. जनवरी बीतते-बीतते ताइवान के पास साढ़े चार करोड़ सर्जिकल मास्क हो गए. दो करोड़ N-95 मास्क और 1000 निगेटिव प्रेसर आइसोलेशन रूम बना लिए. ये एक खास तरह का कमरा होता है. जल्दी ही ताइवान के राष्ट्रपति ने एलान कर दिया कि ताइवान एक दिन में एक करोड़ मास्क बना सकता है. लोग सरकार की सुनने लगे. मास्क पहन कर चलने लगे. पुलिस को लाठी नहीं चलानी पड़ी.

( कई प्रकार की वेबसाइट से जानकारी लेकर यह लेख हिन्दी के पाठकों के लिए लिखा है)

Read Also –

मौजूदा कोराना संकट के बीच ‘समाजवादी’ चीन
नियोक्ताओं-कर्मियों के आर्थिक संबंध और मोदी का ‘आग्रह’
कोरोना संकट की आड़ में ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन पर एफआईआर
कोराना : डर के मनोविज्ञान का राजनीतिक इस्तेमाल
कोरोना वायरस के महामारी पर सोनिया गांधी का मोदी को सुझाव

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

‘राष्‍ट्र के नाम सम्‍बोधन’ में फिर से प्रचारमन्‍त्री के झूठों की बौछार और सच्‍चाइयां

Next Post

कोरोना पर कोहराम और लॉकडाऊन 2.0

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

कोरोना पर कोहराम और लॉकडाऊन 2.0

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

खजाना

August 30, 2024

कुमार विश्वास को राज्यसभा न भेजने के फैसले से बेचैन भाजपा

January 4, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.